
Digital Currency of India Explained: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने डिजिटल रुपया (e ₹) लॉन्च किया है। आरबीआई से जारी सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) को ई-रुपया नाम दिया गया है। ई-रुपया है क्या? ई-रुपया किसे, कहां और कैसे मिलता है? ई-रुपये को कहां और कैसे खर्च किया जा सकता है? क्या ई-रुपया बिटकॉइन जैसा क्रिप्टोकरेंसी है? क्या ई-रुपया यूपीआई जैसा है? क्या ई-रुपये के खर्च पर कैशबैक मिलता है? और सवाल है कि क्या हमें ई-रुपये का उपयोग करना चाहिए, अगर हां तो क्यों और नहीं तो क्यों? आइए आज ई-रुपये से जुड़े सारे सवालों के जवाब जानते हैं?
ई-रुपया (e ₹) और कुछ भी नहीं, आपके पास पड़े नोटों और सिक्कों की डिजिटल फॉर्म है। भारत के केंद्रीय बैंक आरबीआई ने इसे लॉन्च किया है। बैंक डिजिटल टोकन तैयार करते हैं जिसे ई-रुपये के रूप में उपयोग किया जाता है।
नहीं, ई-रुपया क्रिप्टोकरेंसी बिल्कुल नहीं है। इन दोनों में बहुत से अंतर हैं जिनमें कुछ मुख्य अंतर इस प्रकार हैं-
क्रिप्टोकरेंसी को पैसे से खरीदा जाता है, लेकिन ई-रुपया आपका पैसा ही है, उसे खरीदना नहीं पड़ता।
क्रिप्टोरकरेंसी की ट्रेडिंग होती है, उसका मूल्य घटता-बढ़ता रहता है, लेकिन ई-रुपया का मूल्य स्थिर है। वह आपके नोट और सिक्कों के बराबर के मूल्य का है।
क्रिप्टोकरेंसी से इतर ई-रुपया कोई निवेश की वस्तु नहीं है जिससे मुनाफा कमाया जा सके, बल्कि यह भुगतान का एक सुरक्षित माध्यम है।
क्रिप्टोकरेंसी 'कानूनी निविदा' यानी लीगल टेंडर नहीं है जबकि ई-रुपया एक लीगल टेंडर है, जिसका अर्थ है कि इसका मूल्य सरकार से गारंटीकृत है।
तकनीक के लिहाज से भी क्रिप्टोकरेंसी और ई-रुपये में अंतर है। क्रिप्टोकरेंसी पूरी तरह ब्लॉकचेन पद्धति पर आधारित है जबकि ई-रुपया ब्लॉकचेन और डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी (DLT), दोनों की मिश्रित पद्धति से संचालित होता है।
क्रिप्टोकरेंसी की माइनिंग की जाती है, लेकिन ई-रुपया 'माइन' नहीं किया जाता, बल्कि यह एल्गोरिदम आधारित सुरक्षित प्रक्रियाओं के माध्यम से जारी किया जाता है।
नहीं, यूपीआई एक पेमेंट सिस्टम है, कोई करेंसी नहीं। दूसरी तरफ, ई-रुपया डिजिटल करेंसी है, पेमेंट सिस्टम नहीं। डिजिटल रुपया स्वयं मुद्रा का एक डिजिटल रूप है, जबकि यूपीआई भुगतान का केवल एक माध्यम है। दूसरे शब्दों में, यूपीआई एक साधन है जिसके माध्यम से आप पैसा ट्रांसफर करते हैं, जबकि डिजिटल रुपया वह पैसा है जिसे आप ट्रांसफर करते हैं।
यूपीआई ट्रांजेक्शन के लिए एक बैंक खाता होना अनिवार्य है, क्योंकि यह एक खाते से दूसरे खाते में पैसा ट्रांसफर करता है। इसके विपरीत, डिजिटल रुपया वॉलेट बैंक खाते से स्वतंत्र रूप से काम कर सकता है; एक बार वॉलेट लोड होने के बाद लेनदेन के लिए बैंक सर्वर या मध्यस्थों की आवश्यकता नहीं होती।
यूपीआई लेनदेन में पैसा एक बैंक से दूसरे बैंक में जाता है, जिसका अंतिम निपटान बैंकों के बीच बाद में होता है। डिजिटल रुपया लेनदेन नकदी की तरह तुरंत और अंतिम होता है, क्योंकि इसमें सीधे 'सेंट्रल बैंक मनी' का ट्रांसफर होता है।
