
SEBI warning on SME IPO manipulation: देश में छोटे और मंझोले उद्योग के सेगमेंट में निवेश का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। छोटे और मध्यम दर्जे की कंपनियां बाजार से मोटा पैसा जुटा रही हैं। लेकिन चमक-धमक के बीच निवेशकों के लिए खतरे की घंटी भी बज रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना जांच-पड़ताल के निवेश करना भारी पड़ सकता है।
साल 2025 छोटे उद्योगों के लिए शानदार रहा है। प्राइम डेटाबेस के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल 257 एसएमई कंपनियों ने बाजार से लगभग 10,965 करोड़ रुपये जुटाए हैं। यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। निवेशकों का भरोसा इस कदर बढ़ा है कि 2020 में जहां एक आईपीओ में औसतन 297 आवेदन आते थे, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 1.8 लाख पहुंच गई है।
मुनाफे की उम्मीद में पैसा लगाने वाले निवेशकों के लिए एक डराने वाला आंकड़ा भी सामने आया है। 2025 में लिस्ट हुई 250 कंपनियों में से 129 कंपनियां अपने इश्यू प्राइस से नीचे चल रही हैं। यानी आधे से ज्यादा निवेशकों को फिलहाल घाटा हो रहा है। इन कंपनियों में ट्रेडिंग वॉल्यूम कम होने के कारण शेयरों की कीमतों के साथ छेड़छाड़ होने का खतरा भी बना रहता है।
एसएमई कंपनियों के लिए नियम मुख्य बोर्ड की कंपनियों के मुकाबले थोड़े आसान होते हैं। जहां बड़ी कंपनियों को हर तीन महीने में अपने वित्तीय नतीजे बताने होते हैं, वहीं एसएमई कंपनियों को साल में सिर्फ दो बार नतीजे देने की छूट है। इसके अलावा, इन कंपनियों का बिजनेस छोटा होता है और इनके पास कड़े नियमों का पालन करने के लिए पर्याप्त संसाधन भी नहीं होते।
बाजार नियामक सेबी (SEBI) के अध्यक्ष तुहिन पांडे ने बढ़ते जोखिम पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि कैपिटल गेन के रूप में मिलने वाला रिटर्न दिखने में आकर्षक हो सकता है, लेकिन जरूरी नहीं कि वह हकीकत हो। सेबी ने यह भी बताया कि कुछ कंपनियां और प्रमोटर अपने कारोबार की गलत तस्वीर पेश करके निवेशकों को गुमराह कर रहे हैं।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि किसी भी SME IPO में पैसा लगाने से पहले कंपनी के कर्ज और मुनाफे की ग्रोथ को जरूर देखें। निवेशकों को यह चेक करना चाहिए कि कंपनी आईपीओ से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल कहां करने वाली है। अगर कंपनी उस पैसे को बिजनेस बढ़ाने या क्षमता विस्तार में लगा रही है, तो वह एक बेहतर विकल्प हो सकता है।
अगर आप किसी नए SME IPO में पैसा लगाने की सोच रहे हैं, तो इन बिंदुओं को चेकलिस्ट की तरह इस्तेमाल करें।
1. पैसा कहां खर्च होगा: अगर कंपनी आईपीओ के पैसे का इस्तेमाल अपना कर्ज चुकाने के बजाय बिजनेस बढ़ाने या नई मशीनें खरीदने में कर रही है, तो यह एक पॉजिटिव संकेत है।
2. कर्ज और इक्विटी का अनुपात: कंपनी पर उसकी कमाई के मुकाबले बहुत ज्यादा कर्ज नहीं होना चाहिए। कम कर्ज वाली कंपनियां आर्थिक उतार-चढ़ाव को बेहतर तरीके से झेल पाती हैं।
3. मुनाफे की निरंतरता: पिछले 2-3 सालों के रिकॉर्ड देखें। क्या कंपनी का रेवेन्यू और प्रॉफिट लगातार बढ़ रहा है या उसमें बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव है?
सेबी ने साफ किया है कि कई बार प्रमोटर्स अवास्तविक आंकड़े पेश करते हैं। चूंकि इन कंपनियों का ऑपरेशन छोटे स्तर पर होता है, इसलिए इनकी पारदर्शिता मुख्य बोर्ड की कंपनियों जैसी नहीं होती। निवेशकों को केवल 'ग्रे मार्केट प्रीमियम' (GMP) के भरोसे निवेश करने से बचना चाहिए।
Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के लिए है। निवेश करने से पहले किसी प्रमाणित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। मिंट हिंदी आपके किसी भी निर्णय और उसके परिणाम के लिए तनिक भी उत्तरदायी नहीं है।
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