Loan Settlement: लोन सेटलमेंट कर लिया तो क्या नहीं भरना होगा EMI? जानिए कैसे बंद करें अकाउंट

Loan Settlement: लोन की EMI मिस होने पर बैंक सेटलमेंट का ऑप्शन देता है, लेकिन इसका असर क्रेडिट स्कोर पर बहुत पड़ता है। सेटलमेंट को लोन क्लोजर नहीं माना जाता। सही समय पर बाकी रकम चुकाकर ही अकाउंट को क्लोज्ड स्टेटस में बदला जा सकता है और स्कोर सुधरता है।

Priya Shandilya
पब्लिश्ड11 Dec 2025, 10:10 AM IST
लोन सेटलमेंट कर लिया तो क्या नहीं भरना होगा EMI?
लोन सेटलमेंट कर लिया तो क्या नहीं भरना होगा EMI?

Loan Settlement: आजकल घर, गाड़ी या पढ़ाई के लिए लोन लेना तो आम बात है। मुश्किल तब आती है जब अचानक हालात बिगड़ जाएं और EMI भरनी भारी पड़ने लगे जैसे नौकरी चली जाए या कोई मेडिकल इमरजेंसी आ जाए। ऐसे में अगर ईएमआई की तीन किस्तें लगातार मिस हो जाएं, तो बैंक सीधे ग्राहक को डिफॉल्टर मानकर लोन को नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) में डाल देता है।

ऐसे हालात में बैंक वसूली के लिए कई तरीके अपनाता है और कभी-कभी वन टाइम सेटलमेंट (OTS) का ऑफर भी देता है। कई लोग इसे राहत की तरह देखते हैं क्योंकि इसमें एकमुश्त रकम देकर बीच का रास्ता निकल आता है। लेकिन क्या ये वाकई फायदेमंद है, चलिए समझते हैं।

क्या होता है लोन सेटलमेंट?

लोन सेटलमेंट एक तरह का समझौता है जिसमें उधारकर्ता और बैंक कम राशि पर फाइनल बात कर लेते हैं। ज्यादातर मामलों में ग्राहक को प्रिंसिपल अमाउंट पूरा देना होता है, लेकिन बैंक इंटरेस्ट, लेट फीस और कई चार्जेज माफ कर देता है। कभी-कभी प्रिंसिपल में भी थोड़ी राहत मिल जाती है।

सेटलमेंट का मतलब क्लोजर नहीं

कई लोग सोचते हैं कि सेटलमेंट के बाद लोन पूरी तरह बंद हो गया। लेकिन ऐसा नहीं है। सेटलमेंट से रिकवरी एजेंसियों से राहत मिलती है, पर इसे लोन क्लोजर नहीं माना जाता। क्लोजर तभी होता है जब आप पूरा लोन और ब्याज चुका दें।

लोन सेटलमेंट के नुकसान

  • सेटलमेंट होते ही आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में “Settled” लिखा जाता है और यही आपकी पूरी परेशानी की जड़ है।
  • CIBIL Score 50-100 पॉइंट तक गिर सकता है
  • रिपोर्ट में ये सेटल्ड स्टेटस 7 साल तक रहता है
  • नए लोन, क्रेडिट कार्ड या EMI पर मंजूरी मुश्किल हो जाती है
  • कई बैंक ऐसे ग्राहकों को ब्लैकलिस्ट कर देते हैं

इसलिए मजबूरी न हो तो सेटलमेंट से बचना ही बेहतर है।

सेटलमेंट के बाद लोन क्लोजर कराने का स्टेप-बाय-स्टेप तरीका:

  • अगर आपने मजबूरी में सेटलमेंट कर लिया है, तो बाद में अकाउंट क्लोज्ड करवाना भी संभव है।
  • आर्थिक रूप से स्थिर होने पर बैंक को बताएं कि आप बचा हुआ इंटरेस्ट, पेनल्टी और बाकी चार्जेज भरना चाहते हैं।
  • जो राशि सेटलमेंट में माफ हुई थी, वह अब चुकानी होगी।
  • पेमेंट के बाद बैंक से No-Dues Certificate लें, ये बहुत जरूरी है।
  • बैंक CIBIL को अपडेट भेजेगा और कुछ समय में “Settled” की जगह “Closed” दिखने लगेगा। साथ ही आपका स्कोर भी धीरे-धीरे सुधर जाएगा।

सेटलमेंट कभी-कभी जरूरी हो सकता है, लेकिन ये कोई फाइनल समाधान नहीं है। कोशिश करें EMI मिस ही ना हो, और अगर हालात बिगड़ जाएं तो बैंक से बात कर के रिस्ट्रक्चरिंग जैसे और विकल्प पहले देखें।

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