SGB Redemption Price: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड निवेशकों के लिए एक बड़ा अपडेट जारी किया है। सोमवार, 20 अप्रैल को जारी एक ताजा नॉटिफिकेशन के मुताबिक, सेंट्रल बैंक ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड 2020-21 सीरीज-VII के लिए प्रीमेच्योर रिडेम्पशन का ऐलान किया है। यह समय पूर्व निकासी बॉन्ड जारी होने के साढ़े पांच साल बाद ऐलान किया है। जब अक्टूबर 2020 में यह बॉन्ड जारी किया गया था, तब इसकी कीमत 5,051 रुपये प्रति यूनिट तय की गई थी। वहीं, 20 अप्रैल 2026 को 15,254 रुपये प्रति यूनिट हो गई है। यानी निवेशकों की कैपिटल में 202% से भी अधिक की भारी-भरकम बढ़ोतरी हुई है।
कैसे तय होता है SGB रिडेम्पशन का प्राइस?
भारतीय रिजर्व बैंक(RBI) की गाइडलाइंस के मुताबिक, इस रिडेम्पशन प्राइस का निर्धारण 'इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन लिमिटेड' (IBJA) की तरफ से प्रकाशित आंकड़ों के आधार पर किया जाता है। इसके लिए निकासी की तारीख से ठीक पहले के तीन कामकाजी दिनों के 999 शुद्धता वाले सोने के क्लोजिंग प्राइस का औसत निकाला गया है। इसी आधार पर 15,254 रुपये की राशि निर्धारित की गई है।
हर साल 2.5% ब्याज का भी लाभ
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें निवेशक को केवल सोने की कीमत बढ़ने का ही लाभ नहीं मिलता, बल्कि होल्डिंग पीरियड के दौरान सालाना 2.5% की दर से निश्चित ब्याज भी दिया जाता है। इसका मतलब है कि पिछले साढ़े पांच वर्षों में निवेशकों ने छमाही आधार पर ब्याज की कमाई भी की है। अब उन्हें मूल निवेश पर तीन गुना से ज्यादा की राशि वापस मिल रही है।
SGB का क्या है मैच्योरिटी पीरिएड ?
आमतौर पर इन बॉन्ड्स की कुल अवधि आठ साल की होती है, लेकिन सरकार ने निवेशकों को तरलता मुहैया कराने के लिए पांच साल बाद प्री-मैच्योर रिडेम्पशन का ऐलान करती है।
सॉवेरन गोल्ड बॉन्ड पर टैक्स लगता है या नहीं?
मैच्योरिटी पर कैपिटल गेन टैक्स से छूट: अगर आपने पहली बार जारी होने पर SGB सब्सक्राइब किया था और मैच्योरिटी तक पूरी तरह होल्ड किया, तो रिडेम्पशन पर होने वाला कैपिटल गेन पूरी तरह टैक्स-फ्री रहेगा।
लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG): अगर SGB को 12 महीने से ज्यादा समय तक रखा गया है, तो बिक्री या ट्रांसफर पर होने वाला मुनाफा 12.5% की फ्लैट दर से टैक्स के दायरे में आएगा।
शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG): अगर SGB को 12 महीने या उससे कम समय तक रखा गया है, तो मुनाफे पर आपकी नॉर्मल इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगेगा।
सेकेंडरी मार्केट से खरीदे गए SGB: अगर आपने SGB को सेकेंडरी मार्केट से खरीदा है, तो मैच्योरिटी पर रिडेम्पशन वाले कैपिटल गेन पर छूट नहीं मिलेगी। इस पर भी टैक्स लगेगा।
ब्याज आय (Interest): SGB पर मिलने वाला ब्याज आपकी इनकम टैक्स स्लैब रेट के अनुसार टैक्सेबल होगा।