
SEBI rules for multi asset funds: अगर आपने यूनियन मल्टी एसेट एलोकेशन फंड में पैसा लगाया है, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है। म्यूचुअल फंड हाउस ने अपनी इस स्कीम की कुछ प्रमुख विशेषताओं में बदलाव करने का फैसला किया है। यह बदलाव एसेट एलोकेशन यानी पैसा कहां और कितना लगेगा, इससे जुड़ा है। फंड हाउस ने इसके लिए सेबी के नियमों का हवाला दिया है।
यूनियन मल्टी एसेट एलोकेशन फंड इक्विटी और डेट के साथ-साथ गोल्ड और सिल्वर में भी निवेश करता है। पहले के नियमों के मुताबिक, स्कीम को गोल्ड ETF में कम से कम 10% और ज्यादा से ज्यादा 25% पैसा लगाना अनिवार्य था। वहीं, सिल्वर ETF में अधिकतम 10% निवेश की ही अनुमति थी।
अब इसमें बदलाव कर दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत, गोल्ड, सिल्वर, कमोडिटी ईटीएफ और ETCDs के लिए एक कंबाइंड एलोकेशन लिमिट तय की जाएगी। इसमें कमोडिटी निवेश के वे अन्य तरीके भी शामिल होंगे, जिनकी अनुमति सेबी (SEBI) समय-समय पर देता है। यानी अब अलग-अलग लिमिट के बजाय एक समग्र सीमा के भीतर निवेश होगा।
फंड हाउस का मानना है कि इस बदलाव से स्कीम को मैनेज करना ज्यादा आसान होगा। इसका मुख्य उद्देश्य बाजार के रुझानों का सही फायदा उठाना है। अलग-अलग कमोडिटीज में समय-समय पर तेजी और मंदी आती रहती है। नए नियमों से फंड मैनेजर्स इन साइकिल को ज्यादा कुशलता से कैप्चर कर पाएंगे। इससे पोर्टफोलियो को बैलेंस करने और बेहतर रिटर्न जनरेट करने में मदद मिलेगी।
यह बदलाव स्कीम के मौलिक गुणों में परिवर्तन माना जा रहा है। यह नया नियम 20 जनवरी, 2026 से प्रभावी होगा। यानी इस तारीख से फंड मैनेजर्स नई रणनीति के हिसाब से पोर्टफोलियो में बदलाव करेंगे।
निवेशकों के पास निकलने का मौका चूंकि यह स्कीम के बुनियादी ढांचे में बदलाव है, इसलिए फंड हाउस ने निवेशकों को एग्जिट का विकल्प दिया है। जो यूनिट होल्डर्स इस बदलाव से सहमत नहीं हैं, वे स्कीम से बाहर निकल सकते हैं। इसके लिए 19 दिसंबर, 2025 से 19 जनवरी, 2026 तक का समय दिया गया है। इस दौरान अगर आप अपने पैसे रिडीम (निकालते) करते हैं या यूनियन म्यूचुअल फंड की किसी दूसरी स्कीम में स्विच करते हैं, तो आपसे कोई एग्जिट लोड नहीं लिया जाएगा।
बाजार के रुझान का बेहतर फायदा: नई कंबाइंड लिमिट से फंड मैनेजर, गोल्ड और सिल्वर सहित अन्य कमोडिटीज में आने वाली तेजी और मंदी का ज्यादा कुशलता से फायदा उठा पाएंगे, जिससे रिटर्न बढ़ने की उम्मीद है।
निवेश में लचीलापन: फंड मैनेजरों को अब गोल्ड और सिल्वर में अलग-अलग न्यूनतम/अधिकतम सीमा के बंधन से मुक्ति मिलेगी। वे बाजार की बदलती परिस्थितियों के हिसाब से एसेट एलोकेशन में तुरंत बदलाव कर सकेंगे।
फ्री एग्जिट का मौका: जिन यूनिट धारकों को यह बदलाव पसंद नहीं है, उन्हें 19 जनवरी, 2026 तक बिना किसी एग्जिट लोड के अपने पूरे निवेश को निकालने या किसी अन्य यूनियन म्यूचुअल फंड स्कीम में ट्रांसफर करने का मौका मिल रहा है।
एसेट एलोकेशन की अनिश्चितता: चूंकि गोल्ड/सिल्वर के लिए अब कोई फिक्स्ड (निश्चित) न्यूनतम आवंटन नहीं है, इसलिए निवेशकों को यह जानने में मुश्किल होगी कि उनके पोर्टफोलियो में इन सुरक्षित एसेट्स का कितना हिस्सा होगा।
स्कीम के मूल चरित्र में बदलाव: यह स्कीम के मूलभूत गुणों में परिवर्तन है। जिन निवेशकों ने स्कीम को इसके पिछले एसेट एलोकेशन स्ट्रक्चर (गोल्ड में न्यूनतम 10% निवेश) को देखकर चुना था, उनके लिए यह अब अलग स्कीम बन जाएगी।
Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के लिए है। निवेश करने से पहले किसी प्रमाणित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। मिंट हिंदी आपके किसी भी निर्णय और उसके परिणाम के लिए तनिक भी उत्तरदायी नहीं है।
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