डिजिटल रुपया सीधे आरबीआई की लाइबिलिटी है और यह आरबीआई के बैलेंस शीट पर दिखाई देता है। इसके विपरीत, यूपीआई में आपके बैंक खाते में जमा राशि बैंक की लाइबिलिटी होती है।
यूपीआई के माध्यम से किया गया प्रत्येक लेनदेन बैंक स्टेटमेंट में दर्ज होता है। लेकिन 50 हजार रुपये से कम के आदान प्रदान पर ई-रुपये का हिसाब-किताब आपके बैंक अकाउंट स्टेटमेंट में दर्ज नहीं होता है। यह ठीक ऐसे ही है कि आपने एटीएम से पैसे निकाल लिए तो उस पैसे में कितना, कहां खर्च किया उसका हिसाब आपके बैंक अकाउंट में नहीं आता। हालांकि, 50 हजार रुपये से ज्यादा के ई-रुपये का प्रत्येक खर्च अकाउंट स्टेटमेंट में रहेगा।
आरबीआई ने थोक और खुदरा के रूप में उपयोग के आधार पर ई-रुपये के दो अलग-अलग प्रारूप तैयार किए हैं। आरबीआई ने ई-रुपये के खुदरा खर्च के लिए 1 दिसंबर, 2022 को चार शहरों से पायलट प्रॉजेक्ट शुरू किया था। ये चार शहर हैं- मुंबई, नई दिल्ली, बेंगलुरु और भुवनेश्वर। तब चार बैंकों एसबीआई, आईआईसीआई बैंक, एचडएफसी बैंक और ऐक्सिस बैंक को पायलट प्रॉजेक्ट में शामिल किया गया था। उससे एक महीने पहले, 1 नवंबर, 2022 को थोक में ई-रुपये के आदान-प्रदान का पायलट प्रॉजेक्ट शुरू हुआ था।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank), आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, यस बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, कोटक महिंद्रा बैंक, केनरा बैंक, एक्सिस बैंक, इंडसइंड बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, फेडरल बैंक, कर्नाटक बैंक, इंडियन बैंक, आईडीबीआई बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, बैंक ऑफ इंडिया और यूको बैंक।
आरबीआई ने अभी 50 पैसे, 1 रुपया, 2 रुपया, 5 रुपया, 10 रुपया, 20 रुपया और 50 रुपया मूल्य के ही ई-रुपये लॉन्च किए हैं। कुल मिलाकर आरबीआई के पास 6 अरब, 77 करोड़, 72 लाख, 7 हजार ई-रुपया टोकन हैं जिनका कुल मूल्य 6 अरब, 78 करोड़, 10 लाख रुपये है। संख्याओं को राउंडिंग ऑफ किए जाने के कारण कुल योग में मामूली अंतर संभव है।
| श्रेणी | मूल्यवर्ग ( ₹) | मात्रा (लाख टुकड़ों में) | मूल्य ( ₹ करोड़) |
|---|---|---|---|
| e ₹-खुदरा | 0.5 | 0.22 | 0 |
| e ₹-खुदरा | 1 | 67769.3 | 677.69 |
| e ₹-खुदरा | 2 | 0.3 | 0.01 |
| e ₹-खुदरा | 5 | 0.2 | 0.01 |
| e ₹-खुदरा | 10 | 0.21 | 0.02 |
| e ₹-खुदरा | 20 | 1.82 | 0.36 |
| e ₹-खुदरा | 50 | 0 | 0 |
| e ₹-खुदरा | 100 | 0 | 0 |
| e ₹-खुदरा | 200 | 0 | 0 |
| e ₹-खुदरा | 500 | 0 | 0 |
| e ₹-खुदरा | 2000 | 0 | 0 |
| कुल e ₹-खुदरा | 67772.07 | 678.1 | |
| कुल e ₹-थोक | 0 | ||
| कुल e ₹ | 67772.07 | 678.1 |
