
हर कामकाजी व्यक्ति अपने जीवन में प्रॉविडेंट फंड के बारे में जरूर सुनता है। यह एक बचत योजना होती है, जिसका उद्देश्य सेवानिवृत्ति के बाद के जीवन के लिए धन-संचय करना है। प्रॉविडेंट फंड के दो प्रमुख प्रकार होते हैं, जोकि पीएफ (EPF - Employee Provident Fund) और जीपीएफ (GPF - General Provident Fund) है। आइए इन्हें आसान भाषा में समझते हैं।
| पैरामीटर | जीपीएफ | ईपीएफ |
|---|---|---|
| एलिजिबिलिटी | केवल सरकारी कर्मचारियों के लिए | केवल संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए |
| इंटरेस्ट रेट | 7.1% पर एनम | 8.15% पर एनम |
| मिनिमम कॉन्ट्रिब्यूशन | कर्मचारी के वेतन का 6% | अप्रैल 2021 से कर्मचारी के वेतन का 10%। पहले यह 12% था। |
| मैक्सिमम कॉन्ट्रिब्यूशन | कर्मचारी के वेतन का 100% | वीपीएफ में 12% से अधिक का योगदान करना होगा |
| मैच्योरिटी पीरियड | रिटायरमेंट तक | 58 वर्ष की आयु तक |
| समय से पहले बंद होना | सरकारी सेवा से त्यागपत्र अथवा निलंबन पर | सब्सक्राइबर की 2 महीने की बेरोजगारी |
| लोन फैसिलिटी | सेवा के दौरान किसी भी समय उपलब्ध है | कोई लोन सुविधा नहीं, केवल आंशिक निकासी की इजाजत है |
| कौन करता है मैनेज? | कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के तहत पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग। | कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 के तहत कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ)। |
जीपीएफ केवल सरकारी कर्मचारियों के लिए होती है। इस योजना के तहत हर सरकारी कर्मचारी को अपने वेतन का कम से कम 6% हिस्सा जीपीएफ में जमा करना जरूरी होता है। वह चाहे तो अपनी पूरी सैलरी का 100% तक भी इसमें योगदान कर सकता है। हालांकि, यह योगदान केवल दो स्थितियों में रोका जा सकता है:
ईपीएफ योजना निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए होती है। इसमें कर्मचारी और नियोक्ता दोनों योगदान करते हैं। आमतौर पर, दोनों की ओर से वेतन (Basic + Dearness Allowance) का 12 फीसदी योगदान किया जाता है। हालांकि, 2021 के संशोधन के अनुसार, सरकार ने इस योगदान को 10% कर दिया है, ताकि कर्मचारियों पर बोझ कम हो सके।
जीपीएफ में सरकारी कर्मचारी अपने खाते से किसी भी समय लोन (ऋण) ले सकते हैं, जब तक वे नौकरी में हैं। वहीं ईपीएफ में यह सुविधा कुछ शर्तों के साथ मिलती है:
जीपीएफ एक पूरी तरह टैक्स-फ्री बचत योजना है। इसमें जमा की गई राशि, उस पर मिलने वाला ब्याज और प्राप्त राशि सभी आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत कर-मुक्त होती हैं। ईपीएफ में भी टैक्स लाभ मिलता है:
दोनों योजनाएं बचत के साथ-साथ टैक्स में भी राहत देती हैं और कर्मचारियों को लॉन्ग-टर्म वित्तीय स्थिरता प्राप्त करने में मदद करती हैं।
Oops! Looks like you have exceeded the limit to bookmark the image. Remove some to bookmark this image.