
How multi asset funds reduce risk: निवेश की दुनिया में जोखिम कम करने और बेहतर मुनाफा कमाने के लिए 'मल्टी एसेट एलोकेशन फंड्स' एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभरे हैं। ये फंड शेयर (इक्विटी), कर्ज (डेट) और सोना-चांदी जैसे अलग-अलग एसेट्स में पैसा लगाते हैं। जब बाजार में उतार-चढ़ाव होता है, तब ये फंड्स अपने लचीलेपन के कारण निवेशकों के पोर्टफोलियो को स्थिरता देते हैं। आइए समझते हैं कि साल 2025 में इनका प्रदर्शन कैसा रहा और 2026 के लिए क्या संभावनाएं हैं।
मल्टी एसेट एलोकेशन फंड्स निवेश का ऐसा जरिया हैं जो एक साथ कई जगहों पर पैसा लगाते हैं। इनमें इक्विटी, डेट और गोल्ड या सिल्वर ईटीएफ शामिल होते हैं। इन फंड्स के मैनेजर बाजार की स्थिति को देखते हुए यह तय करते हैं कि किस समय किस एसेट में कितना पैसा रखना है। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य कम जोखिम में ज्यादा रिटर्न हासिल करना होता है।
इन फंड्स का सबसे बड़ा फायदा यह है कि ये बाजार के बदलावों पर बहुत तेजी से रिएक्ट करते हैं। अगर किसी एक एसेट (जैसे शेयर बाजार) में गिरावट आती है, तो दूसरे एसेट (जैसे सोना) उस नुकसान की भरपाई कर देते हैं। इससे निवेशकों का पूरा पोर्टफोलियो सुरक्षित रहता है और उन्हें कमाई के कई स्रोत मिल जाते हैं।
साल 2025 में शेयर बाजार में काफी हलचल रही, लेकिन मल्टी एसेट फंड्स ने निवेशकों का भरोसा जीता। आंकड़ों के मुताबिक, इन फंड्स ने साल भर में लगभग 16% का मुनाफा दिया। इसकी तुलना में फ्लेक्सी-कैप फंड्स सिर्फ 3% रिटर्न ही दे पाए। इस साल केवल गोल्ड, सिल्वर और इंटरनेशनल फंड्स ने ही इनसे बेहतर प्रदर्शन किया।
मल्टी एसेट फंड्स की सफलता के पीछे कीमती धातुओं का बड़ा हाथ रहा। 2025 में सोने की कीमतों में 74.5% और चांदी में 138% की भारी बढ़त देखी गई। गोलटेलर के संस्थापक विवेक बांका के मुताबिक, इन फंड्स ने सोने-चांदी में निवेश के कारण ही इतनी सुर्खियां बटोरीं। वहीं, स्क्रिपबॉक्स के सीईओ अतुल सिंघल का कहना है कि 'एक फंड, कई इंजन' वाली इस सोच ने लंबे समय के निवेशकों को बहुत आकर्षित किया है, क्योंकि उन्हें अलग-अलग फंड्स को मैनेज करने की जरूरत नहीं पड़ी।
2025 के आंकड़े बताते हैं कि जिन पोर्टफोलियो में इक्विटी, डेट और गोल्ड को बराबर जगह दी गई, उन्होंने 28.4% का शानदार रिटर्न दिया। यह कई अन्य निवेशों के मुकाबले दोगुना था। इसके उलट, जिन पोर्टफोलियो में 70% हिस्सा सिर्फ शेयरों (इक्विटी) का था, वे केवल 12.9% रिटर्न ही दे सके। सबसे खराब स्थिति उनकी रही जिन्होंने सोने में बिल्कुल निवेश नहीं किया था, उन्हें सिर्फ 6.3% का मुनाफा मिला।
अगर हम 10 साल के नजरिए से देखें, तो इक्विटी-भारी पोर्टफोलियो ने 12.8% का रिटर्न दिया है। हालांकि, संतुलित रणनीति (मल्टी एसेट) भी पीछे नहीं रही और 12.7% के साथ दूसरे स्थान पर रही। पिछले 10 सालों में से 7 साल ऐसे रहे हैं जब इस संतुलित रणनीति ने टॉप प्रदर्शन किया है।
माना जा रहा है कि 2026 में भी सोने और चांदी की चमक बनी रहेगी। जानकारों का कहना है कि आने वाले समय में ब्याज दरों में बड़ी गिरावट की उम्मीद कम है, इसलिए हाइब्रिड और एसेट एलोकेशन फंड्स पोर्टफोलियो के लिए जरूरी होंगे। निवेशकों को सलाह दी गई है कि वे मार्केट कैप की सीमाओं से जुड़े किसी भी नए नियम पर नजर रखें।
अगर आप मल्टी एसेट एलोकेशन फंड्स में निवेश करना चाहते हैं, तो बाजार में आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल, एसबीआई, एचडीएफसी, क्वांट, निप्पॉन इंडिया, एक्सिस और कोटक जैसे बड़े नाम मौजूद हैं। इसके अलावा टाटा, यूटीआई और मिराई एसेट जैसी कंपनियां भी इस तरह के फंड्स ऑफर करती हैं।
Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के लिए है। निवेश करने से पहले किसी प्रमाणित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। मिंट हिंदी आपके किसी भी निर्णय और उसके परिणाम के लिए तनिक भी उत्तरदायी नहीं है।
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