अगर आपका खाता ऊपर में दी गई सूची वाले किसी भी बैंक में है तो आपको ई-रुपये के उपयोग की अनुमति होगी। आपके बैंक खाते में पैसे जमा हैं तब आप उस बैंक का आधिकारिक डिजिटल रुपी ऐप गूगल प्ले स्टोर या ऐप स्टोर से डाउनलोड कर लें। ऐप को रजिस्टर करें। अगर रजिस्ट्रेशन हो जाता है तो इसका मतलब है कि आपको ई-रुपये के इस्तेमाल की अनुमति है।
हां, अभी आपके पास एंड्रॉयड वर्जन 10 और उससे ऊपर या iOS वर्जन 17 और उससे ऊपर वाला स्मार्टफोन होना चाहिए। हालांकि, आरबीआई इसे कीपैड मोबाइल से भी ई-रुपया के उपयोग की सुविधा देने की संभावना तलाश रहा है।
ऐप डाउनलोड करने के बाद ऐप खोलें और उसी सिम से रजिस्टर करें जिससे आपका बैंक अकाउंट रजिस्टर्ड है।
सिस्टम ऑटोमेटिक तरीके से सत्यापित करेगा कि आप इस सुविधा के लिए पात्र हैं या नहीं।
यदि आपका बैंक आपको अनुमति देता है, तो आप अपने बैंक खाते को लिंक करके और अपने डेबिट कार्ड विवरण के माध्यम से प्रमाणीकरण करके अपना डिजिटल वॉलेट सक्रिय कर सकते हैं।
हां, केवाईसी की जरूरत है, लेकिन इसके लिए अलग से कुछ नहीं करना पड़ता है। चूंकि ऐप पर रजिस्ट्रेशन करते वक्त बैंक अकाउंट डीटेल डालने होते हैं, इसलिए बैंक अकाउंट से लिंक होते ही ऑटोमेटेड केवाईसी हो जाती है।
नहीं, आरबीआई की योजना है कि ई-रुपया को भी यूपीआई की तरह ही लोकप्रिय बनाया जाए। इसलिए इसे हर आयु वर्ग और आय समूह के लोगों के उपयोग के लिए खुला रखा गया है। जिनके पास भी बैंक खाता है या खुलवा सकते हैं, उससे लेनदेन कर सकते हैं, वो सभी ई-रुपये का भी उपयोग कर पाएंगे।
हां, ई-रुपये का पूरा सिस्टम वॉलेट पर ही आधारित है। जब आप बैंक से डिजिटल रूपी ऐप डाउनलोड करके रजिस्ट्रेशन करते हैं तो वह दरअसल ई-रुपया वॉलेट का ही रजिस्ट्रेशन होता है। वॉलेट बैंक अकाउंट से एक अलग जगह होता है। पेमेंट कंपनियों के भी अपने-अपने वॉलेट्स हैं, जैसे कि पेटीएम वॉलेट, पेजैप वॉलेट, फोनपे वॉलेट, गूगल पे वॉलेट आदि। जब आप पैसे अपने अकाउंट से वॉलेट में डाल देते हैं तब आपके वॉलेट में वो पैसा जुड़ जाता है जबकि अकाउंट में उतनी रकम घट जाती है।
नहीं, ई-रुपया वॉलेट के लिए मिनिमम बैलेंस की कोई राशि तय नहीं है।
आप एक बैंक पर एक ई-वॉलेट रख सकते हैं। अगर आप एक से ज्यादा ऑनलाइन बैंकिंग का उपयोग कर रहे हैं तो आप ज्यादा ई-रुपया वॉलेट रख सकते हैं।
नहीं, डिजिटल रुपया नोटों-सिक्कों का डिजिटल प्रतिरूप है। चूंकि आपके पास रखे नोटों-सिक्कों पर कोई ब्याज नहीं मिलता है, इसलिए डिजिटल रुपये पर भी ब्याज नहीं मिलता है।
नहीं, यदि डिजिटल रुपये पर ब्याज दिया जाएगा, तब यह डिपॉजिट जैसा बन जाएगा। ऐसे में लोग बैंकों से अपना पैसा निकालकर सीधे ई-रुपया वॉलेट में रखने लगेंगे। इससे बैंकों के पास जमा राशि कम हो जाएगी, जिससे बैंक लोन नहीं दे पाएंगे। फिर पूरा फाइनैंशियल सिस्टम ही बिगड़ जाएगा।
नहीं, चूंकि ई-रुपया वॉलेट कोई इन्वेस्टमेंट टूल नहीं है, इसलिए ई-रुपया वॉलेट में पैसे रखने का टैक्स के कोई लेनादेना नहीं है।
ई-रुपया या इसके डिजिटल वॉलेट के उपयोग पर कोई शुल्क या फीस नहीं ली जाती है। आरबीआई का लक्ष्य डिजिटल रुपये को भौतिक बैंक नोटों की तुलना में अधिक सस्ता, तेज और आसान बनाना है।
