
मोबाइल पर कोई OTT प्लेटफॉर्म, म्यूजिक ऐप, AI टूल या क्लाउड स्टोरेज सर्विस इस्तेमाल करते समय अक्सर ऑफर दिखाई देता है। पहले कुछ दिन फ्री या सिर्फ ₹1 में ट्रायल। रकम छोटी होने के कारण यूजर बिना ज्यादा सोचे पेमेंट कर देता है। अगर ट्रायल के दौरान आपने UPI AutoPay mandate को भी मंजूरी दे दी, तो ट्रायल खत्म होने के बाद कंपनी तय शर्तों के मुताबिक recurring payment ले सकती है। यानी आपने सिर्फ ₹1 का ट्रायल नहीं लिया, बल्कि आगे की ऑटोमैटिक पेमेंट की अनुमति भी दी हो सकती है। हाल की रिपोर्टों में ऐसे मामलों को लेकर यूजर्स को सावधान किया गया है।
UPI AutoPay अपने आप में कोई फ्रॉड नहीं है। यह UPI की अधिकृत सुविधा है। समस्या तब पैदा होती है जब यूजर किसी पुराने mandate को भूल जाता है या उसे समय पर रद्द नहीं करता। सबसे बड़ा खतरा ₹79-99 जैसे छोटे डेबिट का रहता है। मान लीजिए किसी व्यक्ति के खाते से हर महीने ₹79 कट रहे हैं। पहली नजर में रकम बहुत छोटी लग सकती है। बैंक SMS आया, देखा और नजरअंदाज कर दिया। लेकिन अगर ऐसे चार-पांच छोटे subscription चालू हैं तो तस्वीर बदल जाती है।
मान लीजिए—
₹79 का एक subscription
₹99 का दूसरा
₹149 का तीसरा
₹199 का चौथा
₹299 का पांचवां
कुल खर्च ₹825 प्रति महीना हो गया।
यानी साल में ₹9,900।
यही वजह है कि छोटे recurring payments को नजरअंदाज करना महंगा पड़ सकता है। जुलाई 2026 में सामने आई एक घटना में एक यूजर ने अपनी मां के फोन में कई UPI AutoPay mandates देखे थे, जो पुराने free trials से जुड़े थे। इस घटना ने छोटे-छोटे recurring debits को लेकर फिर चर्चा छेड़ दी।
अगर आपने कोई ऐप डाउनलोड किया, subscription लिया और बाद में वह ऐप मोबाइल से डिलीट कर दिया, तो इसका मतलब यह नहीं है कि आपका UPI mandate भी खत्म हो गया। AutoPay एक अलग payment authorization हो सकता है। इसलिए subscription बंद करने के साथ UPI app में जाकर active mandate भी चेक करना जरूरी है। NPCI के अनुसार UPI AutoPay में ग्राहक अपने mandate को view, modify, pause, unpause और revoke कर सकता है।
अगर आप Google Pay इस्तेमाल करते हैं तो अपने फोन में Google Pay खोलें।
इसके बाद-
Profile Photo → Autopay → Live
यहां आपको एक्टिव mandates दिखाई दे सकते हैं। किसी mandate पर टैप करके उसकी रकम, frequency और दूसरी details देखी जा सकती हैं।
अगर कोई ऐसा mandate दिखाई दे जिसे आप आगे नहीं चलाना चाहते, तो Cancel Autopay का विकल्प इस्तेमाल किया जा सकता है। Google Pay के मुताबिक cancellation की पुष्टि के लिए UPI PIN डालना होता है। अगर AutoPay का विकल्प दिखाई नहीं दे रहा है तो ऐप को अपडेट करना भी जरूरी हो सकता है।
Paytm इस्तेमाल करने वालों के लिए भी AutoPay/mandate को चेक करने का विकल्प मौजूद है। Paytm के अनुसार Active Mandates में जाकर संबंधित subscription को चुनकर Cancel किया जा सकता है। दूसरे UPI mandates के लिए भी ऐप में Mandates/Autopay सेक्शन में जाकर active mandate को cancel या revoke करने का विकल्प मिलता है। यहां भी cancel करने के बाद status जरूर चेक करें, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि mandate वास्तव में बंद हुआ है।
UPI AutoPay का मतलब यह नहीं है कि पैसा बिना किसी जानकारी के हमेशा अचानक कट जाएगा। NPCI के अनुसार ग्राहकों को AutoPay execution से कम से कम 24 घंटे पहले Pre-Debit Notification दिया जाता है। हालांकि कुछ Auto-replenishment मामलों में यह notification लागू नहीं होता। इसलिए बैंक SMS, UPI notification और email को नजरअंदाज करना महंगा पड़ सकता है। अगर कोई ऐसा debit notification आता है जिसे आप पहचानते नहीं हैं, तो तुरंत संबंधित mandate की details जांचें।
