Investment Tips: सोना कछुआ तो चांदी खरगोश… क्या गोल्ड-सिल्वर की रेस आगे भी जारी रहेगी? जानिए एक्सपर्ट्स की राय

Gold Silver Investment: चांदी की चमक के पीछे सोना का आकर्षण भी फीका पड़ रहा है। बीते चार वर्षों में सिल्वर खरगोश की चाल से तो सोना कछुए की गति से बढ़ पाया है। तो क्या निवेशकों को अब भी अपने पोर्टफोलियो में चांदी को जोड़ लेना चाहिए?  

Naveen Kumar Pandey
अपडेटेड9 Feb 2026, 07:35 PM IST
क्या सोना और चांदी में करते रहें निवेश?
क्या सोना और चांदी में करते रहें निवेश?

भारत में चांदी के एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों यानी सिल्वर ईटीएफ्स ने जनवरी 2022 से अब तक सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान्स यानी एसआईपीज के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है। इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सिल्वर ईटीएफ्स ने 6 फरवरी, 2022 से 6 फरवरी, 2026 के बीच चार वर्षों में करीब 62 प्रतिशत का एक्सटेंडेड इंटरनल रेट ऑफ रिटर्न (एक्सआईआरआर) दिया है। एक्सआईआरआर अनियमित जमा या/एवं निकासी पर रिटर्न के आकलन का फॉर्म्युला है।

बीते चार वर्ष में सोने पर भारी पड़ी चांदी

अगर इस अवधि में गोल्ड ईटीएफ्स पर रिटर्न की बात करें तो यह 42 प्रतिशत ही बैठता है। यानी बीते चार वर्षों में सिल्वर ईटीएफ्स ने गोल्ड ईटीएफ्स से 20 प्रतिशत ज्यादा रिटर्न दिया है। ऐसे में प्रश्न है कि क्या निवेशकों को अपने पोर्टफोलियोज में सोने की जगह चांदी का हिस्सा बढ़ा देना चाहिए? ध्यान रहे कि गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ में अभी गिरावट आई है।

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कैसा है सोने-चांदी का भविष्य?

जियोजीत फाइनैंस सर्विसेज के सीनियर इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटिजिस्ट श्रीराम बीकेआर ने मिंट हिंदी से कहा कि सोना-चांदी के निवेशकों को अनुशासन में रहना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ में हालिया गिरावट मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों में कमी का नतीजा है।’

उन्होंने आगे कहा, 'यह ध्यान रखना जरूरी है कि पिछले एक साल में सोने और चांदी की कीमतों में जबरदस्त और रिकॉर्ड तोड़ बढ़त देखी गई है। कीमतें अब भी काफी ऊंचे स्तर पर हैं। यदि भविष्य में कुछ नए और ठोस आर्थिक कारण मिलते हैं, तो कीमतें स्थिर रह सकती हैं, हालांकि अभी संकेत मिले-जुले हैं। दुनिया भर में चल रहे तनाव और अनिश्चितता जब तक जारी रहेंगे, तब तक वे सोने की कीमतों को सहारा देते रहेंगे।'

सोमवार, 9 फरवरी, 2026 को सिल्वर ईटीएफ्स की कीमतें

ईटीएफकीमतें (रुपये में)
आईसीआईसीआई सिल्वर ईटीएफ254
टाटा सिल्वर ईटीएफ24.81
निप्पॉन गोल्ड ईटीएफ244
एचडीएफसी सिल्वर ईटीएफ244.64
एसबीआई सिल्वर ईटीएफ249.75
ऐक्सिस सिल्वर ईटीएफ255
कोटक सिल्वर ईटीएफ247.34
जिरोधा सिल्वर ईटीएफ25.84
आदित्य बिड़ला सन लाइफ253.48

क्यों चमक रही है चांदी?

इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट में फाइनैंशियल रेडियांस के संस्थापक और फाइनैंशियल प्लानर राजेश मिनोचा कहते हैं, 'सिल्वर में जो 62% एक्सआईआरआर दिख रहा है, उसकी बड़ी वजह यह है कि इसकी शुरुआत बहुत कम कीमत पर हुई थी। चांदी की कीमतों में यह उछाल इसकी भारी अस्थिरता के कारण है। महामारी के बाद औद्योगिक मांग में बढ़ोतरी और वैश्विक अर्थव्यवस्था में छाई अस्थिरता ने चांदी की चमक बढ़ा दी है।'

चांदी में ज्यादा रिटर्न तो ज्यादा जोखिम भी

वहीं, ऐसेट एलिक्सिर के संस्थापक और फाइनैंशियल प्लानर शिवम पाठक बताते हैं कि सिल्वर ईटीएफ में मिल रहा अधिक रिटर्न इसलिए है क्योंकि इनकी शुरुआत 2022 में हुई थी जब चांदी की कीमतें काफी नीचे थीं, और उसके ठीक बाद इसकी कीमतों में जबरदस्त सुधार आया।