नहीं, ई-रुपया के उपयोग पर कैशबैक ऑफर अभी नहीं मिलता है। हालांकि, विशेषज्ञों मानते हैं कि भारत जैसे देश में ई-रुपये को अपनाने और लोकप्रिय बनाने के लिए इंसेंटिव मैकेनिजम का उपयोग किया जा सकता है। इसमें रेफरल बोनस या ट्रांजेक्शन रिवार्ड्स जैसी विधियां शामिल हो सकती हैं ताकि वैसे लोग अधिक से अधिक ई-रुपया वॉलेट को अपनाएं जिनके पास बैंक अकाउंट नहीं है।
आप डिजिटल रुपया प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन इसे खरीदने के बजाय बैंक खाते से लोड किया जाता है। आप अपने बैंक खाते में जमा राशि को डिजिटल टोकन में बदल सकते हैं, ठीक वैसे ही जैसे आप एटीएम से नकदी निकालते हैं।
हां, आप वॉलेट ऐप में जाकर ई-रुपये को रिडीम कर सकते हैं। रिडीम करने पर पैसा वापस बैंक अकाउंट में चला जाएगा।
हां, आप अपने ई-रुपया वॉलेट ऐप से यूपीआई पेमेंट कर सकते हैं।
नहीं, आप अपने ई-रुपया वॉलेट से किसी यूपीआई ऐप पर पेमेंट सिर्फ भेज सकते हैं, वहां से ले नहीं नहीं सकते। आपको अपने ई-रुपया वॉलेट में पैसे सिर्फ दूसरे ई-रुपया वॉलेट से ही मिल सकता है।
हां, ई-रुपया वॉलेट का उपयोग बिना बैंक खाते के किया जा सकता है। आने वाले दिनों में ई-रुपया वॉलेट ऐप आधार से लिंक होगा। खुदरा डिजिटल रुपया एक 'टोकन-आधारित' और 'बेयरर इंस्ट्रूमेंट' के रूप में डिजाइन किया गया है। इसका मतलब है कि जिसके पास डिजिटल टोकन है, वही उसका मालिक माना जाता है, ठीक वैसे ही जैसे नोट और सिक्के के मामले में होता है। सोचिए, क्या नोट और सिक्का रखने के लिए आपको बैंक अकाउंट की जरूरत है? जब ई-रुपया पूरी तरह चलन में आ जाएगा तब इसे रखने के लिए बैंक अकाउंट की जरूरत खत्म हो जाएगी।
दैनिक जीवन में डिजिटल रुपये का उपयोग नोटों-सिक्कों की तरह ही किया जा सकता है।
आप ई-रुपया का उपयोग किराने का सामान खरीदने, चाय की दुकान पर भुगतान करने या अन्य खुदरा सेवाओं के लिए किया जा सकता है।
ई-कॉमर्स और अन्य ऑनलाइन सर्विसेज के लिए भी डिजिटल रुपये का उपयोग भुगतान के एक सुरक्षित विकल्प के रूप में किया जा सकता है।
आप अपने मित्रों, परिवार के सदस्यों या किसी भी अन्य व्यक्ति को तुरंत डिजिटल रुपया भेज सकते हैं, जिसके पास ई-रुपये वॉलेट है। यह ट्रांसफर सीधे एक वॉलेट से दूसरे वॉलेट में होता है और बैंक खाते की मध्यस्थता के बिना तुरंत सेटल हो जाता है।
हां, डिजिटल रुपया वॉलेट को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह मौजूदा यूपीआई क्यूआर के साथ भी काम कर सके, जिससे पेमेंट करना आसान हो जाता है। आप किसी भी मर्चेंट के पास उपलब्ध मौजूदा यूपीआई क्यूआर कोड को स्कैन करके पेमेंट कर सकते हैं। आने वाले दिनों में मर्चेंट के पास सीबीडीसी क्यूआर कोड भी उपलब्ध होंगे।
अभी आपके मोबाइल में डाउनलोड यूपीआई ऐप का क्यूआर कोड होता है, वैसे ही ई-रुपया वॉलेट का भी क्यूआर कोड होता है। जिसने ई-रुपया वॉलेट रजिस्टर कर रखा है, उससे वॉलेट का क्यूआर कोड मंगाकर अपने ई-रुपया वॉलेट ऐप से ठीक उसी तरह पेमेंट कर सकते हैं जैसे कि यूपीआई से करते हैं।
