
Tax on Silver: भारत में सोना-चांदी निवेश और धन संरक्षण का एक साधन है। कई लोग अपनी आर्थिक सुरक्षा और पारंपरिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए अपने घरों में सोना-चांदी रखते हैं। लोग इसे चांदी के आभूषण, सिक्के या अन्य रूपों में खरीदकर सुरक्षित रखते हैं। हालांकि, सोने की तरह, चांदी रखते समय भी कुछ बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है। इन दिनों चांदी की चर्चा ज्यादा हो रही है। इसकी वजह ये है कि चांदी ने पिछले कुछ समय में सोना से भी ज्यादा रिटर्न दिया है। इस साल चांदी ने 80 फीसदी से ज्यादा रिटर्न दिया है।
ज्यादा रिटर्न मिलने से निवेशकों के बीच चांदी की डिमांड बढ़ गई है। भारत में चांदी को निवेश और संपत्ति संरक्षण का एक पसंदीदा तरीका माना जाता है। कई लोग इसे व्यक्तिगत और वित्तीय कारणों की वजह से घर में रखते हैं। सोने को घर में रखने की एक निश्चित मात्रा है, लेकिन क्या चांदी को लेकर भी ऐसी कोई शर्ते हैं? आइए जानते हैं।
सोने की तरह, चांदी (जैसे सिक्के, गहने, बर्तन आदि) रखने पर इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के तहत कोई सीमा तय नहीं की गई है। अगर चांदी कानूनी तरीके से खरीदी गई या विरासत में मिली है, तो उस पर कोई रोक नहीं है। टैक्स तभी लगता है जब आप चांदी बेचते हैं और उस पर कैपिटल गेंस (लाभ) कमाते हैं। टैक्स सिर्फ बिक्री पर या छुपाई गई संपत्ति पाए जाने पर लगता है। भारत में आप घर में कितनी भी चांदी रख सकते हैं। इसे घर में रखने पर सोने की तरह कोई भी लिमिट नहीं है। चाहे वह सिक्के हों या फिर गहने आप अपनी इच्छा अनुसार कितनी भी चांदी रख सकते हैं।
लेकिन अगर आपके पास ज्यादा चांदी है, तो उसकी खरीद के प्रमाण (बिल या रसीद) संभाल कर रखना बेहतर है। अगर आपने चांदी किसी ज्वैलर, डीलर या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से खरीदी है, तो उसका असली बिल जरूर रखें। भविष्य में अगर कभी इनकम टैक्स विभाग जांच करता है, तो ये दस्तावेज आपके लिए सुरक्षा कवच बन सकते हैं।
चांदी पर टैक्स के नियम की बात करें तो यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने फिजिकल सिल्वर (जैसे गहने, सिक्के, बार) खरीदी है या सिल्वर ETF (Silver ETF) या सिल्वर म्यूचुअल फंड में निवेश किया है, और आपने इसे कितने समय तक रखा है। इसलिए, टैक्स के नियम समझना जरूरी है ताकि आप सही निवेश निर्णय ले सकें।
अगर आपने चांदी के गहने या सिक्के को 24 महीने से पहले बेच दिया, तो उस पर हुआ लाभ शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेंस (STCG) माना जाएगा। यह आपकी इनकम टैक्स स्लैब की दर के अनुसार टैक्स देना होगा। वहीं चांदी को 24 महीने से ज्यादा समय तक रखा, तो यह लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेंस (LTCG) माना जाएगा। अगर चांदी 23 जुलाई 2024 या उसके बाद खरीदी गई है, तो इस पर 12.5% टैक्स लगेगा और इंडेक्सेशन का लाभ नहीं मिलेगा। वहीं 23 जुलाई 2024 से पहले खरीदी चांदी पर 20% लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेंस इंडेक्सेशन के साथ टैक्स लगेगा।
चांदी (बार, सिक्के या गहने) के मूल्य पर 3 फीसदी GST लगता है, जबकि गहनों के मेकिंग चार्ज पर 5 फीसदी GST लगाया जाता है।
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