Viral Video: इस महिला के हर महीने खर्च होते हैं 2.2 लाख रुपये, जानिए पैसे कहां हो रहे हैं खर्च

Viral Video: पुणे की एक महिला ने सोशल मीडिया पर अपने परिवार के 2.2 लाख मासिक खर्च का पूरा ब्यौरा साझा किया है। महिला का दावा है कि वह और उनके पति दोनों नौकरी करते हैं, घर का खाना खाते हैं और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) इस्तेमाल करते हैं, फिर भी हर महीने 2 लाख रुपये से अधिक खर्च हो जाते हैं।

Jitendra Singh
अपडेटेड5 Jun 2026, 04:55 PM IST
Add Mint as a preferred source on Google
Viral Video: सबसे बड़ा खर्च  <span class='webrupee'>₹</span>1.1 लाख की होम लोन EMI है।
Viral Video: सबसे बड़ा खर्च ₹1.1 लाख की होम लोन EMI है।

Viral Video: महंगाई, बढ़ती प्रॉपर्टी कीमतें और बच्चों की परवरिश की लागत के बीच भारत के बड़े शहरों में रहने वाले मध्यम और उच्च-मध्यम वर्गीय परिवारों का बजट लगातार बढ़ रहा है। इसी बीच पुणे की एक महिला ने अपने परिवार के मासिक खर्च का ऐसा ब्यौरा साझा किया है जिसने सोशल मीडिया पर हजारों लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

महिला ने बताया कि उनका तीन सदस्यों का परिवार हर महीने करीब 2.2 लाख खर्च करता है। दिलचस्प बात यह है कि परिवार पेट्रोल पर खर्च नहीं करता क्योंकि उनके पास इलेक्ट्रिक वाहन है और अधिकांश भोजन घर पर ही तैयार होता है। इसके बावजूद खर्च 2 लाख रुपये के पार पहुंच रहा है

कौन हैं यह महिला?

रिपोर्ट के अनुसार पुणे की स्मृति सिंह नामक महिला ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर कर अपने परिवार के खर्च का पूरा विवरण दिया है। वीडियो के कैप्शन में उन्होंने सवाल पूछा— "क्या हम जरूरत से ज्यादा खर्च कर रहे हैं या अब यही नया नॉर्मल बन गया है?" यही सवाल देखते ही देखते सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।

यह भी पढ़ें | RBI ने रेट क्यों नहीं बदला? रुपया, महंगाई और युद्ध से जुड़े बड़े सवाल के जवाब

कहां कितने रुपये हो रहे हैं खर्च

महिला ने अपने मासिक बजट का विस्तृत ब्रेकअप साझा किया।

1. होम लोन EMI: 1.1 लाख

परिवार का सबसे बड़ा खर्च घर की EMI है। हर महीने लगभग 1.1 लाख होम लोन की किस्त के रूप में चुकाए जाते हैं। यही कुल खर्च का लगभग आधा हिस्सा है।

2. किराया: 28,000

दिलचस्प बात यह है कि परिवार EMI देने के बावजूद किराए के घर में रह रहा है और इसके लिए हर महीने 28,000 खर्च करता है। इस पर कई लोगों ने सवाल उठाया कि जब किराए के घर में रह रहे हैं तो होम लोन की किस्त कैसे दी जा रही है। इसके जवाब में महिला ने स्पष्ट किया कि जिस फ्लैट की EMI चल रही है, वह अभी निर्माणाधीन है, इसलिए उन्हें किराए के मकान में रहना पड़ रहा है।

यह भी पढ़ें | कैशलेस इंश्योरेंस है फिर भी जेब से देने पड़े पैसे? जानिए आखिर कहां हो गई गलती

3. बच्चे की डे-केयर फीस: 30,000

परिवार के खर्च का दूसरा सबसे बड़ा हिस्सा डे-केयर फीस है।

महिला के अनुसार वह वर्क फ्रॉम होम करती हैं, लेकिन काम के दौरान छोटे बच्चे की देखभाल के लिए उसे प्रतिदिन कुछ घंटों के लिए डे-केयर भेजना पड़ता है। इसकी मासिक लागत करीब 30,000 है।

4. किराना और दूध: 20,000

परिवार हर महीने किराना, दूध और अन्य घरेलू जरूरतों पर लगभग 20,000 खर्च करता है।

यह भी पढ़ें | 60 साल के बाद हर महीने ₹3200 का सहारा, लाखों बुजुर्गों की आर्थिक सुरक्षा का आधार

5. बाहर खाना और आउटिंग: 15,000

वीकेंड आउटिंग, रेस्तरां विजिट और परिवार के साथ समय बिताने पर करीब 15,000 मासिक खर्च होता है।

6. बिजली बिल: 6,000

गर्मी के मौसम में एयर कंडीशनर और अन्य उपकरणों के इस्तेमाल के कारण बिजली बिल करीब 6,000 तक पहुंच जाता है।

7. ऑनलाइन फूड ऑर्डर: 3,000

हालांकि परिवार घर का खाना पसंद करता है, फिर भी Zomato और Swiggy जैसे प्लेटफॉर्म से ऑर्डर करने पर लगभग 3,000 खर्च हो जाते हैं।

8. शॉपिंग: 10,000

कपड़े, घरेलू सामान और बच्चे की जरूरतों पर हर महीने लगभग 10,000 खर्च किए जाते हैं।

9. इंटरनेट और घरेलू मदद

इंटरनेट बिल लगभग 500 है जबकि घरेलू सहायिका (मेड) को 1,800 प्रति माह दिए जाते हैं।

सोशल मीडिया पर बंटी राय

वीडियो वायरल होने के बाद लोगों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। कुछ यूजर्स का मानना था कि डे-केयर फीस और EMI बजट पर सबसे ज्यादा दबाव डाल रही हैं। वहीं कई लोगों ने कहा कि पुणे के प्रीमियम इलाकों में रहने वाले परिवारों के लिए ऐसे खर्च अब असामान्य नहीं रहे। यह मामला सिर्फ एक परिवार के खर्च का नहीं है, बल्कि तेजी से बढ़ती शहरी जीवन-यापन लागत की तस्वीर भी दिखाता है।

यह भी पढ़ें | 60 साल के बाद हर महीने ₹3200 का सहारा, लाखों बुजुर्गों की आर्थिक सुरक्षा का आधार

जानकारों का मानना है कि बड़े शहरों में घर, बच्चों की शिक्षा और लाइफस्टाइल से जुड़े खर्च परिवारों के बजट का सबसे बड़ा हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में अच्छी आय होने के बावजूद कई परिवारों को बचत और निवेश के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण लग रहा है।

भारत के शहरों में बढ़ती जीवन यापन की लागत

पुणे, बेंगलुरु, गुरुग्राम, हैदराबाद और मुंबई जैसे शहरों में आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य और बच्चों की देखभाल की लागत लगातार बढ़ रही है। यही कारण है कि अच्छी आय वाले परिवार भी बचत और खर्च के बीच संतुलन बनाने को लेकर चिंतित दिखाई देते हैं।

Get Latest real-time updates

Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.

होममनीViral Video: इस महिला के हर महीने खर्च होते हैं 2.2 लाख रुपये, जानिए पैसे कहां हो रहे हैं खर्च
More