मर्चेंट को डिजिटल रुपया के माध्यम से भुगतान प्राप्त करने पर कोई एमडीआर या ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं देना होगा। दरअसल, ई-रुपया का लेनदेन सीधे एक वॉलेट से दूसरे वॉलेट में होते हैं। इसमें बैंक सर्वर, पेमेंट गेटवे या नेटवर्क स्विच जैसे मध्यस्थों की निर्भरता नहीं होती है, जो आमतौर पर डिजिटल लेनदेन में एमडीआर शुल्क वसूलते हैं।
ई-रुपया का ट्रांजैक्शन फटाफट सेटल हो जाता है। जिस किसी भी ई-वॉलेट में पैसा डाला जाता है, वहां वह पैसा तुरंत क्रेडिट हो जाता है। आप किसी दुकानदार को ई-रुपया पेमेंट करते हैं तो पैसा तुरंत और सीधे मर्चेंट के वॉलेट में जमा हो जाता है, जिससे यह मौजूदा डिजिटल पेमेंट सिस्टम्स की तुलना में अधिक किफायती और तेज हो जाता है।
ई-रुपया लीगल टेंडर है, जिसका अर्थ है कि इसे पेमेंट के रूप में स्वीकार करना कानूनी रूप से अनिवार्य है। चूंकि ई-रुपया आरबीआई से जारी संप्रभु मुद्रा है, इसलिए इसे सभी नागरिकों, उद्यमों और सरकारी एजेंसियों को इसकी लेनदेन स्वीकार करनी ही होगा। जब ई-रुपया पूरी तरह से लॉन्च हो जाएगा, तब कोई भी भौतिक रुपये लेने से मना नहीं कर सकता, वैसे ही जैसे यूपीआई पेमेंट लेने से इनकार नहीं कर सकता।
हां, ई-रुपया का ऑफलाइन यूज हो सकता है। इस उन क्षेत्रों में लेनदेन को सक्षम बनाने के लिए डिजाइन किया गया है जहां इंटरनेट या टेलीकॉम कनेक्टिविटी सीमित या अनुपलब्ध है।
ऑफलाइन ई-रुपया लेनदेन बैंक सर्वर के माध्यम से जाने के बजाय दो डिजिटल वॉलेट के बीच सीधे होते हैं।
पेमेंट करने के लिए NFC (Near Field Communication) या ब्लूटूथ (Bluetooth) जैसी सुरक्षित निकटता वाली तकनीकों का उपयोग किया जाता है।
यूजर अपने फोन या डिवाइस को रिसीवर के डिवाइस से 'टैप' करके तुरंत पैसे ट्रांसफर कर सकते हैं।
ऑफलाइन पेमेंट का पैसा तुरंत रिसीवर के ई-रुपया वॉलेट में जुड़ जाता है।
यदि आपके वॉलेट में केवल 20 रुपये का टोकन है और आपको 15 रुपये पेमेंट करना है, तो सिस्टम ऑटोमेटिक तरीक से 15 रुपये ट्रांसफर करके 5 रुपये का चेंज आपके वॉलेट में वापस जमा कर देगा।
ध्यान रहे कि भले ही व्यक्तिगत लेनदेन ऑफलाइन हो सकते हैं, लेकिन वॉलेट में राशि लोड करने, उसे रिडीम करने या वॉलेट बैलेंस को बैंक सर्वर के साथ सिंक करने के लिए समय-समय पर इंटरनेट या नेटवर्क की आवश्यकता होगी।
हां, आप ई-वॉलेट रुपया वॉलेट का उपयोग दिन या रात में किसी भी समय, छुट्टियों के दौरान भी कर सकते हैं क्योंकि यह बैंकिंग के कामकाज पर निर्भर नहीं है। आप इसका उपयोग हर पल और साल के सभी दिन कर सकते हैं।
आप अपने डिजिटल रुपया ऐप के ट्रांजेक्शन हिस्ट्री सेक्शन में अपने सभी पुराने लेनदेन देख सकते हैं। यह हिस्ट्री केवल आपके ऐप के भीतर उपलब्ध होता है और इसमें आप महीना, स्थिति, या लेनदेन का प्रकार जैसे फिल्टर का उपयोग करके अपनी गतिविधियों को ट्रैक कर सकते हैं।
