
Sebi New Rules 2026: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने म्यूचुअल फंड स्कीम्स के क्लासिफिकेशन और उनके रेशनलाइजेशन को लेकर एक नया सर्कुलर जारी किया है। इस बड़े नीतिगत बदलाव के तहत अब बाजार में रिटायरमेंट फंड्स और चिल्ड्रेन फंड्स जैसे फंड्स को बंद कर दिया गया है। इनकी जगह सेबी ने एक मॉडर्न और साइंटफिक इन्वेस्टमेंट प्लान पेश किया है। इसे लाइफ साइकिल फंड्स (Life Cycle Funds) कहा जा रहा है।
एडलवाइस म्यूचुअल फंड की MD और CEO राधिका गुप्ता ने सेबी के इस बड़े कदम पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। राधिका गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, यह बदलाव भारतीय एसेट मैनेजमेंट के लिए डिफाइनिंग शिफ्ट है। उन्होंने कहा, SEBI की किए गए ये बदलाव ऐसा स्ट्रक्चरल अपग्रेड है जो निवेश के दायरे को बढ़ाता है। पिछले कुछ सालों में पैसिव डेट रेगुलेशन और स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड्स (SIFs) जैसे सुधारों ने मार्केट को गहराई दी है, लेकिन लाइफ साइकिल फंड्स आने से गोल-बेस्ड इन्वेस्टमेंट के लिए एक मील का पत्थर साबित होने वाला है। यह निवेशकों को बाजार के उतार-चढ़ाव की चिंता किए बिना अपने भविष्य की योजना बनाने की आजादी देता है।
SEBI के सर्कुलर के मुताबिक, लाइफ साइकिल फंड्स ओपन-एंडेड स्कीम्स होंगी, जिनकी मैच्योरिटी पीरिएड पहले से तय होगा। इन फंड्स की सबसे बड़ी खासियत इनका ग्लाइड पाथ एप्रोच है। यानी यह फंड शुरूआती सालों में इक्विटी जैसे हाई-रिटर्न वाले एसेट्स में ज्यादा निवेश करेगा और जैसे-जैसे मैच्योरिटी या गोल की मैच्योरिटी नजदीक आती है, यह पोर्टफोलियो को अपने आप सेफ एसेट्स जैसे Debt की तरफ शिफ्ट कर देता है। यह पूरी प्रक्रिया ऑटोमेटेड होगी, जिससे निवेशक को बार-बार पोर्टफोलियो बदलने या बाजार की टाइमिंग को समझने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
शेयर बाजार नियामक ने फंड कैटेगरीज को आसान बनाने के लिए रिटायरमेंट और चिल्ट्रेन फंड्स को लेकर कड़ा कदम उठाया है। इन्हें पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है। रेगुलेटर ने साफ निर्देश दिए हैं कि इस कैटेगरी की मौजूदा स्कीम्स में सभी नए सब्सक्रिप्शन तत्काल प्रभाव से रोक दिए जाएं। इन स्कीम्स को अब समान प्रकृति की अन्य स्कीम्स के साथ मर्ज कर दिया जाएगा। इस बदलाव का मकसद निवेशकों के बीच किसी भी तरह के भ्रम को खत्म करना है। इसके साथ ही उन्हें एक ऐसा प्रोडक्ट देना है, जो नाम के आधार पर काम और स्ट्रक्चर से गोल्स को पूरा करने में सक्षम हो।
राधिका गुप्ता ने इस बात पर जोर दिया है कि लाइफ साइकिल फंड्स का सबसे व्यावहारिक पहलू इसकी सादगी है। अक्सर देखा गया है कि निवेशक लॉन्ग टर्म गोल्स के लिए इन्वेस्टमेंट तो शुरू करते हैं, लेकिन सही समय पर रिस्क कम न कर पाने के कारण फाइनल स्टेज में मार्केट की गिरावट का शिकार हो जाते हैं। लाइफ साइकिल फंड्स इस समस्या का समाधान करते हैं। इनमें एसेट एलोकेशन निवेशक के टाइम होराइजन यानी समय सीमा से जुड़ा होता है। ये फंड म्यूचुअल फंड स्ट्रक्चर के भीतर काम करते हैं, इसलिए ये निवेशकों के लिए टैक्स के लिहाज से भी काफी किफायती और साफ होते हैं।
सेबी के नए सर्कुलर के तहत फंड हाउस इन लाइफ साइकिल फंड्स को 5 साल के मल्टीपल में लॉन्च कर सकेंगे। इनकी न्यूनतम अवधि 5 साल और अधिकतम 30 साल तक हो सकती है। यह विविधता निवेशकों को अपनी जरूरत के हिसाब से फंड चुनने की सुविधा देता है। उदाहरण: अगर किसी को 15 साल बाद अपने हायर एजुकेशन के लिए फंड चाहिए, तो वह 15 साल की मैच्योरिटी वाला लाइफ साइकिल फंड चुन सकता है। इसमें इक्विटी, डेट, इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (InvITs),गोल्ड और सिल्वर ETF जैसे कई एसेट क्लास मिक्स होंगे। यह समय के साथ रिस्क को कम करते जाएंगे।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल जानकारी के लिए है। ऊपर दिए गए विचार और सिफारिशें, व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों के हैं, न कि मिंट के। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञों से जांच करें।
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