
हर नौकरीपेशा आदमी रिटायरमेंट के बाद के जीवन के लिए अच्छी पेंशन की चाहत रहता है। इसके लिए वे कई तरह के पेंशन फंड में निवेश करता है। ऐसा ही एक पेंशन फंड कॉर्पोरेट नेशनल पेंशन स्कीम है, जो काफी लोकप्रिय हो चुका है। कार्पेरेट सेक्टर में काम करने वाले लोग कार्पोरेट NPS मॉडल को काफी पसंद कर रहे हैं। इस स्कीम के तहत कंपनियों को खुद फंड मैनेज नहीं करना पड़ता है और कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद एक अच्छा कार्पस भी मिलता है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
नेशनल पेंशन स्कीम के कार्पोरेट एनपीएस मॉडल के तहत न्योक्ता और कर्मचारी दोनों ही पेंशन फंड में कंट्रीब्यूशन कर सकते हैं। हालांकि, सेवानिवृत्त होने के बाद मिलने वाली राशि निर्धारित नहीं होती है, बल्कि कॉर्पस इस पर निर्भर करता है कि पेंशन फंड में कितना पैसा निवेश किया गया है और कितने समय तक किया गया है। यह स्कीम डिफॉइंड कंट्रीब्यूशन मॉडल पर आधारित है। ऐसे में कर्मचारी की ओर से जितना लंबे समय तक जमा रहेगा और जितना कम चार्ज कटेगा, उतना अधिक रिटायरमेंट के बाद कॉर्पस मिलेगा।
UAN नंबर की तरह ही NPS सदस्यों को भी 12 अंकों का एक पर्मानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर (PRAN) मिलता है, जिसके जरिए कर्मचारी की पूरी जानकारी पता लगाई जा सकती है। यानी यह नंबर सिस्टम में कर्माचारी की पहचान बताता है। इसकी खास बात यह है कि अगर कर्मचारी एक कंपनी से दूसरी कंपनी में जाता है तभी उसका पर्मानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर को यह रहेगा। हालांकि, अगर कंपनी राष्ट्रीय पेंशन योजना से जुड़ी नहीं हो तो कर्मचारी अपने PRAN को ऑल सीटिजन मॉडल में जारी रख सकते हैं।
नेशनल पेंशन स्कीम के कार्पोरेट मॉडल के तहत कर्मचारियों को फ्लेक्सिबल इंवेस्टमेंट का विकल्प मिलता है। कर्मचारी अपनी उम्र या रिस्क के अनुसार इंवेस्टमेंट ऑप्शन और फंड मैनेजर का चुनाव कर सकते हैं। इसके अलावा, ऑटो चॉइस का भी विकल्प मिलता है। इसके तहत कर्मचारी की उम्र के हिसाब से इंवेस्टमेंट पैटर्न ऑटोमैटिक रूप से बदलता रहता है। अगर निवेश प्रक्रिया की बात करें तो, देश के किसी भी कोने से एनपीएस में कंट्रीब्यूशन किया जा सकता है, बशर्ते POP या POP-SP के माध्यम से प्रोसेस को पूरा करना होगा।
मालूम हो कि ओल्ड टैक्स रिजीम के तहत एनपीएस में कंट्रीब्यूशन करने वाले नौकरीपेशा लोगों को टैक्स में छूट भी मिलती है। दरअसल, इनकम टैक्स डिपॉर्टमेंट के नियमों के मुताबिक, आयकर धारा 80CCD के तहत एक साल में 1।5 लाख रुपये तक और धारा 80CCD(1B) के तहत 50,000 तक टैक्स में छूट का दावा किया जा सकता है।
गौरतलब है कि एनपीएस में दो टाइप के अकाउंट होते हैं। पहला टायर 1 और दूसरा टायर 2। टियर 1 के लिए निवेश न्यूनतम राशि 1000 रुपये प्रति साल है, जबकि एक बार में कम से कम 500 रुपये का निवेश करना अनिवार्य है। वहीं, टियर 2 अकाउंट में निवेश करने के लिए कोई न्यूनतम सीमा नहीं और एक बार में कम से कम 250 रुपये निवेश करना अनिवार्य है। बता दें कि इस अकाउंट्स में कर्माचारी सेवानिवृति के बाद भी पैसा निकाले बिना खाते तो बढ़ने दे सकते हैं।
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