Union Budget 2026: इनकम टैक्स के नियम को ऐसे ही इतना जटिल नहीं माना जाता है। इसमें लागू होने प्रावधानों को बिना एक्सपर्ट के समझना आसान नहीं होताहै। अब आप गिफ्ट के नियम ही ले लीजिए। इनकम टैक्स के इस नियम के तहत अगर एक पिता अपने बेटे को संपत्ति तोहफे में देता है तो उस पर टैक्स नहीं लगेगा, जबकि बहु को वही पैसा दिया जाए तो उस पर टैक्स की देनदारी बनेगी। दरअसल, यह नियम, जिसे असल में टैक्स चोरी रोकने के लिए बनाया गया था, अब पुराना हो गया है और कुछ मामलों में यह उल्टा असर भी डाल सकता है। ऐसे में बहुत से टैक्सपेयर्स को उम्मीद है कि इस बार के बजट 2026 में इस नियम में सुधार किया जा सकता है।
एक सांस्कृतिक प्रथा और टैक्स की पेचीदगी
गिफ्ट देना भारतीय पारिवारिक संस्कृति का एक अहम हिस्सा है। जब परिवार में कोई नया सदस्य आता है, खासकर बहू, तो अक्सर गहने, सोना, पैसे, प्रॉपर्टी, गाड़ियां और दूसरी कीमती चीजें गिफ्ट में दी जाती हैं। परंपरा के अनुसार, शादी, सालगिरह, बच्चे के जन्म और परिवार के दूसरे खास मौकों पर गिफ्ट दिए जाते हैं। ये प्यार, स्नेह, परंपरा और सांस्कृतिक निरंतरता की अभिव्यक्ति हैं। इनकम-टैक्स एक्ट, 1961 (“पुराना एक्ट”) की धारा 56(2)(x) और इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 (“नया एक्ट”) की धारा 92(3) के तहत शादी के मौके पर मिले गिफ्ट टैक्स फ्री होते हैं। इसमें रिश्ता चाहे जो हो और गिफ्ट की कीमत चाहे जितनी हो।
कीमत पर कोई लिमिट नहीं है। यह दिक्कत ससुराल वालों की ओर से तोहफा देते समय नहीं आती, बल्कि तब आती है जब तोहफ़े में मिली संपत्ति से इनकम जेनरेट होती है। यहीं पर कई टैक्सपेयर्स खासतौर से बुज़ुर्ग माता-पिता अनजाने में टैक्सेशन की दिक्कतों में फंस जाते हैं।
कब लगेगा टैक्स
अगर पिता की ओर से बेटे या बहु को सिर्फ खर्च के लिए पैसा दिया गया है तो इस पर क्लबिंग का नियम लागू होगा। इसका मतलब है कि इस राशि को देने वाले की कमाई के साथ जोड़ दिया जाएगा। सरकार ने इनकम क्लबिंग का नियम इसलिए लागू किया है, क्योंकि बहुत से लोग टैक्स बचाने के लिए अपनी इनकम को परिवार के अन्य सदस्यों को ट्रांसफर कर देते हैं। ऐसे मामले में सरकार ने इनकम क्लबिंग का रूल लागू कर दिया है। इसके अलावा अगर गिफ्ट में दिए गए पैसों से कोई इनकम होती है तो उस इनकम की राशि पर भी टैक्स लगाया जाएगा।
इस प्रावधान में सुधार की ज़रूरत क्यों है
बहू को दिए जाने वाले गिफ़्ट के लिए क्लबिंग का प्रावधान दशकों पहले पुराने कानून के तहत शुरू किया गया था, उस समय टैक्स दरें बहुत ज़्यादा और प्रोग्रेसिव थीं। महिलाओं के पास अक्सर स्वतंत्र वित्तीय स्थिति नहीं होती थी। संयुक्त परिवार कॉमन फाइनेंशियल पूल से चलते थे। गिफ्ट का इस्तेमाल इनकम को ट्रांसफर करने और टैक्स लायबिलिटी को कम करने के लिए किया जा सकता था।