Exclusive Interview: गोते लगाते बाजार में डूब रहा है पैसा? वेल्थ मैनेजर अरुण पटेल की SIP, F&O और सही निवेश पर सटीक सलाह

Investment Tips: बाजार की अस्थिरता के बीच खुदरा निवेशक अक्सर गलत फैसले लेते हैं। वह है- SIP बंद करना, F&O में कूदना, या बिना लक्ष्य के डायवर्सिफाई करना। ArunAsset के संस्थापक अरुण पटेल ने मिंट हिंदी के साथ बातचीत में आज के बेहद उथल-पुथल भरे बाजार के लिहाज से निवेश के टिप्स बताए हैं।

Naveen Kumar Pandey
अपडेटेड16 Mar 2026, 07:11 PM IST
अरुण पटेल, संस्थापक एवं पार्टनर, अरुणएसेट इन्वेस्टमेंट सर्विसेज
अरुण पटेल, संस्थापक एवं पार्टनर, अरुणएसेट इन्वेस्टमेंट सर्विसेज

Retail investor wealth management India 2026: दिल्ली के एक 32 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने पिछले साल F&O ट्रेडिंग में तीन महीने में 4 लाख रुपये गंवा दिए। उसी दौरान उनके एक दोस्त ने चुपचाप अपना SIP जारी रखा और उन्हीं चार वर्षों में उनका पोर्टफोलियो 11% की बढ़ गया। यह कोई अपवाद नहीं है। SEBI के आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 2022-24 के बीच 93% इंडिविजुअल F&O ट्रेडर्स को नुकसान हुआ।

तो फिर पैसा कहां और कैसे बनता है?

हां, यह सवाल बहुत बड़ा है कि पैसे आखिर कहां से बने। इसी का जवाब जानने के लिए मिंट हिंदी ने अरुण एसेट इन्वेस्टमेंट सर्विसेज (ArunAsset Investment Services) के संस्थापक एवं पार्टनर अरुण पटेल से लंबी बातचीत की। उन्होंने इस एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में बाजार की उथल-पुथल में सही रणनीति, एसआईपी को लेकर होने वाली आम गलतियां, और किसी खुदरा निवेशक को अभी क्या करना चाहिए, इन सभी सवालों के सीधे और बेहद आसान जवाब दिए हैं। आइए जानते हैं, उन्होंने क्या कहा है।

प्रश्न: बाजारों में समय-समय पर आने वाले उतार-चढ़ाव को देखते हुए, खुदरा निवेशकों को अल्पकालिक अस्थिरता और दीर्घकालिक निवेश के बीच संतुलन कैसे बनाना चाहिए?

अरुण पटेल: खुदरा निवेशकों को अल्पकालिक अस्थिरता की वजह से अपनी दीर्घकालिक वित्तीय योजना को प्रभावित नहीं होने देना चाहिए। बाजार में सुधार या गिरावट एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन वास्तविक धन सृजन आमतौर पर हर उतार-चढ़ाव पर प्रतिक्रिया देने के बजाय निवेश चक्रों में बने रहने से होता है। सबसे बेहतर तरीका यह है कि निवेश को समय सीमा के अनुसार व्यवस्थित किया जाए। निकट भविष्य में जिस धन की आवश्यकता हो, उसे अपेक्षाकृत सुरक्षित साधनों में रखा जाना चाहिए, जबकि दीर्घकालिक लक्ष्यों के लिए इक्विटी जैसे ग्रोथ एसेट्स में निवेश जारी रखा जा सकता है।

प्रश्न: भारत में एसआईपी निवेश के सबसे लोकप्रिय तरीकों में से एक बन गया है। एसआईपी के माध्यम से निवेश करते समय निवेशक आमतौर पर क्या गलतियां करते हैं?

