Small Saving Schemes: वित्त मंत्रालय वित्त मंत्रालय 30 सितंबर, 2025 को स्मॉल सेविंग स्कीम्स के लिए ब्याज दरों की घोषणा करने वाला है। इस बार फैसला बेहद अहम माना जा रहा है। वित्त मंत्रालय हर तीन महीने में PPF, SCSS और SSY समेत पोस्ट ऑफिस की सभी स्मॉल सेविंग स्कीम्स के लिए ब्याज दरों की समीक्षा करके नई ब्याज दरों का ऐलान करता है। इस वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही यानी अक्टूबर-दिसंबर 2025 के लिए नई ब्याज दरों का ऐलान 30 सिंतबर को किया जाएगा। ये नई दरें 1 अक्तूबर से लागू होंगी। इससे पहले दूसरी तिमाही के लिए ब्याज दरों की समीक्षा जून 2025 में हुई थी, लेकिन तब ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया था।
इस बार सबसे ज्यादा चर्चा Public Provident Fund (PPF) की ब्याज दर को लेकर है। मौजूदा समय में PPF पर 7.1 फीसदी ब्याज मिल रहा है, लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि इसमें कटौती हो सकती है। अगर ऐसा होता है तो पिछले 50 साल में PPF का ब्याज रेट सबसे निचले स्तर पर आ जाएगा। हालांकि इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
पिछले 6 तिमाही से नहीं बदलीं ब्याज दरें
ऐसा लगातार छठी तिमाही में हुआ जब इन स्कीम्स की दरें जस की तस रखी गईं। इसका मतलब है कि निवेशकों को फिलहाल वही रिटर्न मिल रहा है जो अप्रैल-जून तिमाही में तय हुआ था। अब सवाल ये है कि क्या अक्टूबर-दिसंबर की तिमाही में इसमें कोई बदलाव देखने को मिलेगा। जिन स्कीम्स की ब्याज दरों पर फैसला होना है उनमें पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), सुकन्या समृद्धि योजना (SSY), नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (NSC), किसान विकास पत्र (KVP), वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (SCSS) समेत अन्य योजनाएं शामिल हैं। अगर इस बार ब्याज दरों में कटौती होती है तो निवेशकों को बड़ा झटका लगा सकता है। वहीं अगर ब्याज दरों में इजाफा होता है तो निवेशकों के लिए खुशखबरी होगी।
जानिए पोस्ट ऑफिस की ब्याज दरें कैसे होती हैं तय
सरकार हर तिमाही में पोस्ट ऑफिस की स्कीम्स की ब्याज दरों की समीक्षा करती है। इन दरों को तय करने के लिए श्यामला गोपीनाथ समिति की सिफारिशों का पालन किया जाता है। समिति का कहना है कि इन योजनाओं की ब्याज दरें संबंधित अवधि के सरकारी बॉन्ड की यील्ड से 25 से 100 बेसिस पॉइंट अधिक होनी चाहिए। इससे यह सुनिश्चित होता है कि ये स्कीमें निवेशकों के लिए आकर्षक बनी रहें।
हालांकि, कई बार सरकार इस फॉर्मूले के हिसाब से ब्याज दर तय नहीं करती हैं। इसकी वजह ये है कि सरकार बाध्य नहीं है कि वह हमेशा समिति की सिफारिशों को माने। कई बार आम लोगों के हित को देखते हुए सरकार अपने स्तर पर निर्णय लेती है।