
SIFs vs PMS AIFs: सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने फरवरी 2025 में स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड्स (SIFs) के लिए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क जारी किया। इन फंड्स का मकसद निवेशकों के लिए एक नया निवेश विकल्प देना है जो 10 लाख रुपये से निवेश शुरू कर सकते हैं। यह कदम खासकर उन निवेशकों को ध्यान में रखकर उठाया गया है जो अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIFs) और पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) की ऊंची न्यूनतम निवेश सीमा को पूरा नहीं कर पाते हैं, लेकिन म्यूचुअल फंड से ज्यादा जोखिम लेने को तैयार हैं।
SIFs पारंपरिक म्यूचुअल फंड्स, PMS और AIFs के बीच की दूरी को खत्म करते हैं।म्यूचुअल फंड मुख्य रूप से रिटेल इन्वेस्टर्स को सर्विस देते हैं, जहां 500 रुपये तक का छोटा निवेश भी किया जा सकता है। हालांकि, कई हाई नेट वर्थ वाले इन्वेस्टर्स (HNIs) भी इसमें निवेश करते हैं। PMS मुख्य रूप से HNIs के लिए होते हैं, क्योंकि इनमें निवेश की न्यूनतम सीमा 50 लाख रुपये है। इसी तरह, AIFs के लिए यह सीमा 1 करोड़ रुपये है।
SIFs इस अंतर को भरते हैं क्योंकि ये 10 लाख रुपये से निवेश शुरू करने की अनुमति देते हैं। यह उन निवेशकों के लिए एक बेहतरीन विकल्प है जो 10 लाख रुपये का निवेश कर सकते हैं और ज्यादा रिटर्न के लिए हाई रिस्क उठाने को तैयार हैं।
सेबी ने एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) को SIFs के लिए एक अलग ब्रांड नाम और लोगो इस्तेमाल करने को कहा है, ताकि निवेशक इसे म्यूचुअल फंड्स न समझ बैठें।
इसके लिए अब तक करीब 15 AMCs को नए ब्रांड नेम के लिए अप्रूवल मिल चुका है और चार AMCs ने अपने SIF प्रोडक्ट्स लॉन्च भी कर दिए हैं, जिनमें शामिल हैं...
SBI म्यूचुअल फंड: (मैग्नम SIF)
Edelweiss म्यूचुअल फंड: (अल्टिवा SIF)
Quant म्यूचुअल फंड: (qSIF)
ITI म्यूचुअल फंड: (डिविनिटी SIF)
SEBI ने SIFs के सात फंड प्रकारों को तीन बड़ी कैटेगरी में बांटा है - इक्विटी, डेट और हाइब्रिड।
इक्विटी लॉन्ग-शॉर्ट फंड: यह कम से कम 80% इक्विटी में निवेश करता है, साथ ही अनहेज्ड इक्विटी डेरिवेटिव्स के जरिए 25% तक शॉर्ट एक्सपोजर भी ले सकता है।
इक्विटी एक्स-टॉप 100 लॉन्ग-शॉर्ट फंड: यह मार्केट कैपिटलाइज़ेशन के हिसाब से टॉप 100 से बाहर की कंपनियों पर फोकस करता है। इसमें इन शेयरों में कम से कम 65% और नॉन-लार्ज-कैप इक्विटी में 25% तक शॉर्ट एक्सपोजर रखने की जरूरत होती है।
डेट लॉन्ग-शॉर्ट फंड: यह अलग-अलग समय अवधि के डेट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करता है, साथ ही एक्सचेंज-ट्रेडेड डेट डेरिवेटिव्स का उपयोग करके अनहेजेड शॉर्ट पोजीशन भी लेता है।
सेक्टोरल डेट लॉन्ग-शॉर्ट फंड: यह कम से कम दो सेक्टरों के डेट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करता है, जिसमें किसी एक सेक्टर में पोर्टफोलियो का 75% से ज्यादा निवेश नहीं किया जा सकता।
एक्टिव एसेट एलोकेटर लॉन्ग-शॉर्ट फंड: यह डायनेमिक मल्टी-एसेट एलोकेशन देता है।
हाइब्रिड लॉन्ग-शॉर्ट फंड: यह इक्विटी और डेट दोनों में कम से कम 25% का आवंटन बनाए रखता है।
दोनों हाइब्रिड स्ट्रैटेजी 25% तक शॉर्ट एक्सपोजर की इजाजत देती हैं।
नियामक ने फंड हाउसों को संरचना तय करने की छूट दी है। ये सभी रणनीतियां ओपन-एंडेड या इंटरवल फंड के रूप में तैयार की जा सकती हैं। म्यूचुअल फंड के विपरीत, SIFs में अगर आपका फंड इंटरवल स्कीम के तौर पर स्ट्रक्चर्ड है, तो आप केवल तय तारीख पर ही पैसे निकाल सकते हैं। उदाहरण के लिए मैग्नम हाइब्रिड लॉन्ग शॉर्ट फंड सप्ताह में दो बार, सोमवार और गुरुवार को रिडेम्पशन की अनुमति देता है।
म्यूचुअल फंड की तरह SIFs भी सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIPs), सिस्टेमैटिक विदड्रॉल प्लान (SWPs) और सिस्टेमैटिक ट्रांसफर प्लान (STPs) ऑफर करते हैं। हालांकि, इनमें से किसी भी विकल्प को शुरू करने से पहले 10 लाख रुपये के न्यूनतम निवेश की शर्त पूरी करनी होगी। इसके बाद आप 10,000 रुपये की न्यूनतम किस्त राशि का SIP, STP या SWP शुरू कर सकते हैं।
SIFs उन अनुभवी निवेशकों के लिए बनाए गए हैं जो AIFs और PMSes के लिए न्यूनतम निवेश की शर्त पूरी नहीं कर पाते हैं, लेकिन SIFs की लिमिट को पूरा करने के लिए तैयार हैं और ज्यादा रिटर्न के लिए हाई रिस्क उठा सकते हैं। ये फंड्स ज्यादा निवेशकों के लिए हेजिंग रणनीतियों और थीमैटिक अवसरों तक पहुंच खोलते हैं, जो पहले केवल संस्थागत, HNI और अल्ट्रा-HNI निवेशकों के लिए थे।
SIFs में ज्यादा जोखिम के साथ बेहतर लॉन्ग-टर्म रिटर्न देने की क्षमता है। इसलिए, ये ऐसे अनुभवी निवेशकों के लिए सही हैं जो बाजार चक्रों को समझते हैं और जिनके फाइनेंशियल गोल्स क्लियर हैं। चूंकि न्यूनतम निवेश 10 लाख रुपये है और अभी इनका कोई ट्रैक रिकॉर्ड नहीं है, इसलिए SIFs फिलहाल रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए सही नहीं हो सकते हैं।
Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के लिए है। निवेश करने से पहले किसी प्रमाणित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। मिंट हिंदी आपके किसी भी निर्णय और उसके परिणाम के लिए तनिक भी उत्तरदायी नहीं है।
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