Pre-Approved Personal Loan: आजकल के इस डिजिटल युग में मोबाइल फोन पर हमेशा कोई न कोई कॉल या मैसेज आते रहते हैं। कभी-कभी लोग इन मैसेजों से तंग आ जाते हैं। बहुत से लोग इनसे छुटकारा भी पाना चाहते हैं। अब तो लोन लेने के लिए भी मैसेज आते रहते हैं। इन मैसेज में लिखा होता है कि आपका पर्सनल लोन अप्रूव्ड हो गया है। यानी पर्सनल लोन लेने के पहले ही अप्रूव्ड हो गया है। सुनने में ऐसे ऑफर भले ही अच्छे लगते हों, लेकिन ये घाटे का सौदा भी साबित हो सकते हैं।
इस आसान दिखने वाले विकल्प के पीछे कई बार जोखिम छिपा होता है। कम EMI वाले लोन में छिपा ब्याज, प्रोसेसिंग फीस और कठोर नियम भविष्य में परेशानी का कारण बन सकते हैं। ऐसे में किसी भी ऑफर पर तुरंत हां कहने से पहले 5 महत्वपूर्ण बातों को समझना जरूरी है।
जानिए प्री-अप्रूव्ड पर्सनल लोन क्या होता है
सबसे पहले बात कर लेते हैं कि प्री-अप्रूव्ड पर्सनल लोन क्या होता है? प्री-अप्रूव्ड पर्सनल लोन वह लोन होता है, जो बैंक या फाइनेंस कंपनी आपकी प्रोफाइल देखकर पहले से ही मंजूरी दे देती है। इसका मतलब यह नहीं है कि लोन अपने आप मिल जाएगा बल्कि आपको शर्तें स्वीकार करनी होती हैं। आमतौर पर यह ऑफर अच्छे क्रेडिट स्कोर और पुराने ग्राहकों को दिया जाता है।
इन 5 बातों को ध्यान रखें
1. ब्याज दर और उसके तरीके को समझें
लोग अक्सर सिर्फ ब्याज दर देखकर लोन लेने का निर्णय कर लेते हैं। लेकिन यह ध्यान रखें कि दर फिक्स है या फ्लोटिंग। शुरुआती दर कम लग सकती है, लेकिन समय के साथ बढ़ सकती है। आपकी वास्तविक दर आपकी आय, नौकरी, क्रेडिट स्कोर और पिछले लोन रिकॉर्ड पर निर्भर करती है। इसलिए हमेशा लिखित में वास्तविक दर की पुष्टि करें।
2. खाते में कितनी रकम आएगी, यह जानना जरूरी
अक्सर लोन अप्रूव होने के बाद प्रोसेसिंग फीस, बीमा शुल्क और अन्य चार्ज पहले ही काट लिए जाते हैं। नतीजा यह होता है कि खाते में आने वाली रकम आपकी उम्मीद से कम होती है। दो लोन ऑफर की EMI एक जैसी लग सकती है, लेकिन कटौतियों के कारण असल रकम में बड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए यह साफ़ पूछना ज़रूरी है कि सभी चार्ज काटने के बाद आपके खाते में कितनी नेट राशि आएगी।
3. प्रीपेमेंट और फोरक्लोजर नियम जरूर चेक करें
बहुत कम लोग पूरे टेन्योर तक पर्सनल लोन चलाते हैं। बोनस मिलने, सैलरी बढ़ने या सस्ता लोन मिलने पर लोग लोन जल्दी बंद करना चाहते हैं। ऐसे में प्रीपेमेंट और फोरक्लोजर चार्ज अहम हो जाते हैं। यह जांचें कि कहीं लॉक-इन पीरियड तो नहीं है, पार्ट पेमेंट की अनुमति है या नहीं और जल्दी लोन बंद करने पर कितना शुल्क लगेगा। कई बार थोड़ा अधिक ब्याज वाला लेकिन लचीले नियमों वाला लोन लंबे समय में सस्ता पड़ता है।
4. EMI कम है तो टेन्योर और कुल ब्याज देखें
कम EMI आकर्षक लगती है, लेकिन लंबा टेन्योर अधिक ब्याज का कारण बन सकता है। इसलिए सिर्फ EMI पर ध्यान न दें, कुल चुकाने वाली राशि और EMI की तारीख बदलने या टेन्योर घटाने की संभावना जरूर जांचें।
5. लेंडर का व्यवहार और पेनल्टी देखें
कभी-कभी तकनीकी या अन्य कारणों से EMI मिस हो जाती है। कुछ लेंडर तुरंत भारी पेनल्टी चार्ज लगाते हैं और क्रेडिट स्कोर को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए लेंडर की विश्वसनीयता और कस्टमर सर्विस का मूल्यांकन करना जरूरी है।
समझदारी से फैसला लें, जल्दबाजी न करें
कुल मिलाकर प्री-अप्रूव्ड पर्सनल लोन सुविधा जरूर देता है, लेकिन आंख मूंदकर भरोसा करना नुकसानदेह हो सकता है। ब्याज दर, फीस, नियमों और लेंडर के व्यवहार को अच्छे से समझकर ही फैसला लेना चाहिए। थोड़ी तुलना और समय देने से यह तय हो सकता है कि जो लोन आसान लग रहा है, वही वास्तव में सबसे सस्ता और सुरक्षित साबित हो सकता है।