Dormant Demat Account: आजकल शेयर बाजार में निवेश करना पहले से काफी आसान हो गया है। कुछ ही मिनटों में मोबाइल ऐप के जरिए डीमैट अकाउंट खुल जाता है और लोग निवेश की दुनिया में कदम रख देते हैं। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि अकाउंट तो खुल जाता है, पर उसमें कोई लेन-देन नहीं होता और वह महीनों या सालों तक खाली पड़ा रहता है।
ऐसे मामलों में ब्रोकरेज कंपनियां उसे डॉर्मेंट या इनएक्टिव डीमैट अकाउंट घोषित कर सकती हैं। आंकड़ों के मुताबिक भी यही तस्वीर सामने आ रही है। सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) से जुड़े डेटा के अनुसार जनवरी 2026 तक हर तीन डीमैट अकाउंट में से सिर्फ एक ही एक्टिव था, जबकि बाकी अकाउंट में कोई गतिविधि नहीं हो रही थी।
डॉर्मेंट डीमैट अकाउंट क्या होता है? (What Is a Dormant Demat Account)
जब किसी डीमैट अकाउंट में लंबे समय तक कोई खरीद-फरोख्त या ट्रांजैक्शन नहीं होता, तो ब्रोकरेज कंपनी उसे डॉर्मेंट या इनएक्टिव अकाउंट के रूप में मार्क कर सकती है। बाजार नियामक सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ब्रोकर्स को यह अधिकार देता है कि वे अपनी नीति के अनुसार तय करें कि कितने समय बाद अकाउंट को डॉर्मेंट माना जाएगा।
आमतौर पर अगर किसी खाते में 11 महीने से लेकर 5 साल तक कोई ट्रांजैक्शन नहीं होता, तो उसे निष्क्रिय अकाउंट माना जा सकता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि डिविडेंड मिलना या किसी कंपनी का कॉर्पोरेट एक्शन होना ट्रांजैक्शन नहीं माना जाता।
डॉर्मेंट डीमैट अकाउंट बन सकता है जोखिम:
एक डॉर्मेंट डीमैट अकाउंट स्कैमर्स के लिए सोने की खान जैसा होता है। वे ऐसे अकाउंट्स को टारगेट करते हैं जिन्हें मालिक भूल चुका है।
- गलत जानकारी अपडेट करना: जालसाज आपके अकाउंट में अपना मोबाइल नंबर या ईमेल आईडी अपडेट कर सकते हैं। इसके बाद वे जो भी अवैध ट्रांजैक्शन करेंगे, उसका मैसेज आपको कभी नहीं मिलेगा।
- फ्रंट रनिंग: स्कैमर्स आपके अकाउंट का इस्तेमाल 'फ्रंट रनिंग' के लिए कर सकते हैं। इसमें किसी बड़े शेयर ऑर्डर की जानकारी के आधार पर पहले से ही खरीद-बिक्री की जाती है, जो कि पूरी तरह गैरकानूनी है।
- होल्डिंग्स की चोरी: अगर आपके अकाउंट में शेयर रखे हैं, तो स्कैमर उन्हें चुपके से बेचकर पैसे अपने अकाउंट में ट्रांसफर करने की कोशिश कर सकते हैं।
डॉर्मेंट अकाउंट को फिर से कैसे चालू करें?
अगर आपका अकाउंट डॉर्मेंट हो गया है और आप उसमें रखे शेयर बेचना चाहते हैं, तो ब्रोकर का सिस्टम इसे 'सेंसिटिव' ट्रांजैक्शन मानेगा। आपको पहले अपनी पहचान साबित करनी होगी।
- री-एक्टिवेशन प्रोसेस: आपको फिर से KYC फॉर्म भरना होगा। कुछ ब्रोकर इसके लिए छोटी सी फीस ले सकते हैं, हालांकि ज्यादातर यह मुफ्त होता है।
- पासवर्ड बदलते रहें: अपने ट्रेडिंग और डीमैट लॉगिन पासवर्ड को समय-समय पर बदलते रहें। जन्मतिथि जैसे आसान पासवर्ड रखने से बचें।
- KYC: जब भी अपना आधार या पैन कार्ड जमा करें, उस पर तारीख और जमा करने का उद्देश्य (जैसे- "Only for KYC at XYZ Broker") जरूर लिखें। इससे आपके दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल रुक जाएगा।
- फ्रीजिंग: अगर आप लंबे समय तक ट्रेडिंग नहीं करना चाहते, तो आप खुद ब्रोकर से कहकर अपना अकाउंट 'फ्रीज' करवा सकते हैं। इससे कोई भी आपके शेयर्स को आपकी मर्जी के बिना छू नहीं पाएगा।
डीमैट अकाउंट पर रखें नजर:
निवेश की दुनिया मेंसतर्क रहना ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। अपने डीमैट अकाउंट की हर महीने कम से कम एक बार जांच जरूर करें। यदि आप एक्टिव ट्रेडिंग नहीं करते, तो डिलीवरी ट्रेडिंग एक अच्छा विकल्प है, जिसमें आप शेयर खरीदकर लंबे समय के लिए रख सकते हैं और रिस्क को कम कर सकते हैं।