
Retirement Planning: रिटायरमेंट प्लानिंग जितनी जल्दी शुरू की जाए, उतना ही बड़ा फंड तैयार किया जा सकता है। यही वजह है कि वित्तीय सलाहकार 30 वर्ष की उम्र के आसपास निवेश शुरू करने की सलाह देते हैं। इस समय सबसे बड़ा सवाल होता है कि नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) बेहतर है या पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF)। दोनों ही सरकारी योजनाएं हैं, लेकिन दोनों का उद्देश्य और निवेश का ढांचा अलग है।
अगर आपका लक्ष्य नियमित पेंशन के साथ बड़ा रिटायरमेंट फंड बनाना है, तो NPS बेहतर साबित हो सकता है। वहीं, यदि आप बिना बाजार जोखिम के सुरक्षित और टैक्स-फ्री निवेश चाहते हैं, तो PPF मजबूत विकल्प माना जाता है।
नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) एक मार्केट-लिंक्ड रिटायरमेंट स्कीम है, जिसे पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) नियंत्रित करती है। इसमें निवेश का पैसा इक्विटी, सरकारी बॉन्ड और कॉर्पोरेट बॉन्ड में लगाया जाता है।
पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) सरकार की स्मॉल सेविंग स्कीम है। इसमें मिलने वाला ब्याज सरकार तय करती है और यह पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है।
यदि कोई निवेशक 30 वर्ष की उम्र में हर महीने नियमित निवेश शुरू करता है, तो उसके पास रिटायरमेंट तक लगभग 30 वर्ष या उससे अधिक का समय होता है। इतने लंबे निवेश क्षितिज में NPS बाजार आधारित रिटर्न के कारण PPF की तुलना में बड़ा रिटायरमेंट कॉर्पस बनाने की क्षमता रखता है। इसके अलावा रिटायरमेंट के बाद नियमित पेंशन भी मिलती है।
दूसरी ओर, यदि निवेशक जोखिम नहीं लेना चाहता और निश्चित रिटर्न के साथ पूंजी सुरक्षित रखना चाहता है, तो PPF अधिक उपयुक्त विकल्प माना जाता है।
| आधार | NPS | PPF |
|---|---|---|
| निवेश का प्रकार | मार्केट-लिंक्ड | सरकार समर्थित |
| जोखिम | मध्यम | बहुत कम |
| रिटर्न | बाजार पर निर्भर | सरकार तय करती है |
| लॉक-इन | 60 वर्ष की आयु तक | 15 वर्ष |
| पेंशन | हां | नहीं |
| टैक्स लाभ | 80C + 80CCD(1B) | 80C |
एक्सपर्ट्स का मानना है कि केवल एक विकल्प चुनने के बजाय NPS और PPF दोनों में निवेश करना बेहतर रणनीति हो सकती है। NPS आपको लंबी अवधि में अधिक रिटर्न और पेंशन का लाभ दे सकता है, जबकि PPF आपके पोर्टफोलियो में स्थिरता और सुरक्षा जोड़ता है।
उदाहरण से समझिए: 30 साल की उम्र में हर महीने ₹5,000 निवेश करने पर क्या होगा?
मान लीजिए किसी व्यक्ति की उम्र 30 वर्ष है और वह रिटायरमेंट तक यानी 60 वर्ष की उम्र तक हर महीने ₹5,000 का निवेश करता है।
यदि निवेश पर औसतन 10% सालाना रिटर्न मिलता है, तो 30 वर्षों में कुल निवेश ₹18 लाख होगा। इस अवधि के अंत तक अनुमानित रिटायरमेंट कॉर्पस करीब ₹1.13 करोड़ तक पहुंच सकता है। मैच्योरिटी पर मौजूदा नियमों के अनुसार 60% राशि एकमुश्त (Lump Sum) निकाली जा सकती है, जबकि 40% राशि से एन्युटी (Annuity) खरीदनी होगी, जिससे रिटायरमेंट के बाद नियमित पेंशन मिलेगी।
यदि यही व्यक्ति हर महीने ₹5,000 यानी सालाना ₹60,000 PPF में जमा करता है और ब्याज दर 7.1% (वर्तमान दर, सरकार समय-समय पर बदल सकती है) बनी रहती है, तो 30 वर्षों में कुल निवेश ₹18 लाख होगा। अनुमानित मैच्योरिटी राशि करीब ₹61–62 लाख हो सकती है। इस पूरी राशि पर कोई टैक्स नहीं लगता और मैच्योरिटी पर पूरी रकम एकमुश्त मिल जाती है, लेकिन इसमें पेंशन की सुविधा नहीं होती।
अगर आपका लक्ष्य बड़ा रिटायरमेंट फंड और नियमित पेंशन बनाना है, तो NPS अधिक उपयुक्त माना जा सकता है। वहीं, यदि आप पूंजी की सुरक्षा, गारंटीड रिटर्न और टैक्स-फ्री मैच्योरिटी चाहते हैं, तो PPF बेहतर विकल्प है। वित्तीय योजनाकारों का मानना है कि 30 साल की उम्र में निवेश शुरू करने वाले लोग NPS और PPF दोनों का संतुलित उपयोग करें, ताकि उन्हें ग्रोथ के साथ सुरक्षा का भी लाभ मिल सके।
नोट: यह कैलकुलेशन सिर्फ उदाहरण के उद्देश्य से है। NPS का रिटर्न बाजार पर निर्भर करता है और PPF की ब्याज दर सरकार समय-समय पर बदलती रहती है। इसलिए वास्तविक रिटर्न अलग हो सकता है।
Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.
Oops! Looks like you have exceeded the limit to bookmark the image. Remove some to bookmark this image.