
Retirement Planning Tips: हर व्यक्ति अपने जीवन में समय पर रिटायरेंट प्लानिंग कर ले तो बुढ़ापा बिना तनाव के आराम से गुजर सकता है। अपने फाइनेंशियल सिक्योरिटी के लिए हर व्यक्ति को रिटायरमेंट प्लानिंग जरूर करना चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि वर्किंग लाइफ में आते ही सही निवेश की रणनीति बना ली जाए।, ताकि रिटायर होने तक बड़ा फंड तैयार हो सके। आज के दौर में किसी भी व्यक्ति के लिए निवेश और बचत के कई सारे साधन उपलब्ध हैं, जिससे बेहतर रिटायरमेंट प्लानिंग की जा सकती है। NPS, EPF और म्यूचुअल फंड जैसे कई उपाय है। आइये जानते हैं कहां निवेश करना होगा बेहतर।
EPF यानी कर्मचारी भविष्य निधि एक अनिवार्य बचत योजना है जो 20 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले संस्थानों में लागू होती है। इसमें कर्मचारी और नियोक्ता दोनों मिलकर कर्मचारी की मूल सैलरी और डीए का 12 फीसदी योगदान हर महीने करते हैं। इस पर सरकार हर साल ब्याज दर तय करती है जो वर्तमान में 8.25% है। EPF सुरक्षित होता है और टैक्स के लिहाज से भी फायदेमंद है क्योंकि इसमें योगदान, ब्याज और निकासी तीनों टैक्स फ्री होती हैं।
हालांकि EPF बहुत कम लिक्विड होता है और पैसा सिर्फ नौकरी छूटने, घर खरीदने या मेडिकल इमरजेंसी जैसी स्थिति में ही निकाला जा सकता है। यह योजना कम जोखिम वाले नौकरीपेशा लोगों के लिए उपयुक्त है जो स्थिर और सुरक्षित रिटर्न चाहते हैं। EPF में निवेश करने पर धारा 80c के तहत 1.5 लाख रुपये तक टैक्स छूट मिलती है।
NPS यानी नेशनल पेंशन सिस्टम सरकार द्वारा संचालित एक स्वैच्छिक योजना है। इस योजना में कोई भी 18 से 70 साल का भारतीय नागरिक निवेश कर सकता है। यहां तक कि NRI भी इसमें निवेश कर सकते हैं। इसमें निवेशक अपने हिसाब से इक्विटी, कॉर्पोरेट बांड और सरकारी सिक्योरिटी का मिश्रण चुन सकता है। यह स्कीम 8% से 10% का वार्षिक रिटर्न देती रही है। हालांकि NPS में पैसा 60 साल की उम्र तक नहीं निकाला जा सकता है, लेकिन टैक्स छूट काफी आकर्षक है। इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C के तहत ₹1.5 लाख और 80CCD(1B) के तहत अतिरिक्त ₹50,000 की छूट मिलती है। नेशनल पेंशन स्कीम के पोर्टल पर निवेशकों को हर अवधि पर निवेश बढ़ाने की भी सलाह दी जाती है जिससे पेंशन इनकम में बढ़ोतरी हो सके।
म्यूचुअल फंड में निवेशक खुद तय कर सकते हैं कि पैसा इक्विटी फंड में लगाना है या डेट में या हाइब्रिड फंड में। अगर आप लॉन्ग टर्म के लिए इक्विटी फंड चुनते हैं तो 10–15% सालाना तक का रिटर्न मिल सकता है। इक्विटी फंड में हाई ग्रोथ को टारगेट किया जाता है। हाइब्रिड फंड में ग्रोथ और स्थिरता को संतुलन बनाने में मदद करते हैं। वहीं डेट फंड में सुरक्षा पर ध्यान दिया जाता है। इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम्स (ELSS) में 1.5 लाख रुपये तक के निवेश पर सेक्शन 80C के टैक्स में छूट मिल सकती है। हालांकि जानकारों का कहना है कि रिडेम्पशन पर टैक्स लग सकता है। म्यूचुअल फंड में आप SIP के जरिए भी निवेश कर सकते हैं।
अब अगर आप म्यूचुअल फंड के SIP, NPS और EPF की तुलना करें तो एक अनुमान के मुताबिक, SIP से 10% से 15% तक का बाजार आधारित रिटर्न मिल सकता है लेकिन इसमें जोखिम भी अधिक होता है। NPS में 8% से 10% तक संतुलित रिटर्न मिल सकता है और जोखिम मध्यम होता है, जबकि EPF में 8.25% का स्थिर रिटर्न मिलता है और यह सबसे सुरक्षित होता है। लिक्विडिटी के मामले में SIP सबसे आगे है, NPS सीमित है और EPF सबसे कम है। टैक्स लाभ के लिहाज से EPF और NPS सबसे बेहतर हैं जबकि SIP में केवल ELSS फंड पर ही छूट मिलती है।
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