Health Insurance: अक्सर हम लोग हेल्थ इंश्योरेंस लेते तो जल्दी हैं, लेकिन हर साल उसके रिन्यूअल के वक्त क्या-क्या नियम चलते हैं, इस पर ज्यादा ध्यान नहीं देते। अभी कुछ समय से कई कंपनियों ने पॉलिसी रिन्यू करते समय लोगों से पूछा जाना शुरू कर दिया है कि आपकी सेहत में कोई बड़ा बदलाव तो नहीं आया? ऐसे में कइयों के मन में सवाल भी उठता है कि क्या इससे प्रीमियम तो नहीं बढ़ जाएगा? कहीं कंपनी क्लेम या रिन्यूअल ही न रोक दे? यही वजह है कि अब ‘मटेरियल चेंज’ क्लॉज चर्चा में है।
क्या है ये मटेरियल चेंज क्लॉज?
कुछ इंश्योरेंस कंपनियां अब पॉलिसी रिन्यू करते समय ये पूछ रही हैं कि पॉलिसी खरीदने के बाद आपकी सेहत में कोई नई बीमारी या बड़ा बदलाव तो नहीं आया। मतलब अगर कोई बीमारी हाल ही में पकड़ी गई है, तो उसे बताना होगा। हालांकि हर कंपनी ने ये क्लॉज नहीं लगाया है, लेकिन कुछ बड़ी इंश्योरेंस कंपनियों ने अपनी पॉलिसी की शर्तों में यह बात जोड़ दी है। जैसे ICICI Lombard, ACKO, SBI General, ManipalCigna, Reliance General, Raheja QuBE, Zuno आदि के कुछ हेल्थ प्लान्स में अब ये भी शामिल है।
क्या नई बीमारी बताने से बढ़ जाएगा प्रीमियम?
बहुत से लोग मान लेते हैं कि नई बीमारी की जानकारी देने पर प्रीमियम तुरंत बढ़ जाएगा। लेकिन एक्सपर्ट्स और कंपनियां दोनों इसके उलट कह रही हैं। इकोनॉमिक टाइम्स ने ACKO के नितिन गुप्ता के हवाले से बताया कि अगर आप सिर्फ पुरानी पॉलिसी रिन्यू कर रहे हैं, तो आपको नई बीमारी बताने की जरूरत ही नहीं है। ICICI Lombard का भी यही कहना है कि मटेरियल चेंज क्लॉज होने के बावजूद, नई बीमारी आने पर न प्रीमियम बढ़ सकता है और न ही कवरेज बदला जा सकता है।
Fresh Underwriting कब होती है? यहां समझें आसान भाषा में
IRDAI के हिसाब से कंपनियां आपकी सेहत की दोबारा जांच तभी कर सकती हैं जब आप कवरेज (sum insured) बढ़ा रहे हों, कोई नया राइडर जोड़ रहे हों या पॉलिसी को दूसरी कंपनी में पोर्ट कर रहे हों। अगर आप वही पुरानी पॉलिसी बिना बदलाव के रिन्यू कर रहे हैं, तो नई बीमारी बताने के आधार पर कंपनी कुछ भी नहीं कर सकती।
पॉलिसी रिन्यू करने को लेकर IRDAI के नियम
नियामक (IRDAI) के मुताबिक:
- आपकी हेल्थ पॉलिसी को जिंदगी भर रिन्यू करने से रोका नहीं जा सकता
- सिर्फ इसलिए रिन्यू करने से मना नहीं किया जा सकता कि आपने पहले दावा (क्लेम) किया था
- जब तक आप सम इंश्योर्ड नहीं बढ़ाते, कंपनियों को दोबारा हेल्थ चेकिंग करने की इजाजत नहीं है
मतलब, चाहे पॉलिसी में मटेरियल चेंज वाला क्लॉज लिखा हो, IRDAI के नियम ज्यादा मजबूत हैं, और कंपनियां उन्हें नहीं तोड़ सकतीं।
नई बीमारी बताएं या नहीं? यही है सही जवाब
एक्सपर्ट्स कहते हैं, अगर आप पॉलिसी में कोई बदलाव नहीं कर रहे, सिर्फ रिन्यू कर रहे हैं तो नई बीमारी बताने की कोई जरूरत ही नहीं है।
मेडिकल जानकारी सिर्फ पॉलिसी खरीदते समय और अपग्रेड करते समय बताना जरूरी होता है। यानि हर साल रिन्यूअल के दौरान नई बीमारी बताना न तो IRDAI के नियमों में है और न ही आपकी जिम्मेदारी।