
ELSS: सरकार ने नया टैक्स सिस्टम ऐसा बना दिया है कि अब यह कई लोगों को ज्यादा आसान और फायदेमंद लगने लगा है। इसी वजह से बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स ने पुराना सिस्टम छोड़कर नए टैक्स रिजीम में शिफ्ट कर लिया है। लेकिन इस बदलाव के साथ एक कीमत भी चुकानी पड़ी- कई टैक्स छूट खत्म हो गईं। इन्हीं में से एक थी सेक्शन 80C के तहत ELSS में निवेश पर मिलने वाली टैक्स छूट। अब सवाल यही है कि जब टैक्स फायदा नहीं मिल रहा, तो क्या ELSS में निवेश अब भी समझदारी है?
इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम यानी ELSS एक तरह का इक्विटी म्यूचुअल फंड होता है, जिसमें कम से कम 80 फीसदी पैसा शेयर बाजार में लगाया जाता है। इसमें तीन साल का लॉक-इन पीरियड होता है। पुराने टैक्स सिस्टम में ELSS की पहचान टैक्स बचत के मजबूत विकल्प के तौर पर थी, क्योंकि इसमें निवेश करने पर सालाना ₹1.5 लाख तक की टैक्स छूट मिलती थी।
SIP के जरिए निवेश करने पर हर किस्त का अपना अलग तीन साल का लॉक-इन होता है, जो निवेशक को लंबे समय तक बाजार से जुड़े रहने में मदद करता है।
नए टैक्स सिस्टम में ELSS पर कोई टैक्स डिडक्शन नहीं मिलता, यही वजह है कि कई निवेशक अब इसे छोड़ने पर विचार कर रहे हैं। लेकिन अगर सिर्फ टैक्स को हटाकर इसके प्रदर्शन पर नजर डालें, तो तस्वीर अलग दिखती है।
| स्कीम | 3 साल का रिटर्न | 5 साल का रिटर्न | 10 साल का रिटर्न |
|---|---|---|---|
| ELSS फंड | 15.97% | 15.28% | 14.15% |
| फ्लेक्सी-कैप फंड | 16.02% | 14.68% | 13.86% |
| लार्ज-कैप फंड | 14.93% | 13.93% | 13.46% |
| मल्टी-कैप फंड | 18.04% | 17.84% | NA |
पिछले कुछ सालों में ELSS फंड्स ने करीब 3 से 10 साल की अवधि में 14 से 16 फीसदी तक का CAGR रिटर्न दिया है। जब इसकी तुलना फ्लेक्सी-कैप, लार्ज-कैप और मल्टी-कैप फंड्स से की जाती है, तो ELSS का प्रदर्शन काफी मजबूत नजर आता है और कई बार यह बड़े फंड्स से भी आगे रहा है।
शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव से लोग अक्सर डर या लालच में गलत फैसले ले लेते हैं। ELSS का तीन साल का लॉक-इन निवेशक को गलत फैसले लेने से रोकता है। इस दौरान निवेशक न घबराकर पैसा निकाल सकता है और न ही जल्द मुनाफा बुक कर सकता है। यही वजह है कि ELSS लंबे समय में अनुशासित निवेश की आदत डालने में मदद करता है और कंपाउंडिंग का पूरा फायदा दिलाता है।
इसका सीधा जवाब है हां, लेकिन सही सोच के साथ। अगर आप सिर्फ टैक्स बचाने के लिए ELSS में निवेश कर रहे थे, तो नए टैक्स रिजीम में वह वजह अब नहीं रही। लेकिन अगर आपका मकसद लंबे समय में वेल्थ बनाना है और आप इक्विटी के उतार-चढ़ाव को समझते हैं, तो ELSS आज भी एक मजबूत निवेश विकल्प है।
आखिर में निवेश का सही फैसला वही होता है, जो सिर्फ टैक्स के हिसाब से नहीं, बल्कि आपकी जरूरत और भविष्य की योजनाओं से जुड़ा हो। टैक्स नियम समय-समय पर बदलते रहते हैं, लेकिन लंबे समय तक टिके रहने वाला निवेश ही असली फायदा देता है। ELSS आज भले टैक्स बचाने का जरिया न हो, लेकिन सही निवेशक के लिए यह अब भी धैर्य और अनुशासन के साथ आगे बढ़ने का एक मजबूत रास्ता बना हुआ है।
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