अरुण पटेल: निवेशकों द्वारा की जाने वाली सबसे बड़ी गलतियों में से एक यह है कि निवेशक बाजार में गिरावट आने पर अपना एसआईपी बंद कर देते हैं। वास्तव में, बाजार में गिरावट दीर्घकालिक एसआईपी निवेश के लिए लाभदायक भी हो सकती है, क्योंकि उसी निश्चित राशि से कम कीमतों पर अधिक यूनिट्स खरीदी जा सकती हैं।

दूसरी सामान्य गलती यह है कि कई निवेशक एसआईपी को गारंटीड रिटर्न वाला उत्पाद समझ लेते हैं, जबकि यह मूल रूप से बाजार से जुड़े निवेशों में अनुशासित तरीके से निवेश करने का एक माध्यम है। इसके अलावा निवेशक अक्सर केवल हालिया प्रदर्शन देखकर फंड चुनते हैं, बहुत सारे एक-जैसे एसआईपी शुरू कर देते हैं या बिना स्पष्ट वित्तीय लक्ष्यों के निवेश करते हैं।

उथल-पुथल भरे बाजार में सफल निवेश का मतलब हर उतार-चढ़ाव का अनुमान लगाना नहीं, बल्कि तैयार, संतुलित और अनुशासित बने रहना है।- अरुण पटेल, संस्थापक एवं पार्टनर, अरुणएसेट इन्वेस्टमेंट सर्विसेज

प्रश्न: कई युवा निवेशक तेजी से डेरिवेटिव और F&O ट्रेडिंग की ओर आकर्षित हो रहे हैं। वेल्थ मैनेजमेंट के नजरिए से, खुदरा निवेशकों को इस प्रवृत्ति को कैसे देखना चाहिए?

अरुण पटेल: वेल्थ मैनेजमेंट के दृष्टिकोण से खुदरा निवेशकों को F&O को हाई रिस्क ट्रेडिंग एक्टिविटी के रूप में देखना चाहिए, न कि वेल्थ क्रिएशन के मुख्य साधन के रूप में। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के एक अध्ययन के अनुसार, वित्त वर्ष 2022 से 2024 के बीच इक्विटी F&O में लगभग 93% व्यक्तिगत ट्रेडर्स को नुकसान हुआ। अधिकांश युवा निवेशकों के लिए पोर्टफोलियो की नींव विविध और दीर्घकालिक निवेशों पर आधारित होनी चाहिए।

इनमें इक्विटी फंड, अनुशासित डायरेक्ट इक्विटी, डेट और अन्य उचित एसेट एलोकेशन शामिल हो सकते हैं। यदि F&O में भागीदारी की जाती है, तो स्पष्ट जोखिम सीमाओं के साथ और बिना अत्यधिक लीवरेज के इसे केवल अतिरिक्त पूंजी के बहुत छोटे हिस्से तक सीमित रखना चाहिए। आमतौर पर पैसा निरंतर ट्रेडिंग से नहीं, बल्कि लॉन्ग टर्म कंपाउंडिंग से बनता है।

प्रश्न: वैश्विक निवेश में बढ़ती रुचि के साथ, खुदरा निवेशक पारंपरिक इक्विटी और म्यूचुअल फंड से परे अपने पोर्टफोलियो में विविधता कैसे ला सकते हैं?

अरुण पटेल: निवेशक अपने पोर्टफोलियो में सोना, चांदी, डेट इंस्ट्रूमेंट्स, REITs, InvITs और उपयुक्त होने पर अंतरराष्ट्रीय संपत्तियों को शामिल करके विविधता ला सकते हैं। इसका उद्देश्य अनावश्यक जटिलता बढ़ाना नहीं, बल्कि किसी एक बाजार या एसेट क्लास पर निर्भरता कम करना होना चाहिए।

उदाहरण के लिए, आर्थिक अनिश्चितता के दौरान सोना सुरक्षा प्रदान कर सकता है, डेट इंस्ट्रूमेंट्स पोर्टफोलियो को स्थिरता देते हैं, और वैश्विक निवेश किसी एक अर्थव्यवस्था या मुद्रा पर निर्भरता को कम करता है। हालांकि, डायवर्सीफिकेशन हमेशा अनुशासित और लक्ष्य-आधारित होना चाहिए। निवेशकों को केवल चलन में आए उत्पादों के पीछे भागने के बजाय अपने जोखिम प्रोफाइल, तरलता की जरूरतों और दीर्घकालिक योजना के अनुसार निर्णय लेना चाहिए।

प्रश्न: अभी जो बाजार का माहौल है, उसमें किस पर अधिक ध्यान देना चाहिए- स्टॉक सेलेक्शन या एसेट एलोकेशन पर?

