8th Pay Commission: क्या है ToR? जिसके बिना लागू नहीं हो सकता 8वां वेतन आयोग, जानिए कैसे बढ़ाएगा आपकी सैलरी

8th Pay Commission Latest Update: केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग को हरी झंडी दी है, जिससे वेतन और पेंशन में बढ़ोतरी की संभावना है। हालांकि अभी तक वेतन आयोग की एक अहम कड़ी को मंजूरी नहीं मिली है।

Anuj Shrivastava
अपडेटेड11 Aug 2025, 09:01 AM IST
ToR के बिना लागू नहीं होगा 8वां वेतन आयोग
ToR के बिना लागू नहीं होगा 8वां वेतन आयोग

8th Pay Commission News: केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए आने वाले साल नई उम्मीद लेकर आ सकते हैं। सरकार ने आखिरकार 8वें वेतन आयोग को हरी झंडी दे दी है, जिसका मतलब है कि अब वेतन, पेंशन और भत्तों में बढ़ोतरी लगभग तय मानी जा रही है। महंगाई के इस दौर में लाखों परिवार लंबे समय से पगार में बढ़ोतरी का इंतजार कर रहे थे, और अब उनकी इस चाहत पर सरकार ने आधिकारिक रूप से काम शुरू कर दिया है।

हालांकि, अब सब कुछ ToR (टर्म्स ऑफ रेफरेंस) के मंजूरी पर टिका है। इसी बीच नेशनल काउंसिल-संयुक्त एडवाइजरी सिस्टम के कर्मचारी पक्ष के सचिव शिव गोपाल मिश्रा ने एनडीटीवी प्रॉफिट को बताया है कि इसे 'जल्द से जल्द' मंजूरी मिलने की उम्मीद है। आइए जानते हैं कि ये ToR क्या है

ToR यानी Terms of Reference एक ऐसा दस्तावेज होता है जो किसी आयोग, विशेष रूप से वेतन आयोग,के कार्यक्षेत्र को परिभाषित करता है। ये बताता है कि आयोग को किन-किन विषयों पर काम करना है, जैसे वेतन ढांचा, भत्ते, पेंशन आदि। इसे आप आयोग का काम करने का नक्शा या दिशा-निर्देश मान सकते हैं।

ये सबसे जरूरी क्यों है?

ToR के बिना वेतन आयोग को सरकारी मान्यता नहीं मिलती, यानी वह आधिकारिक रूप से काम शुरू नहीं कर सकता। यह आयोग को स्पष्ट दिशा देता है कि उसे किस विषय पर सिफारिशें देनी हैं और किन सीमाओं के भीतर रहकर काम करना है। बिना ToR के आयोग का गठन अधूरा माना जाता है।

50 लाख से अधिक कर्मचारियों को फायदा

8वां वेतन आयोग करीब 50 लाख केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और 65 लाख पेंशनर्स को सीधा लाभ देगा। इसमें रक्षा क्षेत्र के कर्मचारी और उनके पेंशनर्स भी शामिल हैं। यानी कुल मिलाकर लगभग एक करोड़ लोगों को इसकी वजह से आर्थिक मजबूती मिलेगी।

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सरकार की ओर से उम्मीद जताई जा रही है कि आयोग की रिपोर्ट 2025 के अंत तक आ जाएगी और इसे जनवरी 2026 से लागू किया जा सकता है। यानी, अगर सब कुछ तय समय पर होता है, तो सिर्फ डेढ़ साल बाद कर्मचारियों की तनख्वाह और पेंशन दोनों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

सैलरी कैसे तय होती है?

केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में चार मुख्य हिस्से होते हैं:

  • मूल वेतन (Basic Pay): करीब 51.5%
  • महंगाई भत्ता (DA): करीब 30.9%
  • मकान किराया भत्ता (HRA): करीब 15.4%
  • यात्रा भत्ता: करीब 2.2%

कितनी बढ़ेगी सैलरी?

नए वेतन आयोग के तहत अनुमान है कि वेतन और पेंशन में 30-34% तक बढ़ोतरी हो सकती है।फिलहाल न्यूनतम वेतन 18,000 रुपये है, जो बढ़कर करीब 32,940 रुपये (अगर फिटमेंट फैक्टर 1.83 रहा) या फिर 44,280 रुपये (अगर 2.46 हुआ) तक पहुंच सकता है।वहीं, महंगाई भत्ता (DA) भी आयोग लागू होने से पहले दो बार बढ़ने की संभावना है, जिससे यह करीब 60% तक हो सकता है।

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