GPF vs EPF: रिटायरमेंट सेविंग्स के लिए दोनों में से क्या है बेस्ट ऑप्शन? जानिए दोनों के बीच क्या है अंतर

जीपीएफ और ईपीएफ दोनों ही योजनाएं कर्मचारियों को सुरक्षित भविष्य देने के उद्देश्य से बनाई गई हैं। जहां जीपीएफ सरकारी कर्मचारियों के लिए है, वहीं ईपीएफ निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा देता है।

Manali Rastogi
अपडेटेड10 Nov 2025, 08:59 PM IST
GPF vs EPF: रिटायरमेंट सेविंग्स के लिए दोनों में से क्या है बेस्ट ऑप्शन? जानिए दोनों के बीच क्या है अंतर
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हर कामकाजी व्यक्ति अपने जीवन में प्रॉविडेंट फंड के बारे में जरूर सुनता है। यह एक बचत योजना होती है, जिसका उद्देश्य सेवानिवृत्ति के बाद के जीवन के लिए धन-संचय करना है। प्रॉविडेंट फंड के दो प्रमुख प्रकार होते हैं, जोकि पीएफ (EPF - Employee Provident Fund) और जीपीएफ (GPF - General Provident Fund) है। आइए इन्हें आसान भाषा में समझते हैं।

जीपीएफ और ईपीएफ के बीच अंतर

पैरामीटरजीपीएफईपीएफ
एलिजिबिलिटीकेवल सरकारी कर्मचारियों के लिएकेवल संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए
इंटरेस्ट रेट7.1% पर एनम8.15% पर एनम
मिनिमम कॉन्ट्रिब्यूशनकर्मचारी के वेतन का 6%अप्रैल 2021 से कर्मचारी के वेतन का 10%। पहले यह 12% था।
मैक्सिमम कॉन्ट्रिब्यूशनकर्मचारी के वेतन का 100%वीपीएफ में 12% से अधिक का योगदान करना होगा
मैच्योरिटी पीरियडरिटायरमेंट तक58 वर्ष की आयु तक
समय से पहले बंद होनासरकारी सेवा से त्यागपत्र अथवा निलंबन परसब्सक्राइबर की 2 महीने की बेरोजगारी
लोन फैसिलिटीसेवा के दौरान किसी भी समय उपलब्ध हैकोई लोन सुविधा नहीं, केवल आंशिक निकासी की इजाजत है
कौन करता है मैनेज?कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के तहत पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग।कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 के तहत कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ)।

क्या होता है जीपीएफ?

जीपीएफ केवल सरकारी कर्मचारियों के लिए होती है। इस योजना के तहत हर सरकारी कर्मचारी को अपने वेतन का कम से कम 6% हिस्सा जीपीएफ में जमा करना जरूरी होता है। वह चाहे तो अपनी पूरी सैलरी का 100% तक भी इसमें योगदान कर सकता है। हालांकि, यह योगदान केवल दो स्थितियों में रोका जा सकता है:

  • जब कर्मचारी निलंबित (suspended) हो जाए, या
  • जब वह रिटायर होने वाला हो।
  • आमतौर पर रिटायरमेंट से तीन महीने पहले जीपीएफ में योगदान बंद कर दिया जाता है।

क्या होता है ईपीएफ?

ईपीएफ योजना निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए होती है। इसमें कर्मचारी और नियोक्ता दोनों योगदान करते हैं। आमतौर पर, दोनों की ओर से वेतन (Basic + Dearness Allowance) का 12 फीसदी योगदान किया जाता है। हालांकि, 2021 के संशोधन के अनुसार, सरकार ने इस योगदान को 10% कर दिया है, ताकि कर्मचारियों पर बोझ कम हो सके।

लोन फैसिलिटी

जीपीएफ में सरकारी कर्मचारी अपने खाते से किसी भी समय लोन (ऋण) ले सकते हैं, जब तक वे नौकरी में हैं। वहीं ईपीएफ में यह सुविधा कुछ शर्तों के साथ मिलती है:

  • 7 साल की नौकरी पूरी होने के बाद कर्मचारी शादी या शिक्षा के लिए अपने ईपीएफ बैलेंस का 50% तक निकाल सकते हैं।
  • 10 साल की सेवा के बाद कर्मचारी घर खरीदने या बनाने के लिए अपने ईपीएफ बैलेंस का 90% तक निकाल सकते हैं।

क्या है टैक्स बेनेफिट्स?

जीपीएफ एक पूरी तरह टैक्स-फ्री बचत योजना है। इसमें जमा की गई राशि, उस पर मिलने वाला ब्याज और प्राप्त राशि सभी आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत कर-मुक्त होती हैं। ईपीएफ में भी टैक्स लाभ मिलता है:

  • हर साल 1.5 लाख तक का योगदान धारा 80C के तहत टैक्स कटौती के योग्य होता है।
  • यदि कर्मचारी अपने ईपीएफ खाते से पैसा 5 साल बाद निकालता है, तो यह राशि भी टैक्स से मुक्त होती है।

दोनों योजनाएं बचत के साथ-साथ टैक्स में भी राहत देती हैं और कर्मचारियों को लॉन्ग-टर्म वित्तीय स्थिरता प्राप्त करने में मदद करती हैं।

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