10 साल में UPI का धमाका: 219 अरब ट्रांजैक्शन, वॉल्यूम में 12,000 गुना उछाल

10 Years of UPI: भारत का UPI सिस्टम पिछले 10 साल में तेजी से बढ़कर देश की डिजिटल पेमेंट रीढ़ बन गया है। वित्त वर्ष 2017 में जहां करीब 1.8 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए थे, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर करीब 219 अरब तक पहुंच गया है। यानी करीब 12,000 गुना की बढ़ोतरी हुई है।

Jitendra Singh
अपडेटेड10 Apr 2026, 08:09 PM IST
10 Years of UPI: UPI ने 10 साल में भारत के पेमेंट सिस्टम को बदल दिया है।
10 Years of UPI: UPI ने 10 साल में भारत के पेमेंट सिस्टम को बदल दिया है।

10 Years of UPI: आज के समय में लगभग हर कोई ऑनलाइन पेमेंट करना पसंद करता है। ऑनलाइन पेमेंट ने कई काम आसान कर दिए हैं, क्योंकि अब न तो बार-बार एटीएम जाकर कैश निकालने की झंझट होता है और न ही चेंज रखने की परेशानी। देश में ज्यादातर लोग पेमेंट के लिए यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) का इस्तेमाल करते हैं। भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) पिछले एक दशक में जिस तेजी से बढ़ा है, उसने देश में पैसे के लेनदेन का तरीका पूरी तरह बदल दिया है। शुरुआत में सीमित उपयोग वाला यह प्लेटफॉर्म आज आम लोगों से लेकर छोटे दुकानदारों और बड़े कारोबार तक की पहली पसंद बन चुका है।

बता दें कि यूनाइटेड पेमेंट्स इंटरफेस ( Unified Payments Interface - UPI) की शुरुआत 11 अप्रैल 2016 को हुई थी। इसे भारत में नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (National Payments Corporation of India - NPCI) ने लॉन्च किया था। इसे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (Reserve Bank of India - RBI) की निगरानी में बनाया गया था। बाद में, 2016 में ही BHIM ऐप लॉन्च होने के बाद UPI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा। आज UPI भारत में सबसे लोकप्रिय डिजिटल पेमेंट सिस्टम बन चुका है। 11 अप्रैल 2026 को UPI के 10 साल पूरे होने वाले हैं।

UPI ने पकड़ी रफ्तार

आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2017 में UPI के जरिए महज करीब 1.8 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए थे। उस समय यह सिस्टम शुरुआती दौर में था। यूजर्स भी इसके लिमिटेड थे। लेकिन जैसे-जैसे डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा मिला, स्मार्टफोन और इंटरनेट की पहुंच बढ़ी, UPI ने तेजी से रफ्तार पकड़ी। नोटबंदी के समय यूपीआई के जरिए पेटीएम ने तहलका मचा दिया।

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कोरोना महामारी के दौरान UPI का चलन और तेजी से बढ़ा। आज स्थिति यह है कि UPI के जरिए होने वाले ट्रांजैक्शन की संख्या बढ़कर करीब 219 अरब तक पहुंच गई है। इसका मतलब है कि एक दशक में ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में करीब 12,000 गुना की बढ़ोतरी हुई। इससे पता चलता है कि UPI चीते की रफ्तार से आगे बढ़ रहा है।

बड़े लेनदेन भी अब UPI से हो रहे हैं

एनालिटिक्स फर्म ट्रैक्सन के आंकड़ों के अनुसार, UPI के जरिए वित्त वर्ष 26 में 218.98 अरब लेनदेन हुए और इनकी वैल्यू 285 लाख करोड़ रुपए थी। वहीं, वित्त वर्ष 17 में यह आंकड़ा 1.786 करोड़ लेनदेन पर था और इनकी वैल्यू 6,952 करोड़ रुपये थी। शुरुआती वर्षों में लेनदेन धीरे-धीरे बढ़े और वित्त वर्ष 18 में 91.5 करोड़ और वित्त वर्ष 19 में 5.39 तक तक पहुंचे। फिर वित्त वर्ष 20 में यूपीआई मुख्यधारा में आया और 12.52 अरब लेनदेन के आंकड़े पर पहुंचा और इनकी वैल्यू 21 लाख करोड़ रुपये से अधिक थी। इससे साफ है कि छोटे भुगतान से शुरू हुआ यह प्लेटफॉर्म अब बड़े वित्तीय लेनदेन का भी अहम हिस्सा बन गया है।

