कम आमदनी वाले परिवारों के लिए आर्थिक सुरक्षा जुटाना आसान नहीं होता। हालांकि, अगर कोई नियोक्ता अपने घरेलू कर्मचारी के बारे में यह सोचे तो यह वाकई सराहनीय कदम है। एक पाठक ने सवाल किया कि उनके कुक की सालाना कमाई करीब 2 लाख रुपये है और उसके परिवार में पत्नी और तीन बच्चे हैं। वह उसके लिए टर्म इंश्योरेंस लेना चाहते हैं और प्रीमियम खुद देने को भी तैयार हैं। लेकिन प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) उन्हें इसलिए ठीक नहीं लगती, क्योंकि इसमें सिर्फ 2 लाख रुपये का कवर मिलता है। ऐसे में सवाल है कि कम आय वालों के लिए बेहतर बीमा विकल्प क्या हो सकता है।
पॉलिसी कर्मचारी के नाम पर ही क्यों जरूरी
बीमा जानकारों का कहना है कि घरेलू कर्मचारी के लिए टर्म इंश्योरेंस लेना अच्छी सोच है, लेकिन तरीका सही होना चाहिए। आमतौर पर बीमा उसी व्यक्ति के नाम पर लिया जाता है, जिसकी जिंदगी पर बीमा हो रहा है। यानी पॉलिसी कुक के ही नाम से होनी चाहिए, भले ही प्रीमियम नियोक्ता भर दे। इससे आगे चलकर कोई कन्फ्यूजन नहीं रहता, खासकर तब जब नौकरी बदल जाए या क्लेम करने की नौबत आए। अगर पॉलिसी किसी और के नाम पर होगी तो बाद में दिक्कतें बढ़ सकती हैं।
सरकारी बीमा स्कीम क्यों है पहली सुरक्षा
सरकारी बीमा योजनाओं को पूरी तरह नजरअंदाज करना भी ठीक नहीं है। PMJJBY जैसी स्कीम भले ही ज्यादा रकम का कवर न दे, लेकिन बहुत कम पैसे में एक बेसिक सुरक्षा जरूर देती है। जिन परिवारों के पास कोई बीमा नहीं होता, उनके लिए यह एक अच्छा शुरुआती कदम हो सकता है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि ऐसी सरकारी योजनाओं को पहली सुरक्षा की तरह देखना चाहिए। इससे अगर कुछ अनहोनी हो जाए तो परिवार को तुरंत थोड़ी आर्थिक मदद मिल जाती है। इसके बाद जरूरत के हिसाब से एक अलग टर्म प्लान जोड़ा जा सकता है।
कितना मिल सकता है बीमा कवर
जहां तक बीमा कवर की बात है, कंपनियां आमतौर पर सालाना आय के 10 से 20 गुना तक का कवर देती हैं। यानी 2 लाख रुपये कमाने वाले व्यक्ति को 20 से 40 लाख रुपये तक का टर्म इंश्योरेंस मिल सकता है। हालांकि, यह उम्र और सेहत पर निर्भर करेगा। सबसे आसान और साफ तरीका यही है कि कुक खुद अपने नाम से पॉलिसी ले, पत्नी या बच्चों को नॉमिनी बनाए और नियोक्ता हर साल प्रीमियम की रकम उसके खाते में डाल दे। इससे पॉलिसी पर परिवार का हक रहेगा और क्लेम के समय किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।