अनिश्चित बाजार में कैसे बनाएं पैसा? SIP और मल्टी एसेट फंड है ना 'ऑल-वेदर' तरीका

SIP Multi Asset Fund Investment Strategy: शेयर बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के बीच SIP (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) के साथ मल्टी एसेट फंड में निवेश करना एक बेहतरीन रणनीति है। यह एक 'ऑल-वेदर' समाधान है, जो हर आर्थिक माहौल में पोर्टफोलियो को स्थिरता देता है।

Naveen Kumar Pandey
पब्लिश्ड12 Dec 2025, 08:04 AM IST
 ऐसे बनाएं ऑल वेदर पोर्टफोलियो। (सांकेतिक तस्वीर)
ऐसे बनाएं ऑल वेदर पोर्टफोलियो। (सांकेतिक तस्वीर)

Long Term Wealth Creation: वर्ष 2025 अंत होने को है, लेकिन वैश्विक और घरेलू बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। इसके कारण निवेशक थोड़े चिंतित हैं। चाहे वह जलवायु परिवर्तन हो या अस्थिर निवेश का माहौल, ऐसे समय में निवेश पर अधिकतम रिटर्न कमाने से ज्यादा जरूरी है, अपने निवेश का जोखिम मैनेज करना। इस जरूरत को मल्टी एसेट फंड अच्छी तरह से पूरा करते हैं, जो एक 'ऑल-वेदर' इन्वेस्टमेंट ऑप्शन बनकर उभरते हैं।

अनिश्चित समय में मल्टी एसेट फंड की भूमिका

मल्टी एसेट फंड को 'ऑल-वेदर' सॉल्युशन कहा जाता है क्योंकि ये कई एसेट क्लास में निवेश करके पोर्टफोलियो को डाइवर्सिफाई करते हैं। ये फंड इक्विटी, बॉन्ड और गोल्ड जैसे एसेट क्लास का मिश्रण होते हैं। ये सभी एसेट क्लास अलग-अलग आर्थिक स्थितियों में अलग तरह से परफॉर्म करते हैं।

इक्विटी: जब बाजार में तेजी और हाई-ग्रोथ का माहौल होता है, तो इक्विटी बेहतरीन प्रदर्शन करती है।

बॉन्ड: जब मौद्रिक नीतियां आसान होती हैं, तो बॉन्ड में निवेश करने वाले निवेशकों को अच्छा रिवॉर्ड मिलता है।

सोना: आर्थिक दबाव या जियोपॉलिटिकल टेंशन के समय में गोल्ड आमतौर पर बेहतर रिटर्न देता है।

इस संयोजन का फायदा यह है कि अगर एक एसेट क्लास में कमजोरी आती है, तो दूसरे की मजबूती से उसकी भरपाई हो जाती है। इस तरह पोर्टफोलियो का नुकसान सीमित हो जाता है और आर्थिक उतार-चढ़ाव में भी पोर्टफोलियो का प्रदर्शन सुचारू बना रहता है।

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SIP के साथ निवेश से मिलता है अनुशासन

मल्टी एसेट फंड में निवेश करने का सबसे अनुशासित और आसान तरीका लंबी अवधि के एसआईपी के माध्यम से है। इसमें एक तय राशि निवेशक के बैंक खाते से एक निश्चित तारीख पर ऑटोमैटिकली डेबिट होकर फंड में इन्वेस्ट हो जाती है। मल्टी एसेट फंड में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट लंबी अवधि में स्थिर वेल्थ बनाने का एक आसान रास्ता है।

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बाजार की टाइमिंग की चिंता खत्म

एसआईपी के जरिए निवेश करने पर निवेशक को लगातार बाजार पर नजर रखने या सही समय पर निवेश करने की चिंता नहीं करनी पड़ती है। एसआईपी समय के साथ खरीद की लागत का एवरेज कर देता है। आसान भाषा में कहें तो जब बाजार सस्ता होता है, तब निवेशक को म्यूचुअल फंड की ज्यादा यूनिट्स मिल जाती हैं, और जब बाजार महंगा होता है, तो कम यूनिट्स मिलती हैं। इस तरह, बाजार की टाइमिंग की चिंता खत्म हो जाती है और बचत तथा निवेश ऑटोमैटिकली होता रहता है।

कुल मिलाकर कहें तो साल 2026 में प्रवेश करते समय मल्टी एसेट फंड के माध्यम से डाइवर्सिफिकेशन बनाए रखना और एसआईपी के जरिए निवेश में अनुशासन रखना सबसे भरोसेमंद 'ऑल-वेदर' रणनीति साबित हो सकती है।

Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के लिए है। निवेश करने से पहले किसी प्रमाणित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। मिंट हिंदी आपके किसी भी निर्णय और उसके परिणाम के लिए तनिक भी उत्तरदायी नहीं है।

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