SIP: Systematic Investment Plan (SIP) निवेश का एक पॉपुलर जरिया है। पिछले कुछ सालों में SIP में निवेश काफी तेजी से बढ़ा है क्योंकि इसके जरिए आप छोटे-छोटे निवेश से बड़ा कॉर्पस बना सकते हैं। एसआईपी के जरिए म्यूचुअल फंड्स में निवेश किया जाता है। लॉन्ग टर्म में ये स्कीम जितना प्रॉफिट देती है, उतना प्रॉफिट किसी सामान्य स्कीम में भी नहीं मिलता है। इस बीच अगर आपने SIP शुरू कर दिया है और अकाउंट में बैलेंस नहीं है तो जुर्माना भी लगाया जा सकता है। हाल ही में एक यूजर ने जुर्माना लगाए जाने पर अपना दुखा व्यक्ति किया है।
एक Reddit यूजर (complex_nutmeg69420) ने हाल ही में बताया कि उसके पिता के बैंक अकाउंट में पर्याप्त धनराशि नहीं थी। ऐसे में उनके पिता को 590 रुपये का जुर्माना भरना पड़ा। उनके पिता के अकाउंट से अपने आप हर महीने पैसे कट जाते थे। लेकिन पर्याप्त धमराशि नहीं होने के कारण ICICI बैंक ने उनसे जुर्माना वसूल लिया।
500 रुपये की SIP पर लगा 590 रुपये जुर्माना
शख्स ने बताया कि मेरे पिता जी का आईसीआईसीआई बैंक के खाते में एक म्यूचुअल फंड एसआईपी ऑटो डेबिट एक्टिव था। यह एक सेकेंडरी अकाउंट है। यहां पैसे ट्रांसफर करना पड़ता है। 31 तारीख को दुर्भाग्य से प्राइमरी बैंक का सर्वर डाउन था। जिससे समय पर ICICI बैंक के अकाउंट पर पैसे ट्रांसफर नहीं हो पाए। ऐसे में हमसे 590 रुपये ऑटो डेबिट विफलता शुल्क लिया गया। ICICI बैंक के साथ लंबे समय से खाता होने के हवाला देकर मैंने इस चार्ज को माफ करने की गुजारिश की है। लेकिन इससे बैंक पर कोई फर्क नहीं पड़ा।
इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक, एक्सपर्ट का कहना है कि जो लोग 500 रुपये या इससे कम जमा करते हैं। इस दौरान अगर बैंकों में एक बार उनका पेमेंट बाउंस हो जाए तो मासिक किस्त से ज्यादा भुगतान करना पड़ता है। इससे छोटे निवेशक काफी प्रभावित होते हैं। जानकारों का कहना है कि ऐसे लोगों पर जुर्माना लगाने से पहले रिटेल निवेशकों की वित्तीय क्षमता ओर निवेश के इरादे पर विचार जरूर करना चाहिए। जानकारों का कहना है कि अगर यही हाल रहा है तो छोटे निवेशक हतोत्साहित हो सकते हैं।
ऑटो डेबिट पर बैंक क्यों लगाते हैं जुर्माना
जब बैंक अकाउंट से EMI, बीमा प्रीमियम, म्यूचुअल फंड SIP की राशि ऑटोमेटिक कट हो जाती है, उसे ऑटो डेबिट कहते हैं। अगर अकाउंट में पर्याप्त पैसे नहीं हैं तो बैंक जुर्माना वसूलते हैं।
जानिए क्या कहता है सेबी का नियम
SEBI के नियमों के मुताबिक, अगर SIP की लगातार 3 से 5 किश्तें फेल हो जाती हैं, तो म्यूचुअल फंड कंपनी यानी AMC आपकी SIP योजना को बंद कर सकती है। हर फंड हाउस की अपनी अलग - अलग लिमिट होती है। आमतौर पर 3 फेल किश्तों के बाद SIP रोक दी जाती है। वहीं SIP के फेल होने पर क्रेडिट स्कोर पर कोई असर नहीं होता है। लेकिन अगर बैंक बार-बार ECS फेल होने की सूचना CIBIL को भेजता है, तो इनडायरेक्ट रूप से प्रभाव हो सकता है।
लॉन्ग टर्म निवेश पर क्या होगा असर
SIP की ताकत होती है नियमित निवेश और कंपाउंडिंग का असर होता है। अगर SIP बार-बार फेल होती है, तो आपकी निवेश की निरंतरता टूट जाती है। इससे न सिर्फ आपका फाइनेंशियल लक्ष्य (जैसे रिटायरमेंट, बच्चों की पढ़ाई या घर खरीदना) समय पर पूरा नहीं हो पाएगा, बल्कि कंपाउंडिंग का लाभ भी घट जाएगा। छोटी-सी चूक आपके पूरे वित्तीय रोडमैप को धीमा कर सकती है।