
US Stock Investing From India: अगर आपने भारत से अमेरिका के शेयरों में निवेश किया है, तो यह एक बार जरूर जांच लेना चाहिए कि ये निवेश आपकी इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में सही तरीके से दिखाए गए हैं या नहीं। जैसे-जैसे विदेशी निवेश आम होता जा रहा है, वैसे-वैसे विदेशी संपत्तियों से जुड़ी टैक्स रिपोर्टिंग पर भी सख्ती बढ़ी है।
जो बातें पहले नजरअंदाज हो जाती थीं, अब वे आसानी से पकड़ में आ जाती हैं। यह कोई नई या चौंकाने वाली बात नहीं है, बल्कि सिर्फ यह सुनिश्चित करने की बात है कि जो जानकारियां भारतीय टैक्स कानून के तहत पहले से देनी जरूरी हैं, वे सही तरीके से दी गई हों।
ज्यादातर समस्याएं जटिल टैक्स नियमों की वजह से नहीं होतीं, बल्कि गलत धारणाओं के कारण होती हैं। कई निवेशक मानते हैं कि अगर US में बहुत छोटा निवेश है तो उसे बताने की जरूरत नहीं है, या फिर तब तक रिपोर्टिंग जरूरी नहीं होती जब तक मुनाफा न हो जाए।
कुछ लोग यह भी सोचते हैं कि जो डिविडेंड अपने आप दोबारा निवेश हो जाता है, वह बताने लायक इनकम नहीं है। ये धारणाएं काफी आम हैं, लेकिन गलत हैं। अगर आप भारतीय टैक्स के हिसाब से Resident and Ordinarily Resident (ROR) हैं, तो विदेशी संपत्तियों का खुलासा करना अनिवार्य है। इसका निवेश की रकम, मुनाफा-नुकसान, या पैसे निकाले गए या नहीं इन बातों से कोई संबंध नहीं है।
भारत को विदेशी वित्तीय संपत्तियों की जानकारी अंतरराष्ट्रीय डेटा-शेयरिंग सिस्टम जैसे FATCA और CRS के जरिए मिलती है। US ब्रोकर्स निवेशकों की जानकारी रिपोर्ट करते हैं, जो आगे चलकर भारतीय टैक्स विभाग तक पहुंचती है। इस डेटा की तुलना आपके ITR में दी गई जानकारी से की जाती है।
अगर किसी तीसरे स्रोत से मिली जानकारी ITR में नहीं दिखती, तो विभाग ईमेल या मैसेज भेजकर आपको अपनी फाइलिंग दोबारा देखने के लिए कह सकता है। आमतौर पर ये संदेश याद दिलाने के लिए होते हैं, न कि किसी गलत काम का आरोप लगाने के लिए।
विदेशी निवेश से जुड़ी जानकारी ITR के सिर्फ एक हिस्से में नहीं होती, बल्कि अलग-अलग शेड्यूल में दी जाती है।
2. US शेयर बेचने से हुआ मुनाफा या नुकसान को कैपिटल गेन के रूप में (बिल्कुल भारत के शेयरों की तरह)
अगर विदेश में कोई टैक्स नहीं कटा है, तो ये शेड्यूल जरूरी नहीं होंगे, लेकिन संपत्ति और इनकम का खुलासा फिर भी करना होगा।
अगर आपने अपनी मूल ITR में US शेयरों या अन्य विदेशी निवेश का खुलासा नहीं किया है, तो इसे सुधारने का तरीका है धारा 139(5) के तहत Revised Return दाखिल करना।
आमतौर पर ब्रोकर्स के टैक्स स्टेटमेंट से ही सारी जरूरी जानकारी मिल जाती है। पोर्टल का इंटरफेस समय के साथ थोड़ा बदल सकता है, लेकिन प्रक्रिया लगभग वही रहती है। सामान्य तौर पर Revised ITR संबंधित Assessment Year के 31 दिसंबर तक फाइल की जा सकती है, बशर्ते उससे पहले असेसमेंट पूरा न हुआ हो। उदाहरण के लिए, Assessment Year 2025–26 के लिए Revised Return की आखिरी तारीख आमतौर पर 31 दिसंबर 2025 होगी।
(डिस्क्लेमर: ये सलाह सामान्य जानकारी के लिए दी गई है। कोई फैसला लेने से पहले विशेषज्ञ से बात करें। मिंट हिंदी किसी भी परिणाम के लिए जिम्मेदार नहीं है।)
Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.