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फिनटेक कंपनियों से UPI को लगे पंख

इस तेज वृद्धि के पीछे फिनटेक कंपनियों का भी बड़ा योगदान रहा है। PhonePe, Google Pay और Paytm जैसे प्लेटफॉर्म्स ने UPI को आम लोगों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। खासतौर पर PhonePe और Google Pay का बाजार में बड़ा हिस्सा है। ये दोनों के पास कुल ट्रांजैक्शन का बहुत बड़ा हिस्सा है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि UPI का इकोसिस्टम तेजी से बढ़ा जरूर है, लेकिन इसमें कुछ बड़े खिलाड़ियों का दबदबा बना हुआ है।

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UPI की सफलता का एक बड़ा कारण इसकी सरलता और कम लागत है। बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के तुरंत पैसे भेजने और प्राप्त करने की सुविधा ने इसे छोटे व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया है। QR कोड आधारित भुगतान ने छोटे दुकानदारों के लिए डिजिटल लेनदेन को आसान बना दिया है, जिससे नकद पर निर्भरता कम हुई है।

सात समंदर पार भी UPI का बजा डंका

यूपीआई अब ग्लोबल हो गया है। अब आप सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात, श्री लंका, फ्रांस, भूटान, नेपाल और मॉरिशस जैसे देशों में आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे में अब आप बिना कार्ड के विदेश में आसानी से शॉपिंग कर सकते हैं। कुल मिलाकर, पिछले 10 वर्षों में UPI ने भारत की अर्थव्यवस्था में डिजिटल बदलाव को नई दिशा दी है।

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अब आगे क्या है UPI की असली चुनौती, एक्सपर्ट्स की राय

जेनरेटिव एआई प्लेटफॉर्म ओरिसर्व के संस्थापक और सीईओ अनुराग जैन ने कहा, "UPI के 10 सालों में जबरदस्त बढ़त देखने को मिली है। 2026 में हर महीने 13–14 अरब से ज्यादा ट्रांजैक्शन हो रहे हैं, जो भारत के करीब 75% डिजिटल रिटेल पेमेंट्स का हिस्सा हैं। लेकिन अब बड़े शहरों में इसकी ग्रोथ थोड़ी धीमी पड़ रही है। असली समस्या पहुंच की नहीं, बल्कि इस्तेमाल की है। MDR लगभग नहीं है और कैशबैक जैसे फायदे भी कम हो गए हैं, जिससे यूजर्स और छोटे व्यापारियों को ज्यादा ट्रांजैक्शन करने की खास प्रेरणा नहीं मिलती। अब UPI को सिर्फ संख्या बढ़ाने से आगे बढ़कर वैल्यू बनाने पर ध्यान देना होगा, जैसे सही इंसेंटिव, बेहतर मर्चेंट कमाई और क्रेडिट से जुड़े नए फीचर्स।"

Plutos ONE के सीईओ और संस्थापक रोहित महाजन ने कहा, "10 साल पूरे होने पर UPI की ताकत खुद इसके आंकड़े दिखाते हैं। FY17 में जहां सिर्फ 1.8 करोड़ ट्रांजैक्शन होते थे, वहीं FY26 में यह बढ़कर 219 अरब हो गए, यानि 12,000 गुना बढ़ोतरी। इसी तरह, ट्रांजैक्शन की वैल्यू 7,000 करोड़ से बढ़कर लगभग 285 लाख करोड़ हो गई, जो 4,000 गुना की वृद्धि है। आज भारत रियल-टाइम पेमेंट्स में दुनिया के लिए एक उदाहरण बन चुका है। अब अगला कदम है ‘India Stack’ को दुनिया तक ले जाना। जैसे-जैसे UPI दूसरे देशों से जुड़ेगा और ट्रांजैक्शन बढ़ेंगे, वैसे-वैसे एक मजबूत और टिकाऊ बिजनेस मॉडल भी बनेगा। पहले 10 साल सबसे तेज और मजबूत सिस्टम बनाने के थे, और आने वाले 10 साल उन पर चलने वाली हाई-वैल्यू सेवाओं, जैसे इंटरनेशनल मनी ट्रांसफर और क्रेडिट, के होंगे।"

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