UP Rental Housing Policy 2026: उत्तर प्रदेश में रोजगार की तलाश में बड़े शहरों का रुख करने वाले श्रमिकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती रहने की होती है। महंगा किराया कार्य स्थल से दूर नहीं रह पाते हैं। सीमित आय होने की वजह से उन्हें कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। अब इसी समस्या के समाधान के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। किफायती किराया आवास नीति को औद्योगिक विकास विभाग में लागू करने का निर्णय लिया गया है। इससे श्रमिकों को उनके कार्यस्थल के पास ही कम किराए पर घर मुहैया कराया जा सकेगा।
इस महत्वाकांक्षी योजना को जमीन में उतारने के लिए औद्योगिक विकास विभाग, आवास विकास और नगर नियोजन विभागों के बीच उच्च स्तरीय सहमति बन चुकी है। इससे अब शहरों में मजदूरी करने वाले लोगों को बेहद सस्ती दरों पर मासिक किराए वाले मकान मिल सकेंगे। इस नई नीति के तहत अब कार्य स्थल के आसापास ही श्रमिकों के लिए रहने की व्यवस्था की जाएगी। विभाग ने यह अनिवार्य किया है कि उद्योगों के लिए निर्धारित कुल जमीन के 30 फीसदी हिस्से पर श्रमिक आवासों का निर्माण किया जाएगा।
निजी डेवलपर्स को भी योजना से जोड़ा जाएगा
स्थानीय विकास प्राधिकरणों को भी अपने स्तर पर किफायती रेंटल कांप्लेक्स बनाने की जिम्मेदारी दी गई है. योजना पर तेजी से काम हो सके, इसके लिए निजी डेवलपर्स को भी इससे जोड़ा जाएगा। मिली जानकारी के मुताबिक, जो डेवलपर्स मजदूरों के लिए सस्ते किराए के घर बनाएंगे, उन्हें सरकार की ओर से लैंड यूज (भू-उपयोग), मानचित्र मंजूरी और डेवलपमेंट चार्ज में विशेष रियायतें दी जाएंगी।
1000 से 1500 रुपये तक हो सकता है किराया
इस योजना का सबसे अहम पहलू इसका किफायती किराया है। सूत्रों के अनुसार, इन आवासों का मासिक किराया करीब 1000 से 1500 रुपये के बीच रखा जा सकता है। मौजूदा समय में बड़े शहरों में एक कमरे का किराया 4 से 5 हजार रुपये तक पहुंच चुका है, जो कम आय वाले श्रमिकों के लिए भारी पड़ता है। ऐसे में यह योजना उनके लिए बड़ी राहत साबित होगी।
इन श्रमिकों को मिलेगा फायदा
इस योजना का लाभ मजदूरों के साथ-साथ वेंडर, पेंटर, प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन और अन्य कुशल और अकुशल श्रमिकों को मिलेगा। इन मकानों का आवंटन इस तरह किया जाएगा कि जब कोई श्रमिक शहर छोड़कर जाए, तो उसी मकान को किसी दूसरे जरूरतमंद को किराए पर दे दिया जाए। इससे आवास का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।
पीएम आवास योजना की नीति का विस्तार
राज्य सरकार पहले ही पीएम आवास योजना के तहत किफायती किराया आवास (ARH) नीति को मंजूरी दे चुकी है। अब इसे औद्योगिक विकास विभाग में लागू करने का निर्णय लिया गया है। इससे इस योजना का दायरा और प्रभाव दोनों बढ़ेंगे।
क्यों लिया गया ये फैसला?
हाल ही में नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में हुए प्रदर्शन के बाद इस योजना की अधिक जरूरत महसूस हुई। प्रदर्शन के दौरान फैक्ट्री कर्मचारियों ने कम वेतन और बेतहाशा बढ़ते किराए को लेकर भी अपनी नाराजगी दिखाई थी। घटना के बाद गठित ‘हाई पावर कमेटी’ ने भी श्रमिकों की बुनियादी सुविधाओं में सुधार की सख्त जरूरत बताई थी। ऐसे में सरकार का ये फैसला नोएडा, गाजियाबाद और लखनऊ में मजदूरों को बड़ी राहत दे सकता है।