Gold investment rule: कभी जिसे लोग सिर्फ शादी-ब्याह या त्योहारों में खरीदते थे, वही सोना अब समझदारी भरा निवेश बन गया है। साल 2025 में सोने ने छप्पर फाड़ प्रदर्शन किया है। अक्टूबर में इसकी कीमतें आसमान छू गईं और निवेशकों ने दोबारा इसकी ओर रुख किया। ऐसे माहौल में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर अपने पोर्टफोलियो में कितना सोना रखना सही रहेगा। एक्सपर्ट्स कहते हैं, इसका जवाब आसान है- 5 से 15% का फॉर्मूला। चलिए इस फॉर्मूले को समझते हैं।
क्या है 5 से 15% का फॉर्मूला?
यह 5–15% वाला फॉर्मूला बताता है कि आपकी कुल निवेश संपत्ति का सिर्फ उतना ही हिस्सा गोल्ड में होना चाहिए, जितना आपकी जोखिम लेने की क्षमता के मुताबिक हो। अगर आप शेयर मार्केट में एक्टिव हैं और रिस्क उठा सकते हैं, तो 5% गोल्ड काफी रहेगा। वहीं अगर आप स्थिरता चाहते हैं या रिटायरमेंट जैसे गोल्स के नजदीक हैं, तो 10 से 15% गोल्ड आपके पोर्टफोलियो को संतुलन देगा। सीधी बात ये है कि सोना भले तेज रिटर्न न दे, लेकिन गिरावट के दौर में नुकसान से बचाता जरूर है।
फॉर्मूला: गोल्ड अलोकेशन = कुल पोर्टफोलियो × (5% से 15%)
उदाहरण के लिए, अगर आपका पोर्टफोलियो ₹20 लाख का है, तो गोल्ड = ₹1 लाख (5%) से ₹3 लाख (15%) के बीच होना चाहिए।
रुपया गिरे तो सोना चढ़ता है
भारत में गोल्ड की कीमतों को रुपये की हालत भी काफी प्रभावित करती है। अक्टूबर 2025 में रुपया करीब ₹88.8 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंचा, जो रिकॉर्ड लो माना गया। जब रुपया गिरता है तो सोना महंगा हो जाता है, और यही वजह है कि बाजार की उथल-पुथल के वक्त गोल्ड आपके पोर्टफोलियो की सुरक्षा करता है।
किस फॉर्म में रखें सोना- ETF, SGB या फिजिकल?
अगर आपके पास डीमैट अकाउंट है तो गोल्ड ETF या म्यूचुअल फंड सबसे आसान और डिजिटल तरीका है, जहां आप शेयर की तरह कभी भी खरीद-बिक्री कर सकते हैं। जिनके पास डीमैट नहीं है, वे SIP के जरिए धीरे-धीरे निवेश बढ़ा सकते हैं। वहीं अगर आप लंबे वक्त के लिए सोच रहे हैं तो सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) सबसे बेहतरीन विकल्प है क्योंकि इसमें हर साल 2.5% ब्याज भी मिलता है और मैच्योरिटी पर पूरा अमाउंट टैक्स-फ्री रहता है। हालांकि अक्टूबर 2025 तक नई किश्तें जारी नहीं हुई हैं, इसलिए फिलहाल पुराने निवेशक ब्याज लेते रहेंगे।
टैक्स और टाइमिंग का भी रखें ध्यान
टैक्स और टाइमिंग भी निवेश का अहम हिस्सा हैं। गोल्ड ETF या म्यूचुअल फंड को अगर एक साल से ज्यादा रखें तो उन पर 12.5% लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स लगता है। वहीं SGB पर मैच्योरिटी के बाद पूरा पैसा टैक्स फ्री होता है, बस हर साल का ब्याज इनकम में जुड़कर टैक्सेबल रहता है। फिजिकल गोल्ड में हालांकि मेकिंग चार्ज, GST और स्टोरेज की झंझटें बनी रहती हैं, इसलिए आज के समय में डिजिटल गोल्ड ज्यादा समझदारी भरा माना जाता है।
5-15% वाले रूल को कैसे अपनाएं?
अब बात करते हैं कि इस 5–15% वाले नियम को अपनाएं कैसे। मान लीजिए आपका कुल पोर्टफोलियो ₹20 लाख का है, तो ₹1 से ₹3 लाख तक गोल्ड में लगाना बैलेंस्ड डिसिजन रहेगा। एक बार में सारा पैसा लगाने के बजाय धीरे-धीरे SIP या हर कुछ महीनों में छोटे-छोटे निवेश करना बेहतर है। और साल में एक बार अपने पोर्टफोलियो को जरूर री-बैलेंस करें, ताकि गोल्ड का हिस्सा आपके तय लिमिट से ज्यादा न हो जाए। यही तरीका आपको मार्केट के उतार-चढ़ाव से सुरक्षित रखेगा और लंबी अवधि में स्थिरता देगा।