भारतीय रिजर्व बैंक से होगी कमाई, फिर भी कर्ज लेगी सरकार, विस्तार से जानिए क्या है पूरा मामला

केंद्र सरकार को 2026-27 में बैंकों से 3.16 लाख करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है। 4.3% राजकोषीय घाटा पूरा करने के लिए 17.2 लाख करोड़ रुपये उधार लिए जाएंगे। बजट में विदेशी निवेश, कॉरपोरेट और नगरपालिका बॉन्ड बाजार को मजबूत करने के प्रस्ताव हैं।

Manali Rastogi( विद इनपुट्स फ्रॉम भाषा)
पब्लिश्ड2 Feb 2026, 09:28 AM IST
भारतीय रिजर्व बैंक से होगी कमाई, फिर भी कर्ज लेगी सरकार, विस्तार से जानिए क्या है पूरा मामला
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केंद्र सरकार को वित्त वर्ष 2026-27 में भारतीय रिजर्व बैंक, राष्ट्रीयकृत बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों से लाभांश व अधिशेष के रूप में लगभग 3.16 लाख करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है। यह चालू वित्त वर्ष की तुलना में करीब 3.75% अधिक है।

संशोधित अनुमान के अनुसार, मौजूदा वर्ष में सरकार को लगभग 3.05 लाख करोड़ रुपये मिलने की संभावना है, जबकि फरवरी 2025 के बजट में यह आंकड़ा 2.56 लाख करोड़ रुपये रखा गया था।

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बजट दस्तावेजों के मुताबिक, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और अन्य निवेशों से मिलने वाला लाभांश अगले वर्ष 75,000 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो चालू वित्त वर्ष में 71,000 करोड़ रुपये था।

सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 में 4.3% के अनुमानित राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिए कुल 17.2 लाख करोड़ रुपये उधार लेने की योजना बनाई है। इससे पहले, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सकल उधारी का अनुमान 14.80 लाख करोड़ रुपये रखा गया था। सरकार यह कर्ज मुख्य रूप से बाजार से लेती है।

बजट पेश करते समय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि प्रतिभूतियों के जरिए शुद्ध बाजार उधारी 11.7 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जबकि बाकी जरूरतें लघु बचत और अन्य स्रोतों से पूरी की जाएंगी। कुल सकल बाजार उधारी 17.2 लाख करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है।

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कर्ज की राशि अधिक दिखने पर आर्थिक मामलों की सचिव अनुराधा ठाकुर ने स्पष्ट किया कि शुद्ध बाजार उधारी लगभग 11.73 लाख करोड़ रुपये है, जो पिछले कुछ वर्षों के स्तर के आसपास ही है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष सरकार को 5.5 लाख करोड़ रुपये पुराने कर्ज के रूप में चुकाने हैं, इसलिए कुल आंकड़ा बड़ा दिख रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रतिभूतियों की पुनर्खरीद और अदला-बदली का उद्देश्य सरकार पर कर्ज चुकाने का दबाव कम करना, एक साथ बड़ी रकम के भुगतान से बचना और ब्याज लागत को नियंत्रित करना है। सरकार ने इस साल अधिक ब्याज वाली प्रतिभूतियों की अदला-बदली की है और आगे भी स्थिति के अनुसार निर्णय लिए जाएंगे।

बजट के बाद मीडिया से बातचीत में वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों के राजकोषीय प्रबंधन पर नजर रख रही है और उनके कर्ज की स्थिति की समीक्षा कर रही है। उन्होंने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 293(3) के तहत केंद्र को राज्यों के ऋण पर निगरानी रखनी होती है। हालांकि केंद्र राज्यों को पूरी तरह नियंत्रित नहीं कर सकता, लेकिन यदि वे वित्तीय जिम्मेदारी और बजट प्रबंधन (FRBM) कानून की सीमा से बाहर जाते हैं तो उस पर ध्यान दिया जाता है।

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बजट भाषण में सीतारमण ने विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए विदेशी मुद्रा प्रबंधन (गैर-ऋण साधन) नियमों की व्यापक समीक्षा का प्रस्ताव रखा, ताकि व्यवस्था को अधिक आधुनिक और निवेश के अनुकूल बनाया जा सके।

कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार को मजबूत करने के लिए उन्होंने बॉन्ड सूचकांकों से जुड़े फंड और डेरिवेटिव्स तक बेहतर पहुंच की रूपरेखा पेश करने की बात कही। इसके अलावा, कॉरपोरेट बॉन्ड पर कुल प्रतिफल स्वैप शुरू करने का भी प्रस्ताव रखा गया।

नगरपालिका बॉन्ड को प्रोत्साहित करने के लिए बड़े शहरों को 1,000 करोड़ रुपये से अधिक के बॉन्ड जारी करने पर 100 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव है। वहीं, अमृत योजना के तहत 200 करोड़ रुपये तक के बॉन्ड जारी करने पर छोटे और मध्यम शहरों को पहले की तरह समर्थन मिलता रहेगा।

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