Retirement Mutual Funds: रिटायरमेंट प्लानिंग भी वित्तीय योजनाओं में से एक है। जब भी बच्चों की पढ़ाई, मकन की किस्त, घऱ खर्च चलाते हैं। उसी समय आपको एक छोटा हिस्सा रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी के लिए अलग रखना चाहिए। रिटायरमेंट की प्लानिंग करते समय ज्यादातर लोग पेंशन, एफडी का ब्याज या रेंट की आय पर भरोसा करते हैं। लेकिन आप म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं। इससे आप मोटा फंड तैयार कर सकते हैं।
कंज़र्वेटिव निवेशक फिक्स्ड डिपॉज़िट और PPF में ज्यादा निवेश करते हैं, जबकि ज्यादा रिस्क लेने वाले निवेशक NPS और म्यूचुअल फंड में निवेश करके इक्विटी में ज्यादा भरोसा करते हैं। हालांकि इनमें से हर इन्वेस्टमेंट ऑप्शन अपने आप में अनोखा है। ऐसे ही हम आपको 'रिटायरमेंट म्यूचुअल फंड' के बारे में बता रहे हैं। यह ज्यादा पॉपुलर तो नहीं है, लेकिन निवेश के लिहाज से बेहतर माना जा रहा है।
जानिए रिटायरमेंट म्यूचुअल फंड क्या हैं?
ये म्यूचुअल फंड सॉल्यूशन-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड कैटेगरी में आते हैं। AMFI डेटा के मुताबिक, कुल मिलाकर इस कैटेगरी में 29 स्कीमें हैं, जिनका कुल AUM 30 नवंबर 2025 तक ₹32,835 करोड़ है। रिटायरमेंट फंड्स के साथ रजिस्टर्ड कुल फोलियो की संख्या 30.37 लाख है। कुछ रिटायरमेंट म्यूचुअल फंड में UTI रिटायरमेंट फंड, ICICI प्रूडेंशियल रिटायरमेंट फंड (इक्विटी) और एक्सिस रिटायरमेंट फंड (डायनेमिक) शामिल हैं। रिटायरमेंट फंड में पांच साल का लॉक-इन पीरियड होता है।
रिटायरमेंट म्यूचुअल फंड में निवेश के फायदे
डाइवर्सिफिकेशन
आमतौर पर ज्यादातर रिटेल निवेशक अपने रिटायरमेंट के लिए पैसे बचाने के लिए कई फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करते हैं। इनमें PPF, FD, ULIP और डेट इंस्ट्रूमेंट्स शामिल हैं। एक ऐसे म्यूचुअल फंड में निवेश करना जो आपको खास तौर पर रिटायरमेंट के लिए पैसे बचाने की सुविधा देता है, यह डाइवर्सिफिकेशन की दिशा में एक कदम है।
फ्लेक्सिबिलिटी
PPF और NPS जैसे दूसरे रिटायरमेंट प्लान में पैसे निकालने में कई बार थोड़ा कठिनाई होती है। इसकी वजह ये है कि इसके नियमों में ढिलाई बेहद कम होती है। वहीं रिटायरमेंट म्यूचुअल फंड ज्यादा फ्लेक्सिबल होते हैं। PPF में 15 साल का लॉक-इन पीरियड होता है। NPS में पैसे निकालने के सख्त नियम हैं, जिसमें तीन साल बाद ही कुछ पैसे निकालने की इजाज़त मिलती है। इसके अलावा, ज्यादातर रिटायरमेंट फंड कई तरह के ऑप्शन देते हैं, जिनमें कंज़र्वेटिव, मॉडरेट और एग्रेसिव शामिल हैं। उदाहरण के लिए, आदित्य बिड़ला सन लाइफ रिटायरमेंट फंड इन ऑप्शन में उपलब्ध है: 30s प्लान, 40s प्लान, 50s प्लान और 50s प्लस प्लान।