Credit Report Status: अक्सर हम सोचते हैं कि अगर हमने बैंक का लोन नहीं चुकाया और बैंक ने हमें परेशान करना बंद कर दिया है, तो मामला खत्म हो गया। लेकिन असल खेल तो आपकी CIBIL रिपोर्ट में चल रहा होता है। अगर आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में Written Off शब्द जुड़ गया है, तो समझ लीजिए कि भविष्य में आपके लिए बैंक के दरवाजे लगभग बंद हो चुके हैं।
क्या होता है 'Written Off' का मतलब?
जब कोई व्यक्ति लगातार 180 दिनों (6 महीने) तक अपने लोन की EMI या क्रेडिट कार्ड का बिल नहीं भरता, तो बैंक उसे 'डिफॉल्टर' मान लेता है। बैंक को जब लगता है कि अब इस पैसे की रिकवरी होना मुश्किल है, तो वो उस रकम को अपने फायदे-नुकसान के रजिस्टर (Balance Sheet) से हटा देता है ताकि उसका टैक्स बच सके। इसे ही बैंकिंग की भाषा में 'Written Off' या 'बट्टे खाते में डालना' कहते हैं। काफी लोग सोचते हैं कि 'रिटन ऑफ' का मतलब लोन माफी है, लेकिन ये सच नहीं है।
Written Off का क्या होता है असर?
अगर आपकी क्रेडिट प्रोफाइल पर Written Off लिखा है, तो कोई भी नया बैंक आपकी रिपोर्ट देखते ही लोन एप्लीकेशन रिजेक्ट कर देगा। उनके लिए आप एक 'हाइ-रिस्क' कस्टमर बन जाते हैं। ये स्टेटस आपके सिबिल स्कोर को 300-400 पॉइंट तक नीचे गिरा सकता है। आजकल कई बड़ी कंपनियां और कुछ देशों के वीजा अधिकारी भी आपकी फाइनेंशियल हिस्ट्री चेक करते हैं। Written Off वहां आपकी इमेज खराब कर सकता है।