हां, ई-रुपया का उपयोग सरकार भ्रष्टाचार रोकने, योजनाओं लिए आवंटित धन का सदुपयोग करने में किया जा सकता है। सरकार या कोई कंपनी डिजिटल रुपये को एक 'स्पेशल वाउचर' की तरह प्रोग्राम कर सकती है। उदाहरण के लिए, यदि सरकार कृषि सहायता के लिए ई-रुपया देती है, तो उसे केवल उर्वरक या बीज खरीदने के लिए ही इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसी तरह कंपनियों द्वारा दिए गए 'भोजन भत्ते' के टोकन केवल रेस्तरां में ही चलेंगे।
हां, कुछ राज्यों ने यह सिस्टम लागू भी कर दिया है। आंध्र प्रदेश की 'दीलम 2.0' (DEEPAM 2.0)योजना में रसोई गैस (LPG) सब्सिडी को प्रोग्रामेबल डिजिटल रुपये के माध्यम से वितरित किया जा रहा है।
वहीं, गुजरात की 'जी-सफल' (G-SAFAL) योजना के तहत किसानों को मिलने वाली आजीविका सहायता को निश्चित कृषि सामग्री खरीदने के लिए प्रोग्राम किया गया है। आंध्र प्रदेश और गुजरात की इन योजनाओं के लाभुक सरकार से मिले योजना के पैसों को उन्हीं मदों में पैसे खर्च कर पा रहे हैं जिनके लिए सरकार ने उन्हें पैसे भेजे हैं। लाभुकों के आधार से जुड़े ई-रुपया वॉलेट तैयार कर दिए गए हैं जिनमें सरकार सब्सिडी के पैसे भेजा करती है।
भारत सरकार भी सब्सिडी के पैसे ई-रुपया में देने की योजना ला सकती है। नरेंद्र मोदी सरकार ने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से सरकारी योजनाओं के पैसे सीधे लाभुकों के बैंक खातों में डाल रही है जिससे बिचौलिये के लिए लाभुकों का हक मारने की गुंजाइश ही नहीं बची। अब सरकार लाभुकों पर भी शिकंजा कस सकती है। सरकार चाहेगी कि उसने जो पैसे जिस काम के लिए दिए हैं, उस पैसे का उपयोग उसी के लिए हो। इस उद्देश्य में ई-रुपया सिस्टम बहुत कारगर होगा।
मान लीजिए, सरकार ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSMEs) को सस्ती ब्याज दरों पर लोन दिलाती है तो वह चाहेगी कि इस लोन के पैसे का उपयोग उद्योग अपने कारोबार के विस्तार में ही करें ना कि दूसरी जगह। तब ई-रुपया को ऐसा प्रोग्राम कर दिया जाएगा कि वह संबंधित जगहों पर, एक समयसीमा में ही खर्च हो सके। इसके लिए ई-रुपया टोकन में एक्सपायरी डेट डाल दी जाएगी, जियो फेंसिंग कर दिया जाएगा जिससे खास इलाके में ही उसका उपयोग हो सकेगा। साथ ही, इसे केवल स्पेशल मर्चेंट वीपीए (VPA) या मर्चेंट श्रेणी कोड (MCC) पर काम करने के लिए सेट किया जा सकता है।
इसी तरह, ई-रुपये का उपयोग प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) जैसी योजनाओं के प्रभाव को बढ़ाने के लिए किया जा सकता है। यह उन लाभार्थियों को भी फाइनैंशियल सिस्टम से जोड़ सकता है जिनके पास एक्टिव बैंक अकाउंट नहीं है। ऐसे लोगों को प्रोग्राम्ड टोकन सीधे उनके वॉलेट में भेजे जा सकेंगे।
ई-रुपये का उपयोग करके विदेशों में भुगतान और सीमा पार लेनदेन न केवल संभव है, बल्कि यह इस तकनीक को विकसित करने के मुख्य उद्देश्यों में से एक है। डिजिटल रुपये का उपयोग भारत के बाहर भुगतान और निपटान के लिए किया जा सकता है, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भारतीय रुपये की स्थिति को मजबूत करेगा।
