एक व्यक्ति, जिसने अपनी रिहायशी संपत्ति के बदले 1.50 करोड़ रुपए का एजुकेशन लोन लिया, अब अपना घर बेचकर उस लोन को चुकाने की सोच रहा है। घर की अनुमानित बिक्री कीमत भी 1.50 करोड़ रुपए के आस-पास है। यह प्रॉपर्टी साल 2003 में 20 लाख रुपए में खरीदी गई थी। लेकिन इस पूरे प्लान में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या घर की बिक्री पर लगने वाला टैक्स इस योजना को मुश्किल बना देगा? सबसे पहले समझना जरूरी है कि शिक्षा लोन चुकाने पर कोई विशेष टैक्स छूट उपलब्ध नहीं है, खासकर तब जब यह चुकौती रिहायशी संपत्ति की बिक्री से हो रही हो। आयकर कानून के तहत कैपिटल गेन टैक्स से छूट केवल तभी मिलती है जब आप अपने लाभ को दूसरी आवासीय संपत्ति में निवेश करें या फिर 50 लाख रुपए तक के विशेष बॉन्ड्स में निवेश करें। लेकिन एजुकेशन लोन की भरपाई पर कोई राहत नहीं दी गई है।
एजुकेशन लोन की भरपाई पर राहत नहीं
हां, अगर यह एजुकेशन लोन भारत की किसी मान्यता प्राप्त बैंक या वित्तीय संस्था से लिया गया है और यह हायर एजुकेशन के लिए था, तो उसके ब्याज पर 8 आकलन वर्षों तक कटौती मिल सकती है, पर यह तभी संभव है जब व्यक्ति पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनता है। नई टैक्स व्यवस्था में यह लाभ समाप्त हो चुका है। अब आते हैं सबसे महत्वपूर्ण पहलू, कैपिटल गेन टैक्स पर। चूंकि यह संपत्ति 2003 में खरीदी गई थी, इसलिए यह लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) के दायरे में आएगी। करदाता के पास दो विकल्प हैं, पहला 12.5% टैक्स बिना इंडेक्सेशन और दूसरा 20% टैक्स इंडेक्सेशन के साथ।
टैक्स बोझ को नजरअंदाज करना महंगा
मौजूदा लागत मुद्रास्फीति सूचकांक (CII) को देखते हुए, इंडेक्सेशन वाला विकल्प सस्ता पड़ता है। 2003-04 में CII था 109, जबकि 2025-26 में 376। इन आंकड़ों के आधार पर कैपिटल गेन टैक्स करीब 16,20,183 रुपए बनता है, जो कि 12.5% वाली गणना 16,25,000 रुपए से कम है। इसके अलावा खरीदार को 1% TDS काटना होगा, जिसे विक्रेता अपने कुल टैक्स देयता से समायोजित कर सकता है। इन सब पहलुओं को देखते हुए साफ है कि घर बेचना समाधान हो सकता है, लेकिन टैक्स बोझ को नजरअंदाज करना महंगी भूल साबित हो सकती है।