नहीं रहे मल्टिबैगर स्टॉक्स के मास्टर सिद्धार्थ भैया , शेयर बाजार पर हटकर रखते थे नजरिया

13 साल में 3700% रिटर्न देने वाले दूरदर्शी निवेशक सिद्धार्थ भैया का 47 की उम्र में निधन हो गया है। बाजार को 'बुलबुला' बताने वाली उनकी बेबाक राय अब निवेश जगत के लिए एक विरासत बन गई है।

Naveen Kumar Pandey
अपडेटेड2 Jan 2026, 05:09 PM IST
दिग्गज निवेशक सिद्धार्थ भैया का आकस्मिक निधन।
दिग्गज निवेशक सिद्धार्थ भैया का आकस्मिक निधन।

भारतीय शेयर बाजार के सबसे सम्मानित और बेबाक चेहरों में से एक, सिद्धार्थ भैया अब हमारे बीच नहीं रहे। 'एक्विटास' (Aequitas) के प्रबंध निदेशक और मुख्य निवेश अधिकारी सिद्धार्थ का 31 दिसंबर को न्यूजीलैंड में निधन हो गया। वो छुट्टियां मनाने परिवार के साथ न्यूजीलैंड गए थे जहां दिल का दौरा पड़ने से आकस्मिक निधन हो गया। महज 47 वर्ष की आयु में उनका जाना दलाल स्ट्रीट के लिए एक ऐसा शून्य छोड़ गया है, जिसे भरना मुश्किल है। 25 वर्षों से अधिक के अनुभव वाले सिद्धार्थ एक चार्टर्ड अकाउंटेंट होने के साथ-साथ एक ऐसे 'स्टॉक पिकर' थे, जिन्होंने बाजार की भीड़ से अलग चलकर अपनी पहचान बनाई थी।

3700% का जादुई सफर, जब छोटे शेयरों को बनाया 'सोना'

सिद्धार्थ भैया की पहचान एक ऐसे निवेशक की थी जो भविष्य के 'मल्टीबैगर स्टॉक्स' को उनके शुरुआती दौर में ही पहचान लेते थे। साल 2012 में निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड की शानदार नौकरी छोड़ उन्होंने 'एक्विटास' की नींव रखी। पिछले 13 वर्षों में उनके 'इंडिया अपॉर्चुनिटीज पीएमएस फंड' ने लगभग 33% की वार्षिक दर (CAGR) से करीब 3700% का अविश्वसनीय रिटर्न दिया। आज उनकी कंपनी करीब 7,700 करोड़ रुपये की संपत्ति (AUM) का प्रबंधन कर रही है, जो उनके अनुशासन और गहरे अनुसंधान का जीता-जागता प्रमाण है।

View full Image
एक दूरदर्शी निवेशक सिद्धार्थ भैया का आकस्मिक निधन (AI Generated Graphic)
(Notebook LM)

बाजार को दी थी आखिरी चेतावनी- यह बुल मार्केट नहीं, महा-बुलबुला है

सिद्धार्थ ने निधन से कुछ ही समय पहले मुंबई में एक समिट के दौरान भारतीय शेयर बाजार को लेकर बेहद तीखी और डराने वाली चेतावनी दी थी। उन्होंने मौजूदा बाजार को 'हेल्दी बुल रन' मानने से इनकार करते हुए इसे महा-बुलबुला (Bubble of epic proportions) करार दिया था। उनका तर्क था कि निफ्टी की ऊपरी चमक उन पीएसयू स्टॉक्स की वजह से है जिन्हें आम निवेशक कम ही रखते हैं। उन्होंने साफ कहा था कि मिडकैप और स्मॉलकैप में मूल्यांकन 50 के पार जा चुका है, जो किसी भी नजरिए से सुरक्षित नहीं है।

SIP को बताया था 'अमीरों की तिजोरी भरने का जरिया'

सिद्धार्थ की बेबाकी सिर्फ कीमतों तक सीमित नहीं थी। उन्होंने देश में चल रही एसआईपी की लहर पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने इसे 'सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट' के बजाय 'सिस्टेमैटिक वेल्थ ट्रांसफर (SWT)' का नाम दिया। उनका मानना था कि मध्य वर्ग का पैसा एसआईपी के जरिए बाजार में आ रहा है और उसी वक्त प्रमोटर्स अपनी हिस्सेदारी बेचकर बाहर निकल रहे हैं। बाजार के प्रति उनकी इसी सतर्कता का नतीजा था कि साल 2025 में उनका फंड करीब 80% कैश पर बैठा था और उन्होंने गोल्ड ईटीएफ एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निवेश कर अपने पोर्टफोलियो को सुरक्षित किया था।

संस्थान निर्माता और एक ईमानदार पथप्रदर्शक की विदाई

एक्विटास परिवार ने उन्हें याद करते हुए कहा कि सिद्धार्थ केवल एक दूरदर्शी निवेशक नहीं, बल्कि एक संस्थान निर्माता थे। वे बौद्धिक ईमानदारी और अनुशासित निर्णय लेने की प्रक्रिया के प्रति गहराई से समर्पित थे। हीलियोस कैपिटल के समीर अरोड़ा सहित निवेश जगत की कई दिग्गज हस्तियों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। सिद्धार्थ का सपना एक्विटास को 1 अरब डॉलर नेटवर्थ वाली विश्वस्तरीय संस्था बनाने का था। भले ही वे शारीरिक रूप से विदा हो गए हों, लेकिन निवेश की उनकी फिलॉसफी और बाजार को देखने का उनका 'कंट्रेरियन' नजरिया आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।

Get Latest real-time updates

Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.

बिजनेस न्यूज़मनीनहीं रहे मल्टिबैगर स्टॉक्स के मास्टर सिद्धार्थ भैया , शेयर बाजार पर हटकर रखते थे नजरिया
More
बिजनेस न्यूज़मनीनहीं रहे मल्टिबैगर स्टॉक्स के मास्टर सिद्धार्थ भैया , शेयर बाजार पर हटकर रखते थे नजरिया