ब्याज दरों के उतार-चढ़ाव से बचना है तो फ्लोटर फंड में करे निवेश, जानें 2026 में ये क्यों हैं खास

What are floater mutual funds in india: फ्लोटर फंड ऐसे म्यूचुअल फंड हैं जो बाजार की ब्याज दरों के हिसाब से रिटर्न देते हैं। जानिए इनके काम करने का तरीका, टैक्स नियम और जनवरी 2026 के बाजार में इनकी अहमियत।

Naveen Kumar Pandey( विद इनपुट्स फ्रॉम एएनआई)
अपडेटेड13 Jan 2026, 03:06 PM IST
क्या होता है फ्लोटर फंड? (सांकेतिक तस्वीर)
क्या होता है फ्लोटर फंड? (सांकेतिक तस्वीर)(iStock)

Benefits of investing in floating rate funds: बाजार में ब्याज दरें कभी ऊपर जाती हैं तो कभी नीचे। फ्लोटर फंड ऐसे निवेशकों के लिए एक खास विकल्प हैं जो इन बदलावों का फायदा उठाना चाहते हैं। ये फंड अपना ज्यादातर पैसा उन जगहों पर लगाते हैं जहां ब्याज दरें स्थिर नहीं रहतीं। आइए विस्तार से समझते हैं कि ये फंड कैसे काम करते हैं और इनमें टैक्स के क्या नियम हैं।

क्या होते हैं फ्लोटर फंड?

फ्लोटर फंड एक तरह के ओपन-एंडेड डेट म्यूचुअल फंड हैं। सेबी (SEBI) के नियमों के अनुसार इन फंड्स को अपना कम से कम 65% पैसा फ्लोटिंग रेट वाले इंस्ट्रूमेंट्स में लगाना होता है। फ्लोटिंग रेट का मतलब है कि इन पर मिलने वाला ब्याज समय-समय पर बदलता रहता है। ये फंड कॉर्पोरेट बॉन्ड्स और सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश करते हैं।

कैसे काम करता है यह सिस्टम?

इन फंड्स का ब्याज दर किसी बाहरी बेंचमार्क से जुड़ा होता है। इसमें अक्सर आरबीआई (RBI) के रेपो रेट या ट्रेजरी बिल यील्ड का इस्तेमाल किया जाता है। जब बाजार में ब्याज दरें बढ़ती हैं तो इन फंड्स से मिलने वाला रिटर्न भी बढ़ जाता है। फंड मैनेजर कई बार स्वैप या डेरिवेटिव्स का इस्तेमाल भी करते हैं। वे इसके जरिए फिक्स्ड रेट वाले बॉन्ड्स को फ्लोटिंग रेट में बदल देते हैं। इससे निवेशकों को ब्याज दरें बढ़ने पर नुकसान के बजाय फायदा होने की संभावना रहती है।

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जनवरी 2026 का बाजार और फ्लोटर फंड

जनवरी 2026 में भारतीय रिजर्व बैंक के रेपो रेट 5.25% पर है। दिसंबर 2025 की मीटिंग में इसमें 0.25% की कटौती की गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि अब ब्याज दरों में बड़ी कटौती का दौर खत्म हो रहा है। ऐसे समय में फ्लोटर फंड निवेशकों के लिए अच्छे साबित हो सकते हैं। वर्तमान में तीन साल के AAA रेटिंग वाले पीएसयू (PSU) बॉन्ड्स करीब 6.91% का रिटर्न दे रहे हैं। यह रेपो रेट से काफी बेहतर है।

टैक्स के नियमों को समझना जरूरी

फ्लोटर फंड पर टैक्स इस बात पर निर्भर करता है कि आपने निवेश कब किया था। अगर आपने 1 अप्रैल, 2023 के बाद निवेश किया है तो आपको होने वाले पूरे मुनाफे पर आपके इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स देना होगा। चाहे आपने पैसा कितने भी समय के लिए लगाया हो, इसमें कोई छूट नहीं मिलेगी। हालांकि, 1 अप्रैल, 2023 से पहले के पुराने निवेश पर नियम थोड़े अलग हैं। अगर पुरानी यूनिट्स को 24 महीने से ज्यादा समय तक रखा जाए तो उन पर 12.5% की दर से लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स लगता है।

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किसे करना चाहिए निवेश?

ये फंड उन लोगों के लिए बेहतर हैं जो 1 से 3 साल के लिए निवेश करना चाहते हैं। अगर आप फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से थोड़े बेहतर रिटर्न की उम्मीद रखते हैं तो ये आपके लिए अच्छा विकल्प हो सकते हैं। ये फंड उन निवेशकों को सुरक्षा देते हैं जो ब्याज दरों के बढ़ने से होने वाले नुकसान से बचना चाहते हैं। हालांकि, इनमें निवेश करने से पहले क्रेडिट रिस्क और फंड की क्वालिटी की जांच जरूर करनी चाहिए।

Disclaimer: यह लेख सिर्फ जानकारी के लिए है। इसमें दिए गए विचार और सुझाव एक्सपर्ट के हैं, मिंट हिंदी के नहीं। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि निवेश संबंधी कोई फैसला लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञ से सलाह लें, क्योंकि बाजार की स्थितियां तेजी से बदल सकती हैं और हालात अलग-अलग हो सकते हैं।

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