दिल्ली सरकार नागरिकों द्वारा विभिन्न योजनाओं और सेवाओं के लिए दिए गए आधार से जुड़े महत्वपूर्ण व्यक्तिगत विवरणों की सुरक्षा के लिए एक आधार वॉल्ट (Aadhaar Vault) बनाने पर काम कर रही है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।
सरकार के सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने यह प्रोजेक्ट भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के दिशा-निर्देशों के आधार पर शुरू किया है। नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) ने इस वॉल्ट को परीक्षण सर्वर पर सफलतापूर्वक टेस्ट भी कर लिया है।
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के अनुसार, ऑनलाइन आवेदन करते समय कई सरकारी योजनाओं और सेवाओं में आधार संख्या जरूरी होती है, जिसे सुरक्षित रखना बहुत जरूरी है। आधार वॉल्ट के कई फायदे हैं जैसे यह संवेदनशील पहचान संबंधी डेटा को सुरक्षित रखता है और किसी भी तरह के दुरुपयोग को रोकता है।
इसके अलावा, यह आधार से जुड़े डेटा को ई-गवर्नेंस सेवाओं के साथ सुरक्षित तरीके से जोड़ने में मदद करता है। सरकार ने मई महीने में सेंटर फॉर एडवांस्ड कंप्यूटिंग (C-DAC) के साथ एक समझौता किया था, ताकि e-District और प्रस्तावित यूनिफाइड डेटा हब (UDH) का डेटा आधार वॉल्ट में रखा जा सके। e-District पोर्टल का इस्तेमाल जाति, आय प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेज बनाने और अन्य ऑनलाइन आवेदन के लिए किया जाता है।
हाल ही में हुई एक बैठक में IT मंत्री पंकज सिंह ने इस प्रोजेक्ट की समीक्षा की और अधिकारियों को काम तेज करने के निर्देश दिए।
क्या है आधार वॉल्ट?
आधार वॉल्ट एक सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड डेटाबेस होता है, जिसे सरकारी विभागों और निजी संस्थानों को आधार नंबर और उससे जुड़े डेटा को रखने के लिए उपयोग करना होता है। UIDAI ने इसे अनिवार्य किया है।
इसमें असली आधार नंबर को सीधे स्टोर नहीं किया जाता, बल्कि उसके स्थान पर एक रेफरेंस की बनाई जाती है। यह की आवश्यकता पड़ने पर एन्क्रिप्टेड आधार डेटा को सुरक्षित रूप से एक्सेस करने में मदद करती है। इससे आधार नंबर सीधे किसी संस्था के डेटाबेस में नहीं रहता, और डेटा सुरक्षा काफी बढ़ जाती है।
आधार वॉल्ट सिस्टम कैसे काम करता है?
साल 2017 में UIDAI ने आधार डेटा के दुरुपयोग की शिकायतों के बाद आधार डेटा वॉल्ट विकसित किया था। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी डेटा-एकत्र करने वाली एजेंसी अपने लोकल कंप्यूटर पर आधार डेटा इकट्ठा न कर सके।
जब भी आधार नंबर की जरूरत होती है, अनुरोध एन्क्रिप्टेड सर्वरों से होकर गुजरता है। आधार नंबर तब तक सामने नहीं आता जब तक कि अनुरोध एक विशेष एन्क्रिप्शन की से प्रमाणित न हो जाए। यह वॉल्ट ई-गवर्नेंस और अन्य एप्लीकेशन्स को आधार डेटा का निशान कम करने और इसे अत्यधिक सुरक्षित रखने में मदद करता है।