
PTMS Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश के शहरों में रहने वाले लोगों के लिए प्रॉपर्टी टैक्स और संपत्ति के रिकॉर्ड को लेकर एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य सरकार एक नया 'प्रॉपर्टी टैक्स मैनेजमेंट सिस्टम' (PTMS) लागू कर रही है। इसके तहत हर घर, दुकान और दफ्तर की अपनी एक खास 16 अंकों की पहचान होगी। इसकी शुरुआत लखनऊ नगर निगम से हो रही है और जल्द ही इसे पूरे प्रदेश के नगर निगमों में लागू कर दिया जाएगा। आइए जानते हैं कि यह नया सिस्टम आपके लिए कैसे काम करेगा और इसके क्या फायदे हैं।
स्क्वायर यार्ड्स के सेल्स डायरेक्टर रवि निरवाल के अनुसार, यह 16 अंकों वाला सिस्टम सिर्फ लखनऊ तक सीमित नहीं रहेगा। यूपी के सभी नगर निगम अपने अधिकार क्षेत्र की संपत्तियों के लिए स्मार्ट नंबर प्लेट जारी करेंगे। लखनऊ उन शुरुआती शहरों में शामिल है जहां इसका असर दिखने लगा है। दरअसल, यह यूपी सरकार के शहरी प्रशासन को डिजिटल बनाने की एक बड़ी योजना का हिस्सा है।
यह सिस्टम संपत्तियों के टैक्स असेसमेंट, कलेक्शन और बकाये का पूरा हिसाब-किताब रखेगा। रवि निरवाल बताते हैं कि पहले जमीनों के रिकॉर्ड अलग-अलग विभागों में अलग-अलग तरह से रखे जाते थे। इससे डेटा में गड़बड़ी और वेरिफिकेशन में काफी दिक्कत आती थी। अब एक ही डिजिटल डेटाबेस होने से रिकॉर्ड को मैनेज करना और क्रॉस-चेक करना बहुत आसान हो जाएगा।
इस नए सिस्टम की सबसे खास बात यह है कि आपके घर या दुकान के बाहर एक नंबर प्लेट लगाई जाएगी। इस प्लेट में एक स्मार्ट चिप होगी जिसमें आपकी प्रॉपर्टी से जुड़ा सारा डेटा सेव होगा। अधिकारियों को बस अपनी मशीन या सिस्टम में इस आईडी को डालना होगा और संपत्ति का पूरा इतिहास सामने आ जाएगा। इससे बार-बार नगर निगम के चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट में सिंघानिया एंड कंपनी की पार्टनर तुसी कुमार बताती हैं कि इस सिस्टम के तहत सभी संपत्तियों को गूगल मैप पर अपलोड किया जाएगा। इसका मतलब है कि आप ऑनलाइन ही अपने घर की लोकेशन और उससे जुड़े टैक्स की जानकारी देख सकेंगे। यह व्यवस्था सहारनपुर और बरेली जैसे शहरों में भी शुरू की जा रही है।
इस डिजिटल आईडी के आने से सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि फर्जीवाड़े रुकेंगे। तुसी कुमार के मुताबिक ये प्रमुख चार सुविधाएं मिलेंगी।
1. सुरक्षित मालिकाना हक: यूनिक आईडी की वजह से भू-माफिया के लिए सरकारी या विवादित जमीन पर कब्जा करना मुश्किल होगा।
2. एक क्लिक पर जानकारी: कोई भी नागरिक घर बैठे जमीन का इतिहास, मालिकाना हक और विवाद की स्थिति जान सकेगा।
3. बैंक लोन में आसानी: 'विरासत' जैसी योजनाओं से जुड़े होने के कारण यह आईडी मालिकाना हक का पुख्ता सबूत होगी, जिससे बैंक लोन लेना सरल हो जाएगा।
4. भ्रष्टाचार में कमी: ऑनलाइन सिस्टम होने से सरकारी दफ्तरों में बाबूओं पर निर्भरता कम होगी, जिससे रिश्वतखोरी पर लगाम लगेगी।
ईटी की रिपोर्ट के लीगम सोलिस के संस्थापक शशांक अग्रवाल के हवाले से कहा गया है कि यह लंबी अवधि में प्रॉपर्टी रिकॉर्ड को बेहतर बनाने में मदद करेगा। यह सिस्टम स्मार्ट सिटी कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से जुड़ा होगा। इससे अधिकारियों को रियल टाइम में पता चलेगा कि किस इलाके से कितना टैक्स आया और कहां बकाया है। इससे शहरी सुविधाएं जैसे पानी, बिजली और कूड़ा प्रबंधन को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
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