
Silver Market Outlook 2026: सर्राफा बाजार में बुधवार का दिन चांदी के नाम दर्ज हो गया। चांदी की कीमतों ने पहली बार 2 लाख 5 हजार के साइकोलॉजिकल लेवल को पार कर लिया। कुछ समय पहले तक इस लेवल असंभव जान पड़ता था। घरेलू बाजार में जबरदस्त लिवाली और वैश्विक अस्थिरता के बीच चांदी 2,07,833 रुपये के ऑलटाइम लेवल पर जा पहुंची है। महज एक दिन में ₹8000 से ज्यादा की भारी बढ़त ने निवेशकों को गदगद कर दिया है, लेकिन उन आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है जिनके घरों में शादियां हैं।
साल 2025 चांदी के निवेशकों के लिए किसी सपने से कम नहीं रहा है। अगर हम इस साल की शुरुआत यानी 1 जनवरी के आंकड़ों पर गौर करें, तो चांदी ₹90,500 प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी। देखते ही देखते इसमें ₹1,17,333 की वृद्धि दर्ज की गई, जो लगभग 130% का रिटर्न है। ग्लोबल मार्केट में भी स्थिति कुछ ऐसी ही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी पहली बार $65 प्रति औंस के पार निकलकर $65.53 पर पहुंच गई।
इससे पता चलता है कि दुनिया भर के बड़े निवेशक इस 'सेफ हेवन' एसेट पर दांव लगा रहे हैं। डॉलर की संभावित कमजोरी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दरों में कटौती की आहट ने रैली का जोरदार समर्थन किया है, जिससे चांदी की चमक सोने से अधिक हो गई है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटजिस्ट डॉ. वीके विजय कुमार के कहा, “सोना और चांदी दोनों ही ‘सेफ हेवन’ एसेट्स हैं। इस साल दोनों ने अच्छा परफॉर्म किया है, लेकिन चांदी ने बाजी मारी है। इसने करीब 130 फीसदी रिटर्न दिया है, जो चांदी को अलग बनाता है इसका इंडस्ट्री में व्यापक इस्तेमाल होता है। चांदी में तेजी उभरती इंडस्ट्रीज जैसे इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और मोबाइल फोन बनाने में चांदी का उपयोग से आ रही है। इन इंडस्ट्रीज की शानदार ग्रोथ से चांदी की मांग बढ़ गई है। इस रेयर मेटल की सप्लाई में उतनी बढ़ोतरी नहीं हुई, इसलिए कीमतें तेजी से ऊपर चढ़ी हैं। थोड़ी मुनाफावसूली हो सकती है, लेकिन चांदी की कीमतें मजबूत बनी रहने की संभावना है।”
आपूर्ति में कमी: विशेषज्ञों ने मूल्य वृद्धि का श्रेय आपूर्ति में कमी को दिया है, खासकर चीन द्वारा चांदी को राष्ट्रीय हित धातु घोषित करने और अमेरिका द्वारा इसे एक महत्वपूर्ण वस्तु के रूप में टैग करने के बाद।
फेड दर में कटौती की उम्मीदें: कमजोर अमेरिकी श्रम डेटा ने फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर में कटौती की उम्मीदों को फिर से जगाया है, जिससे डॉलर कमजोर हो सकता है और कीमती धातुओं की मांग बढ़ सकती है।
औद्योगिक मांग: चांदी का उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी), सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और मोबाइल फोन जैसे आधुनिक उद्योगों में व्यापक रूप से होता है। इन उद्योगों की प्रभावशाली वृद्धि ने चांदी की मांग को बढ़ाया है।
निवेश मांग: चांदी-समर्थित ईटीएफ में मजबूत प्रवाह जारी है, जो निवेश मांग को दर्शाता है।
कमजोर रुपया: रुपये के कमजोर होने से भी सोने और चांदी की कीमतों में तेजी आई है।
एक्सिस डायरेक्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, जब तक नीचे 50 डॉलर का मजबूत सपोर्ट नहीं टूटता, तब तक चांदी में तेजी का रुख ही बना रहेगा। बीच-बीच में अगर कीमत में गिरावट आए तो उसे खरीदारी का शानदार मौका मानिए, बशर्ते 50 डॉलर का लेवल बरकरार रहे। भारतीय बाजार में बात करें तो चांदी अगर 1.70 लाख से 1.78 लाख रुपये प्रति किलो तक लौटती है, तो उसे स्टेज बाय स्टेज खरीदते चलिए। 2026 तक इसका टारगेट करीब 2.40 लाख रुपये प्रति किलो तक दिख रहा है।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल जानकारी के लिए है। ऊपर दिए गए विचार और सिफारिशें, व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों के हैं, न कि मिंट के। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञों से जांच करें।
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