
Silver Rate Today 6 Feb 2026: साल 2026 की शुरुआत में चांदी ने निवेशकों को मालामाल कर दिया था, लेकिन पिछले कुछ दिनों से इसमें भारी गिरावट जारी है। शुक्रवार, 6 फरवरी को यह गिरावट और भी गहरा गई। मौजूदा समय में चांदी अपनी शुरुआती बढ़त को पूरी तरह से खो चुकी है, जिससे निवेशकों के बीच अफरा-तफरी का का महौल बना हुआ है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर मार्च की कॉन्ट्रैक्ट डिलीवरी वाली चांदी 14,628 रुपये प्रति किलोग्राम की भारी गिरावट के साथ 2,29,187 रुपये के निचले स्तर पर पहुंच गई।
वहीं, इस हफ्ते में यह 2,25,805 रुपये निचले स्तर तक पहुंच गई थी। आंकड़ों के मुताबिक, इस सप्ताह चांदी में 27,852 रुपये या 10.52% की भारी गिरावट दर्ज की गई, जबकि पिछले सप्ताह भी इसमें 28,453 रुपये प्रति किलोग्राम की कमजोरी देखी गई थी। वहीं, 29 जनवरी को 4,20,048 रुपये के रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच गई थी। महज सात ट्रेडिंग सेशन में यह अपने उच्चतम स्तर से 45.6% नीचे गिर चुकी है। वहीं, इस अवधि के दौरान सोने में केवल 17.35% की गिरावट आई है।
चॉइस वेल्थ के रिसर्च एंड प्रोडक्ट हेड अक्षत गर्ग ने कहा कि चांदी का बाजार सोने के मुकाबले काफी छोटा और थिन होता है। इस वजह से जब बिकवाली शुरू होती है, तो गिरावट का असर सोने के मुकाबले कहीं ज्यादा तेज और गहरा दिखाई देता है। दरअसल, पिछले एक साल में चांदी की कीमतें बहुत कम समय में बहुत तेजी से बढ़ी थीं। निवेशकों ने इसमें काफी ज्यादा ऑप्टिमिस्टिक पोजीशन बना ली थी।
उन्होंने आगे कहा कि जब मार्केट इस तरह जरूरत से ज्यादा स्ट्रेच हो जाता है, तो ग्लोबल मार्केट में होने वाला छोटा बदलाव भी बड़ी गिरावट की वजह बन जाता है। इस समय डॉलर की मजबूती और ग्लोबल लेवल पर रिस्क कम करने की बढ़ती प्रवृत्ति ने निवेशकों को अस्थिर संपत्तियों से पैसा निकालने पर मजबूर किया है। इसके अलावा, सिल्वर ETF में भी तेज गिरावट आई है। क्योंकि वे सीधे तौर पर स्पॉट प्राइस को ट्रैक करते हैं। यह गिरावट चांदी के फंडामेंटल्स खराब होने की वजह से नहीं, बल्कि कीमतों में एक जरूरी करेक्शन और प्रॉफिट बुकिंग की वजह से है।
बाजार की इस उठापटक के बीच आम निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब चांदी से दूर रहने का समय आ गया है? बोनान्ज़ा के सीनियर कमोडिटी रिसर्च एनालिस्ट, निरपेंद्र यादव कहते हैं कि इतनी बड़ी रैली के बाद ऐसी गिरावट सामान्य है। जब किसी सेक्टर में बहुत ज्यादा भीड़ इकट्ठा हो जाती है और स्थितियां अनुकूल नहीं रहतीं, तो मुनाफावसूली का दौर शुरू होता है। हालांकि, वे यह भी स्पष्ट करते हैं कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है।
वहीं, बोनान्जा के सीनियर कमोडिटी रिसर्च एनालिस्ट निरपेंद्र यादव ने कहा कि इतनी बड़ी रैली के बाद ऐसी गिरावट सामान्य है। जब किसी सेक्टर में बहुत ज्यादा भीड़ इकट्ठा हो जाती है और स्थितियां अनुकूल नहीं रहतीं, तो मुनाफावसूली का दौर शुरू होता है। हालांकि, घबराने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि चांदी का फंडामेंटल मजबूत है। दुनिया भर में इंडस्ट्रियल डिमांड लगातार बनी हुई है। इसके साथ सप्लाई की कमी की स्थिति भी बरकरार है। ये फैक्टर्स मिड टर्म में कीमतों को स्थिर करेंगे।
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