अरुण पटेल: वर्तमान बाजार परिस्थितियों में एसेट एलोकेशन को प्राथमिक महत्व दिया जाना चाहिए। स्टॉक सेलेक्शन महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका वास्तविक लाभ तभी मिलता है जब पोर्टफोलियो में इक्विटी, डेट, गोल्ड और डिपॉजिट के बीच संतुलित आवंटन पहले से सही हो।

दीर्घकालिक निवेश परिणाम अक्सर कुछ विजेता शेयर चुनने से अधिक अनुशासन, डायवर्सीफिकेशन और सही पोजीशन साइजिंग से तय होते हैं। अस्थिर बाजारों में एसेट एलोकेशन जोखिम को नियंत्रित करने, भावनात्मक निर्णयों को कम करने और कंपाउंडिंग के लिए स्थिर आधार बनाने में मदद करता है। अच्छे शेयरों का चयन महत्वपूर्ण है, लेकिन यह एक मजबूत एसेट एलोकेशन स्ट्रक्चर के भीतर होना चाहिए, उसकी जगह नहीं लेना चाहिए।

प्रश्न: डिजिटल प्लैटफॉर्म ने निवेश को पहले से कहीं अधिक आसान बना दिया है। क्या इससे निवेशकों में वित्तीय अनुशासन बढ़ा है या आवेगपूर्ण निवेश भी बढ़ा है?

अरुण पटेल: डिजिटल प्लैटफॉर्म ने निवेश तक पहुंच, भागीदारी और जागरूकता को निश्चित रूप से बढ़ाया है। अब निवेशक जल्दी शुरुआत कर सकते हैं, एसआईपी को ऑटोमेट कर सकते हैं, पोर्टफोलियो को आसानी से ट्रैक कर सकते हैं और रिसर्च रिजल्ट भी आसानी से देख सकते हैं। हालांकि, निवेश करना जितना आसान हुआ है, उतना ही आवेगपूर्ण निवेश का जोखिम भी बढ़ा है।

कई बार प्रक्रिया आसान होने से ओवर-ट्रेडिंग, रिटर्न के पीछे भागने और बाजार के शोर पर प्रतिक्रिया देने का उतावलापन देखा जाता है। इसलिए असली चुनौती पहुंच नहीं, बल्कि निवेश को लेकर आपका व्यवहार है। यदि तकनीक का उपयोग अनुशासन, एसेट एलोकेशन और स्पष्ट लक्ष्यों के साथ किया जाए तो यह एक मजबूत सहायक बन सकती है।

प्रश्न: अरुणएसेट निवेशकों को विकास और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने वाले पोर्टफोलियो तैयार करने में कैसे मदद करता है?

अरुण पटेल: अरुणएसेट में पोर्टफोलियो निर्माण उत्पाद चयन से नहीं, बल्कि एसेट एलोकेशन से शुरू होता है। सबसे पहले निवेशक के लक्ष्यों, समय सीमा, तरलता की जरूरतों और जोखिम उठाने की क्षमता को समझा जाता है। इसके बाद इक्विटी जैसे ग्रोथ एसेट्स को डेट, सोना और नकद जैसे स्थिर विकल्पों के साथ संतुलित किया जाता है। इसका उद्देश्य ऐसे लचीले पोर्टफोलियो बनाना है जो दीर्घकालिक धन सृजन में भागीदार बन सकें और अस्थिर बाजार चरणों के दौरान जोखिम को भी नियंत्रित कर सकें।

प्रश्न: अरुणएसेट का रिसर्च बेस्ड और इंडिविजुअल वेल्थ मैनेजमेंट विजन उथल-पुथल भरे बाजार में निवेशकों की कैसे मदद करता है?

अरुण पटेल: शोध-आधारित और व्यक्तिगत दृष्टिकोण निवेशकों को अधिक स्पष्टता और अनुशासन के साथ बाजार की अनिश्चितता का सामना करने में मदद करता है। अरुणएसेट में पोर्टफोलियो बाजार के शोर या एक-जैसे उत्पादों के आधार पर नहीं बनाए जाते।

इसके बजाय मैक्रो ट्रेंड्स, वैल्युएशन, अर्निंग साइकिल, लिक्विडिटी और नीतिगत बदलावों का विश्लेषण किया जाता है, तब जाकर प्रत्येक निवेशक के लक्ष्यों, जोखिम क्षमता और तरलता की जरूरतों के अनुसार पोर्टफोलियो तैयार किया जाता है। इससे उठापटक के दौर भावनात्मक निर्णय कम होते हैं और पोर्टफोलियो अधिक संतुलित और लचीला बनता है। उथल-पुथल भरे बाजार में सफल निवेश का मतलब हर उतार-चढ़ाव का अनुमान लगाना नहीं, बल्कि तैयार, संतुलित और अनुशासित बने रहना है।"

