SGB Redemption: सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के 5 साल पूरे! 1 अप्रैल से पहले रिडीम करें या इंतजार करें, समझिए टैक्स का गणित

SGB Tax Rules: SGB में 5 साल पूरे कर चुके निवेशकों के सामने बड़ा सवाल है- रिडीम करें या इंतजार करें। बजट 2026 के टैक्स बदलाव खासतौर पर सेकेंडरी मार्केट से खरीदे बॉन्ड पर असर डालेंगे। सही फैसला निवेश के तरीके और टैक्स नियमों पर निर्भर करता है।

Priya Shandilya
अपडेटेड5 Feb 2026, 06:19 PM IST
SGB के 5 साल पूरे? 1 अप्रैल से पहले रिडीम करें या इंतजार करें
SGB के 5 साल पूरे? 1 अप्रैल से पहले रिडीम करें या इंतजार करें

Sovereign Gold Bond: जिन निवेशकों ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) में पैसा लगाया था, उनके लिए अब फैसला लेने का वक्त आ गया है। कई SGB धारकों के निवेश को पांच साल पूरे हो चुके हैं और अब वे यह सोच रहे हैं कि बॉन्ड को अभी रिडीम करें या फिर आगे भी होल्ड करके रखें। बजट 2026 में टैक्स से जुड़े प्रस्तावों के बाद यह सवाल और भी अहम हो गया है।

किन निवेशकों के लिए खुला है रिडेम्पशन का रास्ता

जिन निवेशकों ने सितंबर 2020 की सीरीज VI या मार्च 2021 की सीरीज XII में निवेश किया था, उन्होंने अनिवार्य पांच साल का लॉक-इन पूरा कर लिया है। इनके अलावा इससे पहले की कई किस्तों में निवेश करने वाले लोग भी अब प्रीमैच्योर रिडेम्पशन के योग्य हो चुके हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि बदलते टैक्स नियमों के बीच सही कदम क्या हो।

बजट 2026 ने क्यों बढ़ाई चिंता

बजट 2026 में प्रस्ताव है कि 1 अप्रैल 2026 के बाद SGB के प्रीमैच्योर रिडेम्पशन पर मिलने वाली टैक्स छूट को सीमित किया जाए। यही वजह है कि कई निवेशक दुविधा में हैं, क्या अभी बॉन्ड भुनाना बेहतर होगा या फिर आगे इंतजार करना।

RBI से सीधे खरीदे गए SGB पर क्या पड़ेगा असर?

अगर आपने SGB सीधे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) से खरीदे हैं, तो आपके लिए स्थिति काफी हद तक साफ है। ऐसे निवेशकों के लिए अभी भी टैक्स छूट जारी रहेगी, चाहे वे पांच साल बाद रिडीम करें या पूरे आठ साल की अवधि पूरी होने पर। मौजूदा नियमों के तहत 31 मार्च 2026 तक किया गया प्रीमैच्योर रिडेम्पशन भी टैक्स-फ्री है। इसलिए अगर निकट भविष्य में पैसों की जरूरत है, तो 1 अप्रैल से पहले रिडीम करना फायदेमंद हो सकता है।

RBI से खरीदा लेकिन सेकेंडरी मार्केट में बेचा

कुछ निवेशक ऐसे भी हैं जिन्होंने बॉन्ड RBI से खरीदे, लेकिन अब उन्हें स्टॉक एक्सचेंज पर बेचने का विकल्प देख रहे हैं। ऐसे मामलों में टैक्स छूट नहीं मिलती। सेकेंडरी मार्केट में बिक्री पर 12.5% की दर से लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स देना होगा, चाहे बिक्री 1 अप्रैल से पहले हो या बाद में। इसलिए यहां फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि आगे होल्ड करने से मिलने वाला फायदा टैक्स देने के बाद की रकम से ज्यादा है या नहीं।

सिर्फ सेकेंडरी मार्केट से खरीदे गए SGB

जिन निवेशकों ने SGB स्टॉक एक्सचेंज से खरीदे हैं, उनके लिए टैक्स नियम थोड़े सख्त हैं। अगर बॉन्ड 12 महीने से कम समय में बेचा जाता है, तो शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगेगा। 12 महीने से ज्यादा रखने पर 12.5% LTCG देना होगा। यहां होल्डिंग पीरियड चाहे जितना भी हो, टैक्स से पूरी तरह बचाव नहीं होता।

सेकेंडरी मार्केट से खरीदा और मैच्योरिटी तक रखा

बजट 2026 का सबसे बड़ा असर ऐसे निवेशकों पर पड़ेगा। 1 अप्रैल 2026 के बाद, अगर सेकेंडरी मार्केट से खरीदे गए SGB को मैच्योरिटी पर रिडीम किया जाता है, तो उस पर भी टैक्स लगेगा। पहले जहां ऐसी रकम लगभग टैक्स-फ्री मानी जाती थी, अब वहां भी LTCG लागू होगा। इसलिए कई एक्सपर्ट्स मानते हैं कि ऐसे निवेशकों के लिए 1 अप्रैल से पहले रिडीम करना टैक्स के लिहाज से बेहतर हो सकता है।

सही फैसला क्या हो?

अगर आपने SGB सीधे RBI से खरीदे हैं और पैसों की तुरंत जरूरत नहीं है, तो लंबे समय तक होल्ड करना समझदारी हो सकती है। लेकिन सेकेंडरी मार्केट से खरीदने वालों को टैक्स नियम ध्यान में रखकर समय पर फैसला लेना चाहिए। बदलते नियमों के बीच, सही जानकारी ही सबसे बड़ा हथियार है।

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