STT Hike: 1 अप्रैल से महंगा होगी F&O ट्रेडिंग, जानें ऑप्शंस और फ्यूचर्स पर कितना बढ़ा टैक्स

Security Transaction Tax Hike: 1 अप्रैल 2026 से शेयर बाजार के निवेशकों को बड़ा झटका लगने वाला है। दरअसल, F&O सेगमेंट के लिए सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोतरी लागू हो रही है।  

Shivam Shukla
अपडेटेड31 Mar 2026, 07:53 AM IST
STT Hike: 1 अप्रैल से महंगा होगा F&O ट्रेडिंग, जानें ऑप्शंस और फ्यूचर्स पर कितना बढ़ा टैक्स
STT Hike: 1 अप्रैल से महंगा होगा F&O ट्रेडिंग, जानें ऑप्शंस और फ्यूचर्स पर कितना बढ़ा टैक्स

Security Transaction Tax Hike: 1 अप्रैल 2026 से नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत हो रही है। इसके साथ ही शेयर बाजार से जुड़ा एक जरूरी नियम भी बदल जाएगा। नए फाइनेंशियल ईयर से फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) सेगमेंट में दांव लगाना पहले के मुकाबले महंगा हो जाएगा। दरअसल, सरकार ने सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोतरी का फैसला किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 के दौरान इसका ऐलान किया था। सरकार के इस कदम का सीधा असर डेरिवेटिव्स मार्केट में ट्रेडिंग करने वाले लोगों को होगा। सरकार ने कहा कि यह फैसला रेवेन्यू जुटाने के लिए नहीं, बल्कि उन निवेशकों को बचाने के लिए लिया गया है जो बिना पूरी जानकारी के सट्टेबाजी में अपनी कमाई गंवा देते हैं।

क्यों बढ़ाया गया SST?

अगर आंकड़े देखें, तो शेयर बाजार के F&O सेगमेंट में हाथ आजमाने वाले 90 प्रतिशत से ज्यादा लोगों को नुकसान का सामना करना पड़ता है। इसी भारी वित्तीय जोखिम को कम करने के लिए सरकार ने टैक्स में बढ़ोतरी की है। सरकार का मानना है कि जब ट्रेडिंग की लागत बढ़ेगी, तो अनावश्यक सट्टेबाजी पर लगाम लगेगी। इस कदम से बाजार में केवल वही लोग टिकेंगे जो सोच-समझकर और रणनीति के साथ निवेश करते हैं। यह एक तरह का सुरक्षा कवच है, जिसे छोटे निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए तैयार किया गया है।

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अब निवेशकों को कितना देना होगा टैक्स?

नए नियमों के मुताबिक, फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स पर लगने वाला सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) अब 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया है। वहीं,ऑप्शंस ट्रेडिंग में भी भारी बदलाव किए गए हैं। ऑप्शंस प्रीमियम पर टैक्स 0.1% से बढ़कर 0.15% हो जाएगा, जबकि ऑप्शंस एक्सरसाइज करने पर इसे 0.125% से बढ़ाकर 0.15% कर दिया गया है। हालांकि, राहत की बात है कि इस टैक्स बढ़ोतरी का असर इक्विटी डिलीवरी और इंट्राडे ट्रेडिंग पर नहीं पड़ेगा। यह पूरी तरह से डेरिवेटिव मार्केट को टारगेट करके बनाया गया कानून है।

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मार्केट वॉल्यूम और मुनाफे पर होगा असर?

INVasset PMS के बिजनेस हेड हर्षल दासानी ने कहा, “यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से डेरिवेटिव सेगमेंट में केंद्रित है, जहां ट्रेडिंग वॉल्यूम हाई टर्नओवर और लीवरेज्ड स्ट्रैटजी के जरिए संचालित होते हैं। उन्होंने आगे कहा कि लागत में बढ़ोतरी और ब्रेक-ईवन पॉइंट में बदलाव के कारण, F&O वॉल्यूम, विशेष रूप से हाई-फ्रीक्वेंसी और इंट्राडे ट्रेड्स में शॉर्ट टर्म में गिरावट देखी जा सकती है। शुरुआती दौर में बाजार में नकदी (Liquidity) की कमी दिख सकती है और बिड-आस्क स्प्रेड भी बढ़ सकता है, जिससे सौदे थोड़े महंगे हो जाएंगे।”

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