Property Sell: कैलेंडर वर्ष 2026 की पहली तिमाही के दौरान देश के आवासीय रियल एस्टेट बाजार में नरमी के संकेत दिख रहे हैं। इस दौरान बिक्री में पिछले साल के मुकाबले 4 फीसदी की गिरावट आई है। इसी अवधि में ऑफिस लीजिंग तिमाही आधार पर अधिकतम स्तर पर पहुंच गई। नाइट फ्रैंक इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार तिमाही के दौरान आवासीय बिक्री 84,827 रही, जो साल 2025 की पहली तिमाही की 88,361 आवासीय बिक्री से कम है। वहीं ऑफिस लीजिंग पिछले वर्ष की तुलना में 6 फीसदी बढ़कर 2.99 करोड़ वर्ग फुट हो गई।
नाइट फ्रैंक इंडिया की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल जनवरी-मार्च तिमाही में 50 लाख रुपये से कम के और 50 लाख से एक करोड़ रुपये के बीच के मकानों की बिक्री में 23 फीसदी और 12 फीसदी की तेज गिरावट आई है। इस सेगमेंट में खरीदारों को प्रोत्साहन दिये जाने की जरूरत बता गई है। बिक्री में गिरावट के बावजूद संपत्तियों का भाव तेज है। गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा के बाजार में कीमतों में बंपर इजाफा हुआ है।
इन शहरों में घरों की बिक्री में गिरावट
मुंबई में सालाना आधार पर 7 फीसदी, दिल्ली-एनसीआर में 11 फीसदी और पुणे में 11 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि पहली तिमाही में सामान्य मांग में इस गिरावट के बावजूद मांग का आधार मजबूत बना हुआ है। मुंबई 23,185 यूनिट बिक्री के साथ सबसे बड़ा बाजार बना रहा। इसके बाद बेंगलुरु (13,092 यूनिट) और एनसीआर (12,734 यूनिट) का स्थान रहा।
रिपोर्ट के अनुसार कुल मिलाकर गिरावट के माहौल में महंगे और लक्जरी बाजारों की मांग का रुझान मजबूत है। एक करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाले घरों की मांग में 11 फीसदी की वृद्धि, एक से दो करोड़ रुपये के वर्ग के मकानों में 10 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस सेगमेंट कुल बिक्री का 29 फीसदी रहा।
रिहायशी घरों की बिक्री क्यों रही कमजोर
नाइट फ्रैंक इंडिया के इंटरनेशनल पार्टनर, चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर शिशिर बैजल का कहना है कि रिहायशी मांग में आई इस नरमी पर बारीकी से ध्यान देने की जरूरत है। ये इसलिए भी जरूरी है कि ये कमी कई सालों तक लगातार बनी रही तेजी के बाद देखने को मिली है। उन्होंने कहा कि हालांकि इस दौर की एक वजह तेज ग्रोथ के बाद होने वाला स्वाभाविक ठहराव हो सकता है, लेकिन कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और बिक्री की मात्रा में आई कमी यह संकेत देती है कि लोगों की खरीदने की क्षमता और बाजार में प्रॉपर्टी खपने की गति पर दबाव बढ़ रहा है। इसके साथ ही, बैजल ने कहा कि भू-राजनीतिक हालात में आई अस्थिरता के कारण भी रिहायशी मांग में लोगों की दिलचस्पी कम हुई है।
महंगे मकान भी बिके
बाजार की गतिविधियों का झुकाव महंगे मकानों की ओर रहा, जबकि 1 करोड़ रुपये से कम वाली श्रेणी की बिक्री में गिरावट आई। 1 करोड़ से अधिक वाले मकानों के दाम 2026 की पहली तिमाही में पिछले साल के मुकाबले 11 फीसदी बढ़े, जबकि 50 लाख से कम और 50 लाख से 1 करोड़ रुपये वाली श्रेणी में क्रमशः 23 फीसदी और 12 फीसदी की गिरावट आई।
(वार्ता की खबर से इनपुट के साथ)