लोन रिकवरी एजेंटों की गुंडागर्दी की खबरें आए दिन मिलती रहती हैं। अब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने लोन चुका पाने में असमर्थ लोगों को इस प्रताड़ना से बचाने की दिशा में कदम उठाई है। आरबीआई ने गुरुवार को कुछ मापदंड तय कर दिए जिसका पालन सभी बैंकों को करना होगा। हालांकि, अभी ये मापदंड प्रस्तावित ही हैं। ये अभी नियम नहीं बन पाए हैं।
लोन रिकवरी के नाम पर ये सब नहीं कर पाएंगे एजेंट
आरबीआई के प्रस्ताव में कहा गया है कि न तो बैंक एंप्लॉयी या रिकवरी एजेंट वसूली के किसी भी कठोर तरीके का उपयोग करेंगे। आरबीआई के मसौदे में ऐसी किसी भी गतिविधि पर पूर्ण रोक का प्रस्ताव है-
- गाली-गलौच की भाषा का उपयोग करना
- मोबाइल या सोशल मीडिया के जरिए भद्दे मेसेज भेजना
- बहुत ज्यादा कॉल करना
- प्रतिबंधित समय में भी कॉल करना
- अनजान लोगों से कॉल करवाना
- लोगों के सामने प्रताड़ित करना
- किसी की निजता भंग करना
- धमकी देना
- प्रताड़ित करना
रिकवरी एजेंटों की प्रताड़ना से हो गई थी मृत्यु
हाल के वर्षों में लोन रिकवरी के दौरान अमानवीय कृत्यों से भरी घटनाओं की बाढ़ आने लगी है। ये 2000 के दशक की याद दिलाने लगे हैं जब प्राइवेट बैंक लोन रिकवरी के लिए सारी हदें पार कर जाते थे। प्रताड़ना से एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई तब आरबीआई ने सितंबर 2022 में महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनैंशियल सर्विसेज (महिंद्रा फाइनेंस) को एक्सटर्नल एजेंसियों से लोन रिकवरी पर रोक लगाने का निर्देश दिया था। चार महीने बाद यह प्रतिबंध हटा लिया गया था।
आप भी दे सकते हैं आरबीआई के मसौदा नियमों पर राय
आरबीआई ने स्मॉल फाइनैंस बैंक, नॉन-बैंकिंग फाइनैंशियल कंपनियों, गिरवी के बदले उधार देने वाली संस्थाओं और सहकारी बैंकों के लिए भी इसी तरह के प्रस्ताव जारी किए जो जुलाई से लागू हो जाएंगे। लोग 6 मार्च तक इन प्रस्तावों पर अपनी राय दे सकते हैं।
रिकवरी एजेसियों के लिए भी मानक तय
आरबीआई ने बैंकों से कहा कि वो उन्हीं रिकवरी एजेंसियों से काम लें जो अपने प्रतिनिधियों और कर्मचारियों को जॉब देने से पहले उसकी पृष्ठभूमि का अच्छे से पता लगाते हों और जॉब पर रख लेने के बाद भी समय-समय पर उनका वेरिफिकेशन करते रहते हों। आरबीआई ने कहा, 'हर बैंक को यह सुनिश्चित करना होगा कि वो जिन रिकवरी एजेंटों से काम ले रहे हैं, इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ बैंकिंग एंड फाइनैंस (आईआईबीएफ) या इसे संबद्ध किसी अन्य संस्था से सर्टिफाइड हों। आईआईबीएफ रिकवरी एजेंटों को ट्रेनिंग देती है।'
घर या काम करने वाली जगह नहीं हो लोन वसूली
आरबीआई के प्रस्ताव में कहा गया है कि छोटे लोन लेने वाले अगर भुगतान से चूक जाएं तो बैंक के प्रतिनिधि उनसे उनकी सहमति से तय जगह पर मुलाकात करे। अगर लोन लेने वाला किसी जगह पर आकर बात करने को राजी हो जाए और मौके पर आए नहीं तब ऐसा दो-तीन बार होने पर बैंक के प्रतिनिधि उसके घर या उसके काम करने की जगह पर लोन रिकवरी के लिए जा सकते हैं।
माइक्रोफाइनैंस इडस्ट्री बॉडी सा-धन के चीफ डायरेक्टर और चीफ एग्जिक्युटिव जीजी मैमन कहते हैं कि ऐसा तो पहले से ही किया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'माइक्रोफाइनैंस लोन की वसूली ऐसे ही की जाती है। जब लोन लेने वाला लगातार टालमटोल करता है तभी एजेंट उसके घर जाते हैं।' आरबीआई हमेशा से यही कहता रहा है कि लोन की वसूली घर या काम करने वाले जगह के बाहर ही होनी चाहिए।