जब आप किसी वेबसाइट या ऐप पर UPI AutoPay चुनते हैं, तो merchant की तरफ से आपके UPI app पर mandate request आ सकती है। आप उसे approve करते हैं और UPI PIN से authentication करते हैं। इसके बाद तय नियमों के अनुसार भविष्य की recurring payment अपने-आप हो सकती है। Google Pay भी बताता है कि recurring payment के लिए frequency—जैसे weekly, monthly या yearly—सेट की जा सकती है। इसलिए किसी भी free trial को activate करते समय सिर्फ “ ₹1” या “Free” देखकर आगे न बढ़ें। नीचे लिखी हुई Auto Renewal, Recurring Payment, Subscription और Mandate जैसी जानकारी भी पढ़ें।
UPI AutoPay का इस्तेमाल सिर्फ OTT subscription के लिए नहीं होता। NPCI के मुताबिक इसका इस्तेमाल मोबाइल बिल, बिजली बिल, EMI, OTT/entertainment subscription, इंश्योरेंस, म्यूचुअल फंड और अन्य recurring payments में हो सकता है। यानी आपके फोन में सिर्फ Netflix या कोई म्यूजिक ऐप ही नहीं, बल्कि दूसरी जरूरी financial commitments के mandates भी हो सकते हैं। इसलिए सभी active mandates की एक बार पूरी जांच करना बेहतर है।
अगर आप UPI का इस्तेमाल लगातार करते हैं तो महीने में सिर्फ 10 मिनट निकालकर अपने recurring payments चेक कर सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले UPI app में Autopay/Mandates सेक्शन खोलें। फिर हर mandate का नाम, रकम और frequency देखें। जो subscription इस्तेमाल नहीं करते, उसे बंद करें। जो subscription जरूरी है लेकिन कभी-कभार चाहिए, वहां pause का विकल्प उपलब्ध है या नहीं देखें।
और जिस mandate को पहचान नहीं पा रहे हैं, उसे बिना जांचे चालू न रहने दें। जरूरत पड़ने पर merchant या अपने बैंक/UPI app के support से जानकारी लें।
UPI AutoPay सुविधा का उद्देश्य recurring payments को आसान बनाना है। इसे देखकर हर automatic debit को “फ्रॉड” मानना सही नहीं है। अगर आपने mandate को मंजूरी दी है, तो debit अधिकृत हो सकता है। लेकिन अगर कोई mandate आपकी जानकारी में नहीं है या आप उसे आगे नहीं चलाना चाहते, तो उसकी details जांचकर उसे revoke/cancel करने की कार्रवाई करनी चाहिए।
जितेन्द्र सिंह ने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से B.Sc (भौतिक शास्त्र और रसायन शास्त्र) की डिग्री हासिल की है। इसके बाद साल 2007 में मुंबई के भारतीय विद्या भवन से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन रेडियो एंड टीवी जर्नलिजम में एक साल का डिप्लोमा कोर्स किया। कोर्स खत्म होते है मुंबई में CNBC आवाज चैनल में प्रशिक्षण का मौका मिला। इस चैनल में खबरों की दुनिया और बिजनेस पत्रकारिता क्या है, इस बारे में जानने का मौका मिला। फिर मुंबई के प्रतिष्ठित CTV में काम करने का मौका मिला। यहीं से मुंबई को बारीकी से समझने का मौका मिला। मुंबई के समाचारों से हटकर एंटरटेनमेंट की दुनिया में कलर्स चैनल में एंट्री मिली। यहां बहुत कुछ सीखने को मिला। यहीं सोनी एंटरटेनमेंट चैनल में काम करने का मौका मिला। सोनी में कौन बनेगा करोड़पति शो टीम के हिस्सा रहे। इसके साथ ही सोनी के अन्य बहुचर्चित शो जैसे क्राइम पट्रोल, आहट, कॉमेडी सर्कस जैसे शो की टीम का हिस्सा रहे। कई संस्थानों में फ्रीलांसिंग स्क्रिप्ट राइटिंग करते रहे। एंटरटनमेंट के बाद फिर से बिजनेस पत्रकारिता में एंट्री मिली और मनीकंट्रोल के साथ जुड़ गए। यहां मनीकंट्रोल में बिजनेस आइडिया जैसा कॉलम लगातार 7 साल तक लिखे। यहां पर्सनल फाइनेंस, राजनीति समाचार, ट्रेडिंग न्यूज, हेल्थ, इकोनॉमिक, जैसे कई कैटेगरी की खबरों पर कलम की घिसाई की। जितेंद्र सिंह उन चुनिंदा पत्रकारों की लिस्ट में शामिल हैं, जिन्होंने जनरल एंटरटेनमेंट चैनल (GEC) और न्यूज दोनों जगह काम किए हों। दरअसल, मुंबई एंटरटेनमेंट और बिजनेस दोनों है। लिहाजा वहां रहकर दोनों जगह काम करने का मौका मिला। पत्रकारिता में 18 साल से ज्यादा का अनुभव है। अब लाइव मिंट के मिंट हिंदी से जुड़कर काम कर रहे हैं। यहां हर विषय लिखने का क्रम जारी है।
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