उन्होंने यह भी समझाया कि सिल्वर बुनियादी तौर पर सोने के मुकाबले ज्यादा उतार-चढ़ाव वाला निवेश है। यही कारण है कि जब चांदी की कीमतें जब भी बढ़ती हैं, तो वह बहुत तेज होती हैं। इसलिए, सोने और चांदी के रिटर्न की तुलना सीधे तौर पर नहीं की जानी चाहिए। चांदी में ज्यादा मुनाफे पर रखें तो यह भी जरूर समझें कि उसमें जोखिम बहुत ज्यादा है।

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सोना बना कछुआ तो चांदी बनी खरगोश

पिछले एक वर्ष में सिल्वर ईटीएफ्स ने 220.42 पर्सेंट का औसत मुनाफा दिया है जबकि गोल्ड ईटीएफ का औसत लाभ 90.19 पर्सेंट ही रहा। नए वर्ष के पहले महीने में तो गोल्ड और सिल्वर ने तहलका ही मचा दिया। सोना और चांदी, दोनों की कीमतें जनवरी महीने के अधिकतर दिनों में ऊंचाई ही छूती रहीं। दरअसल, जनवरी का महीना वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल का रहा है। अनिश्चितताओं के बीच निवेशकों ने बहुमूल्य धातुओं में निवेश का सुरक्षित तरीका ही चुना।

सोमवार, 9 फरवरी, 2026 को गोल्ड ईटीएफ्स की कीमतें

ईटीएफकीमतें (रुपये में)
आईआईसीआई प्रूडेंशियल गोल्ड ईटीएफ132.3
टाटा गोल्ड ईटीएफ14.96
निप्पॉन गोल्ड ईटीएफ127.9
एचडीएफसी गोल्ड ईटीएफ132
एसबीआई गोल्ड ईटीएफ131.89
ऐक्सिस गोल्ड ईटीएफ128.55
कोटक गोल्ड ईटीएफ129
जिरोधा गोल्ड ईटीएफ24.4
आदित्य बिड़ला सन लाइफ135.46
क्वांटम गोल्ड फंड ईटीएफ128.4
एलआईसी एमएफ गोल्ड ईटीएफ13,980

क्या अभी भी सोना-चांदी पर दांव लगाना?

श्रीराम बीकेआर कहते हैं कि सोना-चांदी अब कीमतों के ठहराव वाले दौर की ओर बढ़ते दिख रहे हैं, हालांकि यह कब होगा, इसका सटीक अंदाजा लगाना बहुत मुश्किल है।' उन्होंने कहा, 'हमारी निवेशकों को यही सलाह है कि हाल की तेजी को देखकर जोश में खरीदारी न करें, बल्कि अपने निवेश के अनुशासन का पालन करें। इन स्तरों पर सावधानी बरतना जरूरी है। बजट में सोने-चांदी पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी में बदलाव की उम्मीदों के कारण भी ईटीएफ की कीमतों में गिरावट और अस्थिरता बढ़ गई है।'

उधर, शिवम पाठक कहते हैं कि गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ्स पोर्टफोलियो को डाइवर्सिफाई करने के लिहाज से तो सही हैं, लेकिन ये कमाई करने का प्राथमिक स्रोत नहीं हो सकते। सोना पोर्टफोलियो को उस वक्त स्थिरता दे सकता है जब बाजार उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा होता है जबकि चांदी अपने सही वक्त में मोटा रिटर्न दिलवा सकती है। इसलिए सोना-चांदी में निवेश करना आगे भी सही है, लेकिन पोर्टफोलियो का कितना हिस्सा इसमें रखना है, यह बेहद अनुशासन के साथ तय करना होगा।

वहीं, राजेश मिनोचा कहते हैं, 'सोना-चांदी जोखिम प्रबंधन को बेहतर बना देते हैं, लेकिन निवेशकों को चाहिए कि वह इन्हें धन कमाने का प्राथमिक स्रोत न बना लें क्योंकि लॉन्ग टर्म में तो शेयर ही ज्यादा फायदेमंद होते हैं। सोना-चांदी के हालिया रिटर्न लंबी अवधि में निवेश का आधार नहीं हो सकते।

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सरपट दौड़ के बाद सुस्त हुई सोने-चांदी की चाल

ध्यान रहे कि 29 जनवरी को एमसीएक्स पर गोल्ड और सील्वर फ्यूचर्स ने नए रिकॉर्ड हासिल कर लिए थे। चांदी पहली बार 4 लाख रुपये प्रति किलो के पार जबकि सोना प्रति 10 ग्राम 1.8 लाख रुपये के पास पहुंच गया। लेकिन अगले ही दिन 20 जनवरी को सोना 12 पर्सेंट टूट गया और निवेशकों को प्रति 10 ग्राम 20,154 रुपये का नुकसान उठाना पड़ा।

सोने की कीमत में मार्च 2013 के बाद यह सबसे तेज गिरावट थी। अगले दिन चांदी की बारी आई और 31 जनवरी को एमसीएक्स पर सिल्वर 25 पर्सेंट टूटकर निवेशकों को प्रति किलो 92 हजार रुपये का नुकसान दे बैठा। चांदी की कीमत में यह गिरावट बीते 15 वर्ष में सबसे ज्यादा रही।

Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के लिए है। निवेश करने से पहले किसी प्रमाणित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। मिंट हिंदी आपके किसी भी निर्णय और उसके परिणाम के लिए तनिक भी उत्तरदायी नहीं है।

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