अभी सीमा पार लेनदेन में 2 से 3 वर्किंग डेज लगते हैं, जबकि डिजिटल रुपये के माध्यम से ये लेनदेन रीयल टाइम में और तुरंत पूरे किए जा सकेंगे।
इससे दुनियाभर में फैले भारतीय, भारत में अपने परिवार के पास रीयल टाइम में पैसे भेज पाएंगे।
आरबीआई इस दिशा में अन्य देशों के केंद्रीय बैंकों के साथ मिलकर काम कर रहा है।
mCBDC ब्रिज प्रॉजेक्ट के तहत चीन, हांगकांग, यूएई और थाईलैंड के केंद्रीय बैंक मिलकर एक ऐसा प्लैटफॉर्म बना रहे हैं जहां वास्तविक समय में सीमा पार भुगतान हो सकें।
प्रोजेक्ट डनबर (Project Dunbar) में ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, सिंगापुर और दक्षिण अफ्रीका के केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्राओं का उपयोग करके अंतरराष्ट्रीय निपटान के परीक्षण कर रहे हैं।
ई-रुपया और यूपीआई दोनों अलग-अलग उद्देश्यों की पूर्ति करते हैं और आरबीआई का लक्ष्य डिजिटल रुपये के माध्यम से यूपीआई को बदलना नहीं, बल्कि उसे एक पूरक विकल्प के रूप में पेश करना है। आपकी आवश्यकता और प्राथमिकता के आधार पर, यहां दोनों के बीच तुलना दी गई है जिससे आप तय कर सकते हैं कि आपको डिजिटल रुपये का इस्तेमाल कब करना चाहिए।
डिजिटल रुपया आरबीआई की सीधी लाइबिलिटी है। यूपीआई में पैसा वाणिज्यिक बैंक की जिम्मेदारी होता है, लेकिन ई-रुपया सीधे 'सेंट्रल बैंक मनी' है, जिसमें कोई क्रेडिट या लिक्विडिटी जोखिम नहीं होता।
यूपीआई लेनदेन आपके बैंक स्टेटमेंट में दर्ज होते हैं। इसके विपरीत, डिजिटल रुपया नकदी जैसी अनोनिमिटी प्रदान करता है। विशेष रूप से 50,000 रुपये से कम के लेनदेन बैंक स्टेटमेंट में दिखाई नहीं देते, जिससे आपकी निजता बनी रहती है।
यूपीआई के लिए इंटरनेट कनेक्शन जरूरी है। डिजिटल रुपया एनएफसी तकनीक के माध्यम से पूरी तरह ऑफलाइन काम कर सकता है, जो इसे नेटवर्क विहीन क्षेत्रों या आपदा के समय के लिए बेहतर बनाता है।
यूपीआई के लिए बैंक खाता अनिवार्य है, लेकिन डिजिटल रुपया एक 'बेयरर इंस्ट्रूमेंट' है। हालांकि वर्तमान पायलट चरण में इसे बैंक खाते से जोड़ा गया है, लेकिन भविष्य में इसे बिना बैंक खाते के भी इस्तेमाल किया जा सकेगा।
डिजिटल रुपये को सब्सिडी या बच्चों की फीस जैसे विशेष उद्देश्य के लिए प्रोग्राम किया जा सकता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि पैसा सही जगह खर्च हो रहा है।
डिजिटल रुपया वॉलेट में रखे पैसे पर कोई ब्याज नहीं मिलता है। यूपीआई के मामले में, आपका पैसा बैंक खाते में रहता है जहां आपको नियमित ब्याज मिलता रहता है।
यूपीआई वर्तमान में भारत के 85% डिजिटल लेनदेन का हिस्सा है और हर जगह स्वीकार्य है। डिजिटल रुपया अभी पायलट चरण में है और इसे धीरे-धीरे अधिक बैंकों और शहरों में विस्तारित किया जा रहा है।
पायलट चरण में डिजिटल रुपया वॉलेट में पैसा रखने और खर्च करने की निश्चित सीमाएं हैं (जैसे ICICI बैंक में वॉलेट क्षमता ₹1,00,000 तक है), जबकि यूपीआई में ऐसी सीमाएं आमतौर पर अधिक लचीली होती हैं।
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