
Viral Video: महंगाई, बढ़ती प्रॉपर्टी कीमतें और बच्चों की परवरिश की लागत के बीच भारत के बड़े शहरों में रहने वाले मध्यम और उच्च-मध्यम वर्गीय परिवारों का बजट लगातार बढ़ रहा है। इसी बीच पुणे की एक महिला ने अपने परिवार के मासिक खर्च का ऐसा ब्यौरा साझा किया है जिसने सोशल मीडिया पर हजारों लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
महिला ने बताया कि उनका तीन सदस्यों का परिवार हर महीने करीब ₹2.2 लाख खर्च करता है। दिलचस्प बात यह है कि परिवार पेट्रोल पर खर्च नहीं करता क्योंकि उनके पास इलेक्ट्रिक वाहन है और अधिकांश भोजन घर पर ही तैयार होता है। इसके बावजूद खर्च 2 लाख रुपये के पार पहुंच रहा है
रिपोर्ट के अनुसार पुणे की स्मृति सिंह नामक महिला ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर कर अपने परिवार के खर्च का पूरा विवरण दिया है। वीडियो के कैप्शन में उन्होंने सवाल पूछा— "क्या हम जरूरत से ज्यादा खर्च कर रहे हैं या अब यही नया नॉर्मल बन गया है?" यही सवाल देखते ही देखते सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।
महिला ने अपने मासिक बजट का विस्तृत ब्रेकअप साझा किया।
परिवार का सबसे बड़ा खर्च घर की EMI है। हर महीने लगभग ₹1.1 लाख होम लोन की किस्त के रूप में चुकाए जाते हैं। यही कुल खर्च का लगभग आधा हिस्सा है।
दिलचस्प बात यह है कि परिवार EMI देने के बावजूद किराए के घर में रह रहा है और इसके लिए हर महीने ₹28,000 खर्च करता है। इस पर कई लोगों ने सवाल उठाया कि जब किराए के घर में रह रहे हैं तो होम लोन की किस्त कैसे दी जा रही है। इसके जवाब में महिला ने स्पष्ट किया कि जिस फ्लैट की EMI चल रही है, वह अभी निर्माणाधीन है, इसलिए उन्हें किराए के मकान में रहना पड़ रहा है।
परिवार के खर्च का दूसरा सबसे बड़ा हिस्सा डे-केयर फीस है।
महिला के अनुसार वह वर्क फ्रॉम होम करती हैं, लेकिन काम के दौरान छोटे बच्चे की देखभाल के लिए उसे प्रतिदिन कुछ घंटों के लिए डे-केयर भेजना पड़ता है। इसकी मासिक लागत करीब ₹30,000 है।
परिवार हर महीने किराना, दूध और अन्य घरेलू जरूरतों पर लगभग ₹20,000 खर्च करता है।
वीकेंड आउटिंग, रेस्तरां विजिट और परिवार के साथ समय बिताने पर करीब ₹15,000 मासिक खर्च होता है।
गर्मी के मौसम में एयर कंडीशनर और अन्य उपकरणों के इस्तेमाल के कारण बिजली बिल करीब ₹6,000 तक पहुंच जाता है।
हालांकि परिवार घर का खाना पसंद करता है, फिर भी Zomato और Swiggy जैसे प्लेटफॉर्म से ऑर्डर करने पर लगभग ₹3,000 खर्च हो जाते हैं।
कपड़े, घरेलू सामान और बच्चे की जरूरतों पर हर महीने लगभग ₹10,000 खर्च किए जाते हैं।
इंटरनेट बिल लगभग ₹500 है जबकि घरेलू सहायिका (मेड) को ₹1,800 प्रति माह दिए जाते हैं।
वीडियो वायरल होने के बाद लोगों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। कुछ यूजर्स का मानना था कि डे-केयर फीस और EMI बजट पर सबसे ज्यादा दबाव डाल रही हैं। वहीं कई लोगों ने कहा कि पुणे के प्रीमियम इलाकों में रहने वाले परिवारों के लिए ऐसे खर्च अब असामान्य नहीं रहे। यह मामला सिर्फ एक परिवार के खर्च का नहीं है, बल्कि तेजी से बढ़ती शहरी जीवन-यापन लागत की तस्वीर भी दिखाता है।
जानकारों का मानना है कि बड़े शहरों में घर, बच्चों की शिक्षा और लाइफस्टाइल से जुड़े खर्च परिवारों के बजट का सबसे बड़ा हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में अच्छी आय होने के बावजूद कई परिवारों को बचत और निवेश के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण लग रहा है।
पुणे, बेंगलुरु, गुरुग्राम, हैदराबाद और मुंबई जैसे शहरों में आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य और बच्चों की देखभाल की लागत लगातार बढ़ रही है। यही कारण है कि अच्छी आय वाले परिवार भी बचत और खर्च के बीच संतुलन बनाने को लेकर चिंतित दिखाई देते हैं।
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