Interim Budget vs Full Budget: क्या होता है अंतरिम बजट? ये फुल टर्म बजट से कैसे होता है अलग, डिटेल में जानें

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को केंद्रीय बजट पेश करेंगी। बजट से पहले आर्थिक सर्वे आएगा। चुनावी वर्ष में पेश होने वाला अंतरिम बजट नई सरकार बनने तक जरूरी खर्चों की अनुमति देता है, जबकि फुल बजट पूरे वित्त वर्ष की नीतियां और योजनाएं बताता है।

Manali Rastogi
पब्लिश्ड20 Jan 2026, 01:27 PM IST
Interim Budget vs Full Budget: क्या होता है अंतरिम बजट? ये फुल टर्म बजट से कैसे होता है अलग, डिटेल में जानें
Interim Budget vs Full Budget: क्या होता है अंतरिम बजट? ये फुल टर्म बजट से कैसे होता है अलग, डिटेल में जानें(Sanjeev Verma/ Hindustan Times)

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को संसद में केंद्रीय बजट पेश करेंगी। यह लगातार नौवीं बार होगा जब वह बजट प्रस्तुत करेंगी। इस साल 1 फरवरी रविवार होने के बावजूद सरकार ने साफ कर दिया है कि बजट की तारीख न तो आगे बढ़ाई जाएगी और न ही बदली जाएगी।

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बजट से एक दिन पहले आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) पेश किया जाएगा। यह देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति पर सरकार की आधिकारिक रिपोर्ट होती है। इसमें भविष्य की आर्थिक नीतियों और सरकार की दिशा के संकेत मिलते हैं। आर्थिक सर्वेक्षण को वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार (Chief Economic Adviser) और उनकी टीम तैयार करती है।

अंतरिम बजट क्या होता है?

अंतरिम बजट चुनावी वर्ष में केंद्र सरकार द्वारा पेश किया जाने वाला एक अस्थायी बजट होता है। इसका उद्देश्य नई सरकार बनने तक सरकारी कामकाज को सुचारु रूप से चलाने के लिए जरूरी खर्चों की संसद से मंजूरी लेना होता है।

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अंतरिम बजट में सरकार आमतौर पर बड़े नीतिगत फैसले या लंबे समय के सुधारों की घोषणा नहीं करती, क्योंकि आने वाली नई सरकार इन फैसलों से बंधी नहीं होती और वह अपनी अलग नीतियां बना सकती है।

चूंकि वित्त वर्ष 31 मार्च को समाप्त हो जाता है और नई सरकार आमतौर पर मई के अंत या जून की शुरुआत में बनती है, इसलिए इस बीच के समय में सरकारी खर्च और आय को संभालने के लिए अंतरिम बजट जरूरी होता है।

अंतरिम बजट और फुल बजट में क्या अंतर है?

फुल बजट पूरे वित्त वर्ष के लिए सरकार का विस्तृत और अंतिम वित्तीय दस्तावेज होता है। इसमें सरकार के खर्च, आय के स्रोत और नीतिगत प्राथमिकताओं की पूरी जानकारी दी जाती है।

फुल टर्म बजट के दो मुख्य हिस्से होते हैं:

  • बीते वित्त वर्ष की आय और खर्च का विवरण
  • आने वाले वित्त वर्ष के लिए प्रस्तावित आय और खर्च का अनुमान

वहीं, अंतरिम बजट में यह जानकारी सीमित होती है और केवल उस अवधि तक के खर्च और आय का अनुमान दिया जाता है, जब तक नई सरकार पूरा बजट पेश नहीं कर देती।

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फुल बजट पर लोकसभा और राज्यसभा दोनों में विस्तार से चर्चा और बहस होती है, जबकि अंतरिम बजट के मामले में ऐसी विस्तृत चर्चा नहीं होती।

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