Key Takeaways: इस इंटरव्यू की 6 सबसे जरूरी बातें

1. अस्थिरता में SIP बंद करना सबसे बड़ी गलती है

गिरावट में उसी रकम से ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं। यही SIP की असली ताकत है। जो रुका, उसी ने कमाया।

2. F&O वेल्थ क्रिएशन का रास्ता नहीं है

SEBI के अनुसार 93% खुदरा F&O ट्रेडर्स घाटे में रहे। यह जुआ नहीं है, लेकिन बिना स्पष्ट रिस्क लिमिट के यह धन की बर्बादी का रास्ता जरूर है।

3. एसेट एलोकेशन, स्टॉक सेलेक्शन से बड़ा है

कौन सा स्टॉक चुना, यह कम मायने रखता है। इक्विटी, डेट, गोल्ड और कैश के बीच का बैलेंस ज्यादा मायने रखता है।

4. डायवर्सिफिकेशन का मतलब जटिल पोर्टफोलियो नहीं

सोना, REITs, इंटरनैशनल एसेट्स, पोर्टफोलियो में ये सब तभी एड करें जब आपके गोल्स, रिस्क प्रोफाइल और कैश की जरूरत इसकी मांग करें। ट्रेंड के पीछे नहीं भागें।

5. डिजिटल प्लैटफॉर्म्स की पहुंच बढ़ी, अनुशासित रहने की जरूरत भी बढ़ी

एक क्लिक में इन्वेस्ट करना और पैनिक सेलिंग आसान हो गया। ध्यान रखिए टेक्नॉलजी टूल है, स्ट्रैटिजी नहीं।

6. पोर्टफोलियो बनाना प्रॉडक्ट से नहीं, गोल से शुरू होता है

पहले तय करें कि पैसा कब चाहिए, कितना चाहिए, कितना जोखिम उठा सकते हैं। बाकी सब बाद में।

Actionable Insights: आखिर में ध्यान रखें ये बातें

बाजार हमेशा ऊपर-नीचे होता रहेगा। यह नहीं बदलेगा। जो बदल सकता है, वो है आपकी प्रतिक्रिया।

अरुण पटेल की बातों से एक बात बार-बार उभरती है। वह ये कि वेल्थ क्रिएशन का रहस्य कोई सिक्रेट फॉर्म्युला नहीं, बल्कि अनुशासन के रास्ते पर अडिग रहना है। इसलिए, अभी आप यह तीन काम कर सकते हैं-

  • पहला, अपना SIP मत छुइए। अगर आपने SIP शुरू किया है और बाजार गिरा है यह बुरी खबर नहीं, बल्कि अवसर है। बंद करने से पहले एक बार कैलकुलेट करें कि गिरावट में आपको कितनी एक्स्ट्रा यूनिट्स मिल रही हैं।
  • दूसरा, अपना एसेट एलोकेशन चेक कीजिए। आज ही देखिए कि आपके कुल निवेश में इक्विटी कितना है, डेट कितना और गोल्ड कितना। अगर सब कुछ एक ही बास्केट में है, तो रीबैलेंसिंग पर विचार कीजिए।
  • तीसरा, F&O से पहले यह सवाल पूछें। क्या आपके पास ऐसा पैसा है जिसे गंवाने का जोखिम उठा सकते हैं? अगर जवाब नहीं है, तो F&O आपके लिए नहीं है।

जैसा अरुण पटेल कहते हैं, 'उथल-पुथल भरे बाजार में सफल निवेश का मतलब हर उतार-चढ़ाव का अनुमान लगाना नहीं, बल्कि तैयार, संतुलित और अनुशासित बने रहना है।'

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Disclosure: यह प्रायोजित साक्षात्कार नहीं है। ArunAsset ने इसके लिए कोई भुगतान नहीं किया।

Disclaimer: यह लेख सिर्फ जानकारी के लिए है। इसमें दिए गए विचार और सुझाव एक्सपर्ट के हैं, मिंट हिंदी के नहीं। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि निवेश संबंधी कोई फैसला लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञ से सलाह लें, क्योंकि बाजार की स्थितियां तेजी से बदल सकती हैं और हालात अलग-अलग हो सकते हैं।

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