SIP vs RD: बच्चों की पढ़ाई से लेकर घर खरीदने तक, आपकी सेविंग के लिए कौन-सी स्कीम है बेहतर?

SIP vs RD: SIP और RD, दोनों ही पॉपुलर सेविंग स्कीमें हैं। SIP जहां बाजार से जुड़ी होती है और लंबे समय में बेहतर रिटर्न दे सकती है, वहीं RD एक सुरक्षित विकल्प है जिसमें तय ब्याज मिलता है। जानिए इन दोनों में से आपके लिए कौन है बेहतर।

Priya Shandilya
अपडेटेड22 Aug 2025, 04:55 PM IST
SIP या RD में से किसे चुनने में है समझदारी? (प्रतीकात्मक तस्वीर)
SIP या RD में से किसे चुनने में है समझदारी? (प्रतीकात्मक तस्वीर)(AI)

SIP vs RD: अगर आप अपनी कमाई का एक हिस्सा बचत खाते में डालना चाहते हैं तो सही जगह पैसा लगाना जरूरी है। ऐसे में सवाल आता है कि या तो बैंक में रेकरिंग डिपॉजिट (RD) खुलवाएं या सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) शुरू करें। दोनों ही बचत करने की आदत में अनुशासन लाते हैं, लेकिन इनकी चाल एकदम अलग है। चलिए, आसान भाषा में समझते हैं कि SIP और RD में कौन-सी स्कीम किसके लिए सही बैठती है।

SIP क्या होता है?

सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP), यह म्यूचुअल फंड में निवेश करने का एक तरीका है, जिसमें आप हर महीने एक तय राशि डालते हैं। इसकी शुरुआत 500 से भी हो सकती है। SIP पूरी तरह मार्केट से जुड़ा होता है, इसलिए इसका रिटर्न समय के साथ ऊपर-नीचे हो सकता है। लेकिन अगर आप लंबे समय के लिए निवेश करते हैं, तो कंपाउंडिंग और म्यूचुअल फंड्स की ग्रोथ की वजह से अच्छा रिटर्न मिल सकता है।

SIP का एक बड़ा फायदा यह है कि यह डायवर्सिफिकेशन (विभिन्न कंपनियों में निवेश) की सुविधा देता है, जिससे रिस्क कम हो जाता है। यह उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प है जो थोड़ा रिस्क लेने को तैयार हैं और समय के साथ अपना पैसा बढ़ाना चाहते हैं।

RD क्या होता है?

रेकरिंग डिपॉजिट यानी RD एक बैंकिंग प्रोडक्ट है, जिसमें हर महीने आप एक तय राशि जमा करते हैं। इसे बैंक या पोस्ट ऑफिस में खुलवाया जा सकता है। RD पर मिलने वाला ब्याज फिक्स होता है, जो आमतौर पर 6% से 8% के बीच रहता है। RD में मैच्योरिटी अमाउंट पहले से पता होता है, इसलिए यह सुरक्षित और अनुमानित रिटर्न देने वाला विकल्प है।

हालांकि, RD से मिलने वाला ब्याज टैक्सेबल होता है और अगर सालाना ब्याज 10,000 से ज्यादा हो जाए तो TDS कटता है। लेकिन जिन निवेशकों को जोखिम से बचना है, उनके लिए RD एक अच्छा विकल्प है।

SIP के फायदे

SIP लंबे समय में एक बड़ा फंड बनाने में मदद करता है। हर महीने छोटा अमाउंट डालने से शुरुआत की जा सकती है, और कंपाउंडिंग के जरिए यह अमाउंट बड़ा हो सकता है। टैक्स सेविंग के लिए भी SIP बढ़िया विकल्प है, खासकर ELSS फंड्स में निवेश करने से टैक्स छूट मिलती है। साथ ही, यह निवेश का फ्लेक्सिबल तरीका है, कभी भी बंद या बढ़ाया जा सकता है।

RD के फायदे

RD का सबसे बड़ा फायदा है फिक्स और रिस्क-फ्री रिटर्न। इसमें मैच्योरिटी पर आपको तय अमाउंट मिलता है। सीनियर सिटीजन्स को इसमें ज्यादा ब्याज मिलता है, जिससे यह उम्रदराज निवेशकों के लिए खासा फायदेमंद बनता है। आरडी खुलवाने की प्रक्रिया भी बहुत आसान होती है। एक बार स्टैंडिंग इंस्ट्रक्शन सेट कर देने के बाद पैसा अपने आप हर महीने कटता रहता है। शॉर्ट टर्म फाइनेंशियल गोल्स के लिए यह एक शानदार टूल है।

SIP या RD: कौन सी स्कीम है बेहतर?

अब सवाल यह है कि SIP बेहतर है या RD? तो इसका जवाब आपके फाइनेंशियल गोल्स पर निर्भर करता है। अगर आप लंबी अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं, जैसे बच्चों की पढ़ाई, रिटायरमेंट या घर खरीदने की प्लानिंग, तो SIP ज्यादा बेहतर साबित हो सकता है। म्यूचुअल फंड की ग्रोथ और कंपाउंडिंग का फायदा लंबे समय में मिलता है।

वहीं, अगर आपका गोल शॉर्ट टर्म का है, जैसे 2-3 साल में बाइक खरीदना, ट्रिप पर जाना या घर की डाउन पेमेंट करनी है, तो RD आपके लिए बेहतर है।

सही निवेश का चुनाव कैसे करें?

सही निवेश विकल्प चुनने के लिए कुछ आसान बातें ध्यान में रखें। सबसे पहले यह तय करें कि आप किस उद्देश्य के लिए पैसा बचा रहे हैं। फिर सोचें कि आप कितना रिस्क ले सकते हैं। निवेश की अवधि भी एक अहम फैक्टर है, शॉर्ट टर्म के लिए RD और लॉन्ग टर्म के लिए SIP फायदेमंद है। इसके साथ ही, टैक्स और रिटर्न, दोनों पर नजर रखना जरूरी है।

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