
बजट 2026 में पर्यटन को भारत की रोजगार और आर्थिक विकास रणनीति के केंद्र में रखा गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कई बड़े कदमों की घोषणा की है, जिनका मकसद देश में पर्यटन के अनुभव, ढांचे और रोजगार के अवसरों को बेहतर बनाना है। हजारों टूरिस्ट गाइड्स को प्रशिक्षण देने, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी की स्थापना और टीसीएस में बड़ी कटौती जैसे फैसलों से यह साफ है कि सरकार पर्यटन को अधिक संगठित, पेशेवर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना चाहती है।
इस बजट में केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाने पर नहीं, बल्कि लंबे समय में मूल्य सृजन पर जोर दिया गया है। विरासत स्थलों का विकास, उत्तर-पूर्व में बौद्ध सर्किट, मेडिकल टूरिज़्म हब, इको-ट्रेल्स, पर्वतीय ट्रेनें और एस्ट्रो-टूरिज़्म जैसी योजनाएं यह दिखाती हैं कि सरकार अनुभव-आधारित और संतुलित क्षेत्रीय पर्यटन को बढ़ावा देना चाहती है।
सांस्कृतिक धरोहरों की डिजिटल मैपिंग और लक्षित स्किलिंग कार्यक्रमों के साथ बजट 2026 पर्यटन को एक मजबूत आर्थिक इंजन के रूप में पेश करता है, जो रोजगार भी पैदा करेगा और दुनिया को भारत की विविधता भी दिखाएगा।
बजट 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत को मेडिकल वैल्यू टूरिज़्म का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की। इसके तहत निजी क्षेत्र की भागीदारी से पाँच क्षेत्रीय मेडिकल टूरिज़्म हब स्थापित करने के लिए राज्यों को सरकारी समर्थन दिया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य ऐसे बड़े और एकीकृत हेल्थकेयर केंद्र बनाना है, जो अंतरराष्ट्रीय मरीजों को आकर्षित करें और साथ ही देश की स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूत करें।
ये मेडिकल हब आधुनिक अस्पताल, जांच सेवाएं, इलाज के बाद देखभाल, पुनर्वास सेवाएं और आयुष प्रणालियों को एक ही परिसर में जोड़ेंगे। इससे विदेशी मुद्रा आय और भारत की वैश्विक छवि को तो फायदा होगा ही, साथ ही डॉक्टरों, नर्सों, एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स, तकनीशियनों और सहायक स्टाफ के लिए बड़े पैमाने पर रोज़गार के अवसर भी बनेंगे। इस तरह स्वास्थ्य क्षेत्र को भी आर्थिक और रोजगार वृद्धि का साधन बनाया जाएगा।
वित्त मंत्री ने कहा, “भारत को मेडिकल टूरिज़्म सेवाओं का केंद्र बनाने के लिए मैं निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी में राज्यों को पाँच क्षेत्रीय मेडिकल हब स्थापित करने में सहायता देने की योजना शुरू करने का प्रस्ताव रखती हूं।”
1. राष्ट्रीय आतिथ्य संस्थान (National Institute of Hospitality): पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र में पेशेवर शिक्षा और नेतृत्व को मज़बूत करने के लिए एक समर्पित राष्ट्रीय संस्थान स्थापित किया जाएगा।
2. 10,000 टूरिस्ट गाइड्स का प्रशिक्षण: आईआईएम के साथ साझेदारी में 12 हफ्तों का पायलट कार्यक्रम शुरू किया जाएगा, जिसके तहत 20 प्रमुख पर्यटन स्थलों पर 10,000 गाइड्स को प्रशिक्षित किया जाएगा।
3. पर्यटन के लिए डिजिटल नॉलेज ग्रिड: भारत के सांस्कृतिक, विरासत और पर्यटन स्थलों की डिजिटल मैपिंग के लिए एक डिजिटल नॉलेज ग्रिड तैयार की जाएगी।
4. यात्रा पर टीसीएस में बड़ी कटौती: विदेशी टूर पैकेज पर टीसीएस को 20% तक से घटाकर 2% कर दिया गया है, जिससे यात्रियों और ट्रैवल इंडस्ट्री को राहत मिलेगी।
5. उत्तर-पूर्व में बौद्ध सर्किट: अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मिज़ोरम, सिक्किम और त्रिपुरा में बौद्ध सर्किट विकसित किए जाएंगे, जिनमें मठों का संरक्षण, तीर्थ केंद्र और कनेक्टिविटी शामिल होगी।
6. 15 पुरातात्विक स्थलों का विकास: धोलावीरा, राखीगढ़ी और सारनाथ जैसे प्राचीन स्थलों को अनुभव-आधारित सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
7. मेडिकल टूरिज़्म हब: राज्यों को 5 क्षेत्रीय मेडिकल टूरिज़्म हब स्थापित करने के लिए सहायता दी जाएगी, जिनमें अस्पताल, डायग्नोस्टिक्स, आयुष और पुनर्वास सुविधाएं होंगी।
8. पर्यटन के लिए पर्वतीय ट्रेनें: उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में विशेष पर्वतीय ट्रेनें चलाई जाएंगी, जिससे सुंदर रेल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
9. बर्ड-वॉचिंग और नेचर ट्रेल्स: बर्ड-वॉचिंग ट्रेनें, ट्रेकिंग रूट्स और टर्टल ट्रेल्स जैसी पहल से इको और वन्यजीव पर्यटन को बढ़ाया जाएगा।
10. एस्ट्रो-टूरिज़्म को बढ़ावा: मुख्य स्थानों पर टेलिस्कोप को अपग्रेड किया जाएगा, ताकि नाइट-स्काई और विज्ञान आधारित पर्यटन को बढ़ाया जा सके।
Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.