CPSE ETF: सरकारी कंपनियों में निवेश से बेहतर रिटर्न मिल सकता है? जानिए CPSE ETF क्या है और कैसे काम करता है

CPSE ETF: CPSE ETF को लेकर निवेशकों में दिलचस्पी बढ़ रही है। यह एक ऐसा विकल्प है जो सरकारी कंपनियों से जुड़ा है और निवेश को आसान बनाता है। इसकी खासियतें और काम करने का तरीका इसे अलग बनाते हैं।

Priya Shandilya
अपडेटेड4 Feb 2026, 05:43 PM IST
जानिए CPSE ETF क्या है और यह कैसे काम करता है
जानिए CPSE ETF क्या है और यह कैसे काम करता है(istock)

CPSE ETF: शेयर बाजार में निवेश की बात आते ही कई लोगों के मन में यही सवाल होता है, क्या ऐसा कोई रास्ता है जहां रिस्क ज्यादा न हो और भरोसेमंद कंपनियों में पैसा लगाया जा सके? इसी सोच से जुड़ा एक ऑप्शन है CPSE ETF। खास बात यह है कि यह उन निवेशकों के लिए बना है जो सरकारी कंपनियों में निवेश करना चाहते हैं, लेकिन अलग-अलग शेयर खरीदने की झंझट से बचना चाहते हैं।

CPSE ETF क्या है?

CPSE ETF का पूरा नाम है सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज एक्सचेंज ट्रेडेड फंड। यह एक पैसिव इन्वेस्टमेंट ऑप्शन है, यानी इसमें फंड मैनेजर बार-बार ट्रेडिंग नहीं करता। इसमें भारत की चुनिंदा सरकारी कंपनियों में निवेश किया जाता है। इसका मतलब यह हुआ कि निवेशक एक ही ETF के जरिए कई पब्लिक सेक्टर कंपनियों में पैसा लगा सकता है। यह फंड सरकार की डिसइन्वेस्टमेंट प्लान का हिस्सा है, जिसके तहत सरकार अपनी हिस्सेदारी धीरे-धीरे कम करती है और आम निवेशकों को भागीदारी का मौका देती है।

कैसे काम करता है CPSE ETF?

यह एक तय इंडेक्स को फॉलो करता है जिसमें चुनिंदा सरकारी कंपनियां शामिल होती हैं। फंड उसी अनुपात में उन्हीं शेयरों में निवेश करता है, जैसा इंडेक्स में तय होता है। क्योंकि यह पैसिव फंड है, इसलिए यहां फंड मैनेजर रोज-रोज शेयर खरीदने-बेचने का फैसला नहीं करता। नतीजा यह होता है कि फंड का प्रदर्शन काफी हद तक उन सरकारी कंपनियों के प्रदर्शन पर निर्भर करता है।

किन कंपनियों में होता है निवेश?

CPSE ETF में आमतौर पर बड़ी और मजबूत सरकारी कंपनियां शामिल होती हैं। ये कंपनियां ज्यादातर एनर्जी, पावर, इंफ्रास्ट्रक्चर और कैपिटल गुड्स जैसे सेक्टर में काम करती हैं। इंडेक्स में शामिल होने के लिए कंपनियों को कुछ शर्तें पूरी करनी होती हैं, जैसे शेयर बाजार में लिस्टेड होना, सरकार की बहुमत हिस्सेदारी होना और तय मार्केट साइज व डिविडेंड से जुड़े मानक पूरे करना।

इंडेक्स की समीक्षा और बैलेंस कैसे बना रहता है?

हर तीन महीने में इंडेक्स की समीक्षा और री-बैलेंसिंग होती है। किसी एक कंपनी को हावी होने से रोकने के लिए लिमिट तय होती है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि पूरा फंड किसी एक कंपनी पर ज्यादा निर्भर न हो और निवेश संतुलित बना रहे।

निवेशकों को CPSE ETF क्यों पसंद आता है?

कई निवेशक CPSE ETF को इसलिए चुनते हैं क्योंकि इसमें खर्च कम होता है और स्ट्रक्चर समझना आसान है। चूंकि ये सरकारी कंपनियां होती हैं, इसलिए इन्हें अपेक्षाकृत स्थिर माना जाता है और कई कंपनियां नियमित डिविडेंड भी देती हैं। CPSE ETF उन लोगों के लिए है जो बिना ज्यादा उलझन के भारत के पब्लिक सेक्टर ग्रोथ स्टोरी का हिस्सा बनना चाहते हैं।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। ऊपर दिए गए विचार और सिफारिशें व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों के हैं, न कि मिंट के। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञों से जांच करें।

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