बजट 2026: छोटे फर्मों की GST के नियमों पर क्या हैं उम्मीदें? सरकार कर सकती है यह बड़ा ऐलान

Union Budget 2026: अमेरिकी टैरिफ की वजह से छोटे कारोबारियों पर काफी असर पड़ा है। ऐसे में कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार यूनियन बजट 2026 में छोटे बिज़नेस के लिए गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स (GST) कंप्लायंस का बोझ कम करने पर विचार कर रही है।

Jitendra Singh( विद इनपुट्स फ्रॉम लाइवमिंट.कॉम)
अपडेटेड22 Dec 2025, 09:27 PM IST
Union Budget 2026: नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 8% बढ़कर 17.05 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
Union Budget 2026: नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 8% बढ़कर 17.05 लाख करोड़ रुपये हो गया है।

Union Budget 2026: Budget 2026 की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। वित्त मंत्रालय ने इस पर अपनी तैयारी भी शुरू कर दी है। केंद्र सरकार ने सितंबर महीने में जीएसटी स्लैब में कटौती भी की थी। इसके बाद अब केंद्र सरकार फिर से जीएसटी के मामले में छोटे कारोबारियों को बड़ा तोहफा दे सकती है। इस मामले से जुड़े दो लोगों ने कहा कि सरकार अगले फाइनेंशियल ईयर के लिए यूनियन बजट में छोटे बिज़नेस के लिए गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स (GST) कंप्लायंस का बोझ कम करने पर विचार कर रही है। कहा जा रहा है कि अमेरिकी टैरिफ की वजह से छोटे कारोबारियों पर काफी असर पड़ा है।

नाम न छापने की शर्त पर एक शख्स ने कहा कि माइक्रो-एंटरप्राइजेज को मौजूदा मासिक टैक्स पेमेंट के बजाय तिमाही GST पेमेंट की इजाज़त दी जा सती है। माइक्रो एंटरप्राइजेज ऐसे बिजनेस होते हैं जिनका सालाना टर्नओवर 10 करोड़ तक होता है। वहीं एक दूसरे शख्स ने कहा कि माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) को गलत या देरी से फाइलिंग के मामले में पहले चेतावनी दी जा सकती है।

लेट फीस का है प्रावधान

बता दें कि मौजूदा समय में CGST एक्ट के सेक्शन 47 के तहत, GSTR-1, GSTR-3B, या GSTR-9 फाइल करने में देरी पर लेट फीस लगती है। यह रोजाना बढ़ती रहती है जब तक कि यह मैक्सिमम लिमिट तक न पहुंच जाए। अगर पेमेंट में देरी होती है, तो एंटरप्राइज को बकाया GST अमाउंट पर सालाना 18% की दर से इंटरेस्ट भी देना होता है। भारत के 7.3 करोड़ MSMEs का GDP में 30 फीसदी और कुल एक्सपोर्ट में 45 फीसदी योगदान है। जब छोटे बिज़नेस 50% के भारी US टैरिफ से प्रभावित हुए हैं।

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बढ़ जाती है कंप्लायंस कॉस्ट

इंडस्ट्री लॉबी इंडिया SME फोरम के प्रेसिडेंट विनोद कुमार ने कहा कि टैक्स फाइल करने और टैक्स से जुड़े दूसरे कंप्लायंस में बहुत समय लगता है। कई बार इन ज़रूरतों को पूरा करने के लिए अलग से लोगों की जरूरत होती है। एक माइक्रो एंटरप्राइज के लिए जिसके पास ज़्यादा पैसा नहीं है और ज़्यादा मैनपावर नहीं है, यह बहुत बड़ी परेशानी है। कई बार कंप्लायंस कॉस्ट एक माइक्रो एंटरप्राइज के टर्नओवर का लगभग 6-8% होती है। वहीं जानकारों का कहना है कि GST सिस्टम में एक कंपोजिशन स्कीम भी है।

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यह एक आसान, ऑप्शनल टैक्स कंप्लायंस सिस्टम है जिसमें कोई टैक्स लायबिलिटी और रिटर्न फाइलिंग की ज़रूरत नहीं होती। हालांकि, इसमें इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिलता। लिहाजा इसका पालन करने वाले लोग बहुत कम हैं। वहीं GST रेट में कटौती से रेवेन्यू में बढ़ोतरी पर असर पड़ा है, इसलिए प्रस्तावित छूट इस बात के कॉस्ट-बेनिफिट एनालिसिस पर निर्भर करेगी कि कितने बिज़नेस को इससे फायदा होगा और रेवेन्यू पर कम से कम असर पड़ेगा।

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नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में 8% उछाल

देश का नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन इस वित्तीय वर्ष में अब तक 8% बढ़कर 17.05 लाख करोड़ रुपये हो गया है। यह बढ़ोतरी कॉर्पोरेट टैक्स में लगातार वृद्धि और कम रिफंड की वजह से हुई है। इनकम टैक्स विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 1 अप्रैल से 17 दिसंबर 2025 तक नेट कलेक्शन 17,04,725 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 15,78,433 करोड़ रुपये था। कुल डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में 4.16% की सालाना बढ़ोतरी हुई और यह 20,01,794 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

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